राज्य ब्यूरो, जम्मू। चीन की साजिशों और लगातार उसके रंग बदलने को लेकर भारतीय सेना पूरी तरह सजग है। पूर्वी लद्दाख में युद्ध जैसे हालात से निपटने और लंबे समय तक मुकाबले के लिए सेना ने पूरी तैयारी कर ली है। बर्फबारी से पहले ही टैंकों, तोपों, गोला-बारूद और मिसाइल से लेकर पेट्रोल-डीजल का पर्याप्त भंडारण कर लिया गया है। बर्फबारी के दौरान भी सुरक्षाबलों की आवाजाही को सुगम बनाने के लिए अतिरिक्त मशीनरी और साजोसामान तैयार है। आधुनिक हथियार और विमान दुश्मन की हर साजिश को नाकाम करने को तैयार हैं।

सर्दी में लद्दाख की सड़कों को खुला रखने के लिए मशीनरी तैयार: नवंबर में लद्दाख के उच्च पर्वतीय क्षेत्रों में 40 फीट तक बर्फ जमा हो जाती है और तापमान शून्य से करीब चालीस डिग्री नीचे चला जाता है। इसे ध्यान में रखते हुए जवानों को आवश्यक सुविधाएं मुहैया कराने का पूरा बंदोबस्त हो चुका है। वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर पानी के लिए ट्यूबवेल से लेकर जवानों की बैरकों में सेंट्रल ही¨टग सिस्टम तक की व्यवस्था कर ली गई है। सेना की उत्तरी कमान से जुड़े उच्च पदस्थ सूत्रों का कहना है कि सर्दी में युद्ध के लिए बंदोबस्त पूरे हैं। आधुनिक हथियार, बेहतर कपड़ों, विशेष राशन के साथ पूर्वी लद्दाख में अच्छी चिकित्सा सुविधा का पूरा बुनियादी ढांचा तैयार है। एक अधिकारी ने कहा कि पूर्वी लद्दाख में हमारे काफी एयरबेस हैं। वायुसेना के विमानों से साजोसामान पहुंचाने के लिए नवंबर के बाद भी बर्फ हटाकर एयरबेस सुचारू रखे जाएंगे।

बर्फीले युद्ध मैदान में नहीं टिक सकते चीनी सैनिक: चीन के मुखपत्र ग्लोबल टाइम्स के दुष्प्रचार पर उत्तरी कमान के एक अधिकारी ने कहा कि बर्फीले युद्ध मैदानों में भारतीय सेना के सामने चीनी सैनिक ज्यादा देर तक नहीं टिक सकते। चीन भी अपनी कमजोरी जानता है, इसलिए वह युद्ध से बचने की कोशिश करेगा। भारतीय जवानों को हर हालात में दुश्मन से लड़ने का अनुभव है। मनोवैज्ञानिक तौर पर भी हमारी सेनाएं अधिक मजबूत हैं।

सेना के लिए वरदान होगी अटल टनल: हिमाचल प्रदेश को लद्दाख से जोड़ने वाली रोहतांग में बनी अटल टनल सेना के लिए वरदान होगी। यह टनल बनकर तैयार है और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अगले माह इसे देश को समर्पित कर सकते हैं। इससे दुश्मन की नजर में आए बिना सेना का साजोसामान जल्द लद्दाख पहुंचाना संभव होगा। सड़कों और पुलों का बुनियादी ढांचा पहले से ही मजबूत बनाया गया है। रणनीतिक रूप से अहम लेह-दारचा मार्ग का कार्य भी लगभग पूरा हो चुका है।

बोफोर्स तोपें तैनात: नई बोफोर्स (होवित्जर) तोपों के साथ पुरानी तोपें भी चीन के होश उड़ाने को तैयार हैं। नई होवित्जर-777 तोपें हल्की हैं और पर्वतीय क्षेत्रों में बहुत कारगर हैं। कारगिल युद्ध में पाकिस्तान को गहरे जख्म दे चुकीं होवित्जर-155 (बोफोर्स) तोपें भी चीन की ओर आग उगलने को तैयार हैं। लेफ्टिनेंट कर्नल प्रीति कंवर का कहना है कि सेना का तकनीकी स्टोर ग्रुप फाय¨रग पिन से लेकर टैंक का इंजन असैंबल करने तक की जिम्मेवारी संभालता है। मोबाइल स्पेयर वैन के जरिए अग्रिम इलाकों में वाहनों, तोपों, टैंकों की मरम्मत की जाती है।

जवानों को दी गई विशेष ड्रेस: शून्य से पचास डिग्री सेल्सियस नीचे के तापमान में युद्ध लड़ने के लिए पूर्वी लद्दाख में सैनिकों को विशेष ड्रेस दी गई है। इसमें 21 आइटम शामिल हैं। तीन लेयर वाली इस ड्रेस में अंदर पहनने वाले गर्म कपड़े, उनके ऊपर हरी जैकेट, ट्राउजर व उनके ऊपर सफेद जैकेट व ट्राउजर शामिल हैं। बाहरी सफेद रंग सैनिक को बर्फ में छिपने में मदद करता है। विशेष दस्ताने और जूते जवानों को विषम हालात में लड़ने की ताकत देते हैं।

टेंट बचाएंगे बर्फीले तूफान से : बर्फीले रेगिस्तान में जवानों के लिए विशेष टेंट हर मौसम में गर्म रहेंगे। लेफ्टिनेंट मोनराक साद ने बताया कि बड़े टेंट में एक दर्जन व छोटे टेंट में एक जवान का शरीर शून्य से 50 डिग्री सेल्सियस कम के तापमान में भी गर्म रह सकता है।

 

Posted By: Arun Kumar Singh

इंडियन टी20 लीग

डाउनलोड करें जागरण एप और न्यूज़ जगत की सभी खबरों के साथ पायें जॉब अलर्ट, जोक्स, शायरी, रेडियो और अन्य सर्विस