राज्य ब्यूरो, जम्मू। लोकसभा और विधानसभा चुनावों के लिए मजहबी व सियासी ध्रुवीकरण के एजेंडे को आगे बढ़ाने में जुटी महबूबा का एकाएक पाक प्रेम उमड़ आया है। अब पूर्व मुख्यमंत्री को वहां अल्पसंख्यकों के प्रति हालात बेहतर दिखने लगे हैं। साथ ही, उन्होंने जोड़ा कि हमारे देश में अल्पसंख्यकों के प्रति नजरिया अब बदलने लगा है। उन्होंने अपनी यह प्रतिक्रिया हाल ही में लोकसभा और राज्यसभा में पारित नागरिकता संशोधन विधेयक पर जारी विवाद पर व्यक्त की है।

पड़ोसी मुल्कों के अल्पसंख्यकों को भारतीय नागरिकता प्रदान करने संबंधी बिल को उन्होंने हिंदू-मुस्लिम की सियासत से जोड़ते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की आलोचना की और दूसरी तरफ पाकिस्तान को भी सराहा।

सत्ताच्युत होने के बाद अपने सियासी कुनबे को संभालने का प्रयास कर रही महबूबा ने ट्वीट के माध्यम से पाकिस्तान के गुण गाए। अपने ट्वीट में पाकिस्तान का जिक्र करते हुए कहा कि एक मुल्क जो द्विराष्ट्रीय सिद्धांत पर बना है, अब अल्पसंख्यकों के प्रति अपने रवैये और नीतियों में बदलाव ला रहा है। वह मंदिरों को राष्ट्रीय धरोहर करार दे रहा है।

उन्होंने लिखा है कि भारत अब अपने पड़ोसी मुल्क की कुछ नीतियों को अपनाता जा रहा है। महबूबा यहीं नहीं रुकी। उन्होंने लिखा कि मजहब के आधार पर किसी को नागरिकता प्रदान करना भयावह और घृणित है। पाकिस्तान का ख्याल आते ही हम नफरत से भर जाते हैं, लेकिन अब उसकी कुछ नीतियों को हम पूरी तरह अपनाने लगे हैं। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान में, जहां अल्पसंख्यकों को कई संवैधानिक अधिकारों से उपेक्षित रखा गया था, अब अल्पसंख्यकों को उनके अधिकार दिए जा रहे हैं। उनके धर्मस्थलों के संरक्षण को यकीनी बनाने के लिए मंदिरों को राष्ट्रीय धरोहर घोषित किया जा रहा है। लेकिन हमारे देश में अल्पसंख्यकों को लेकर नजरिया बदल रहा है। अल्पसख्ंयकों के प्रति पाकिस्तान का पूर्व का उपेक्षित रवैया हम भी अब अपना रहे हैं।

हाल ही में महबूबा अलगाववादी रुख के कारण चर्चा में

महबूबा हाल ही में अपने बयान से कट्टरवादियों व अलगाववादियों के करीब खड़ी नजर आती हैं। वह कभी आतंकियों के घर जाती हैं और उनके परिवारों के प्रति सहानुभूति जता रही हैं और कभी धर्म के आधार पर एजेंडे को आगे बढ़ाने का प्रयास कर रही है। अब पाकिस्तान का गुणगान भी अलगाववादियों को खुश करने का प्रयास हो सकता है।

Posted By: Sachin Mishra