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जम्मू, जागरण संवाददाता। वर्तमान समय में खेती का तरीका काफी बदल गया है। जागरूक किसान को मालूम है कि अगर पैसे कमाने हैं तो कृषि उत्पाद सीजन शुरू होते ही मार्केट में उतारना होगा। इसलिए चाहे वह कम क्षेत्र में सब्जियों की खेती करे, मगर पॉली हाउस, ग्रीन हाउस का इस्तेमाल कर अच्छी पैदावार लेता है। वैज्ञानिक ढंग से नियंत्रित तापमान में खेती खेती की जाती है, जिससे मौसम के विपरीत सब्जियों की पैदावार मिलती है। इसका बाजार में अच्छा दाम मिल जाता है।

खास बात यह है कि पॉली-ग्रीन हाउस में तैयार होने वाली सब्जियां धूल मिट्टी से बची रहती हैं और एकदम साफ सुथरी होती हैं। वहीं, फसल ग्रीन हाउस में जाल से ढंकी हुई रहती है, इसलिए अपेक्षाकृत कीड़ों की मार भी कम होती है। यही कारण है कि ग्रीन हाउस में तैयार होने वाली सब्जियों की अच्छी मांग रहती है। यही नहीं, पैदावार भी दोगुनी मिलती है। निक्की तवी क्षेत्र के पनोतरे चक में रहने वाले किसान कुलदीप राज ने सात कनाल भूमि में ग्रीन हाउस तैयार किया है। हालांकि, मोटा खर्च उसे करना पड़ा, मगर सरकार की ओर से 50 फीसद की सब्सिडी ग्रीन हाउस बनाने पर मिली। आज कुलदीप राज ग्रीन हाउस में खीरे की खेती करते हैं और अपेक्षाकृत दोगुनी से भी ज्यादा की पैदावार पाते हैं। उनका कहना है कि आज खेती के मायने बदल गए हैं। हर किसान का अपना ग्रीन हाउस होना चाहिए, जिसमें वह थोड़ी सी जगह में भी खूब पैदावार प्राप्त कर सकता है। 

उन्होंने अपने ग्रीन हाउस में सीडलेस खीरा लगाया और अच्छी मांग बनी। कृषि विशेषज्ञ सागर शर्मा का कहना है कि अगर किसान अपना ग्रीन हाउस लगाना चाहता है तो कृषि, बागवानी विभाग के जरिए सहायता हासिल कर सकता है। इसके लिए किसानों को पाइप से ढांचा खड़ा करना पड़ेगा और जाल से इसे कवर करना होगा। ग्रीन हाउस के अंदर तापमान बढ़ाने घटाने का बंदोबस्त रहता है। वहीं, पौधे तक पानी पहुंचाने के लिए डिप इरीगेशन सिस्टम रहता है।

ग्लैडियोलस फूल की खेती से बढ़ाएं आमदनी

आज के दौर में फूलों की खेती भी आमदनी बढ़ाने का अच्छा विकल्प है। यह कैश क्रॉप है और किसानों को तुरंत पैसा दिलाती है। किसान ग्लैडियोलस के फूलों की खेती से अच्छी आमदनी कमा सकते हैं। सीजन आ गया है और किसान ग्लैडियोलस की खेती कर सकते हैं। जम्मू कश्मीर फ्लावर ग्रोअर्स एसोसिएशन के प्रधान तेजेंद्र सिंह का कहना है कि फूलों की अच्छी मांग रहती है। ग्लैडियोलस के फूल शादी विवाह के समारोह में इस्तेमाल किए जाते हैं। फूल की एक एक स्पाइक किसान को आठ से दस रुपये दिला जाती है।

ग्लैडियोलस की खेती साफ सुथरा काम है और इसे कोई भी किसान कम मेहनत करके कर सकता है। अगर किसान दो-ढाई कनाल की भूमि पर भी ग्लैडियोलस की खेती करे, तो 40 से 45 हजार रुपये की कमाई की जा सकती है। दूसरे साल आपकी आमदनी दोगुनी हो सकती है, क्योंकि तब तक अपनी खेती से ही बल्ब तैयार हो जाएंगे और आपको बाजार से बल्ब लेने की जरूरत नहीं रहेगी। बाजार में एक अच्छा बल्ब तीन से चार रुपये में मिलता है। एक कनाल भूमि में किसान 15 से 20 हजार रुपये के बल्ब तैयार कर सकता है। इसलिए ग्लैडियोलस की खेती शुरू करते समय बल्ब का खर्चा किसानों को जरूर चुभता है, मगर बाद में किसानों को बल्ब खरीदने की जरूरत नहीं रहती।

नई खेती के लिए एक कनाल भूमि के लिए पांच हजार बल्ब की जरूरत रहेगी। तीन माह बाद फूल बेचने के लिए तैयार हो जाएंगे। किसान अगर बड़े पैमाने पर खेती करता है तो उसे थोड़े दिनों के अंतराल के बाद खेती करनी चाहिए, ताकि जब फूल खिले तो एक साथ सारे न खिल जाएं।

खास बातों का रखें ख्याल

  • पौधों को पानी देने का क्रम बंद करें, क्योंकि आए दिन बारिश हो रही है।
  • इन दिनों दवाओं का छिड़काव न किया जाए, क्योंकि बारिश के कारण यह छिड़काव असर नहीं करेगा।
  • पोल्ट्री फार्म में बर्ड के पानी में विटामिन सी मिलाएं। पोल्ट्री फार्म में हवा आने का बंदोबस्त करें।
  • माल मवेशियों को साफ पानी पिलाएं। जाए। गंदला पानी पीने से मवेशी बीमार पड़ सकता है।
  • अगर किसान बटन मशरूम की खेती करना चाहते हैं, तो अभी से योजना बनाएं। सबसे पहले बीज की बुकिंग कराएं।
  • दुधारू जानवरों को दोहने से पहले और बाद में थन को अच्छी तरह से धोएं, क्योंकि लंबे समय तक थन के छिद्र खुले रह जाते हैं और ऐसे में बैक्टीरिया अंदर प्रवेश कर जाने का डर रहता है। 

Posted By: Rahul Sharma

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