जम्मू, रोहित जंडियाल: जम्मू कश्मीर में कोरोना संक्रमण की तस्वीर लगातार बदल ही है। एक महीने में संक्रमण दर 10 से कम होकर मात्र ढाई फीसद के आसपास रह गई है। जम्मू और श्रीनगर के सभी प्रमुख अस्पतालों में बेड लगातार खाली हो रहे हैं। हालांकि, गंभीर रूप से बीमार मरीज अभी भी अस्पतालों में पहुंच रहे हैं। फिर भी मरीजों की कम हो रही संख्या के कारण डाक्टरों, पैरामेडिकल स्टाफ राहत महसूस कर रहे हैं। आलम है कि कई कर्मचारियों को कोविड ड्यूटी से वापस बुलाया जा रहा है।

नेशनल हेल्थ मिशन के आंकड़ों के अनुसार जम्मू-कश्मीर की कुल संक्रमण दर 3.33 फीसद है। एक महीना पहले छह मई को 24 घंटों में जम्मू-कश्मीर की संक्रमण दर 10 के आसपास थी। आज एक महीने बाद मंगलवार को संक्रमण दर 2.43 ही रह गई। साढ़े सात फीसद कमी आई है। इसका कारण लाकडाउन को माना जा रहा है। टीकाकरण में बढ़ोतरी हो रही है। स्वास्थ्य अधिकारियों का कहना है कि लगातार टेङ्क्षस्टग के कारण संक्रमण दर में कमी आई है। इसका आम लोगों से लेकर स्वास्थ्य कर्मियों तक की ङ्क्षजदगी पर सकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है। लोगों में संक्रमण को लडऩे के लिए विश्वास जागा है।

खाली होने लगे अस्पताल, 27 फीसद बिस्तर ही भरे : मरीजों की कम होती संख्या के कारण अस्पताल में बेड खाली होने लगे हैं। अस्पतालों में 50 फीसद से भी अधिक बिस्तर खाली पड़े हैं। जीएमसी जम्मू में ही 547 में से 188 बिस्तरों पर ही मरीज भर्ती है। 65 फीसद बिस्तर अस्पताल के अब कोविड मरीजों के लिए खाली हैं। आइसीयू के 96 में से 35 बिस्तर खाली हैं।

जम्मू के अस्पताल में हालात : भगवती नगर में डीआरडीओ अस्पताल के 500 बिस्तरों में आठ मरीज ही भर्ती हैं। सीडी अस्पताल जम्मू में 110 में से 31, गांधीनगर के जच्चा-बच्चा अस्पताल में 172 में से 11, पुराने गांधीनगर अस्पताल में 76 में से 11 बिस्तरों पर ही मरीज हैं। राजीव गांधी अस्पताल गंग्याल मरीजों से खाली हो गया है। एस्काम में सात और नारायणा अस्पताल में 38 मरीज भर्ती हैं।

कश्मीर के हालात : श्रीनगर में जम्मू की अपेक्षा मरीज अधिक हैं, लेकिन वहां पर भी बिस्तर खाली हैं। श्रीनगर के एसएमएचएस अस्पताल में 300 बिस्तरों में से 215, सीडी अस्पताल श्रीनगर में 94 में से 73, शेर-ए-कश्मीर इंस्टीटयूट आफ मेडिकल सांइसेस सौरा में 370 में से 195, स्किम्स बेमिना में 156 में से 75 पर मरीज भर्ती है। जम्मू-कश्मीर में कोविड के लिए बनाए कुल 5792 बिस्तरों में से 1541 पर ही मरीज भर्ती हैं। कुल 27 फीसद बिस्तरों पर ही मरीज भर्ती हैं।

स्टाफ को भी वापस बुलाना शुरू किया : कोविड के कम हो रहे मरीजों की संख्या को देखते हुए अब स्वास्थ्य कर्मियों पर भी बोझ कम हुआ है। कई कर्मचारियों को अब कोविड ड्यूटी से मुक्त किया जा रहा है। गांधीनगर के जच्चा-बच्चा अस्पताल में नियुक्त सुपर स्पेशलिटी अस्पताल के आपरेशन थियेटर के स्टाफ को वापस रूटीन डयूटी के लिए बुला लिया गया है। वहीं डीआरडीओ के अस्पताल में अटैच स्टाफ को भी वापस भेजा जा रहा है। यही नहीं जल्दी ही राजीव गांधी अस्पताल, कोट भलवाल उप जिला अस्पतालों में भी रूटीन की सेवाएं शुरू हो सकती हैं। स्वास्थ्य कर्मियों का कहना है कि अभी एहतियात के तौर पर बहुत से कोविड डयूटी में तैनात कर्मचाररी होटलों में हैं लेकिन अब पहले जैसा दबाव नहीं है। अब समय मिल रहा है। हालांकि गंभीर रूप से बीमार मरीजों का आना जारी है।

क्या कहते हैं डाक्टर: 

  • अभी स्वास्थ्य कर्मियों और कोविड से ठीक हो रहे मरीजों पर मानसिक तनाव रहेगा। जो हालात उन्होंने देखे हैं, वे सामान्य नहीं थे। जिस तरह से स्थिति में सुधार हो रहा है। उसे देखते हुए यह कहा जा सकता है कि आने वाले दिनों में और बेहतर स्थिति होगी। - डा. जगदीश थापा, मनोरोग विशेषज्ञ
  • अभी लापरवाही बरतने की कोई गुंजाइश नहीं है। अभी पहले की तरह ही एसओपी का पालन करने की जरूरत है। यही नहीं मामले कम होने के साथ ही अब टीकाकरण पर जोर देने की जरूरत है।- डा. निसार कश्मीर में विशेषज्ञ  

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