जम्मू, राज्य ब्यूरो। जम्मू कश्मीर में आने वाले दिनों में प्लास्टिक के विकल्प के रूप में बांस को बढ़ावा दिया जाएगा। मोदी सरकार ने अपनी देश व्यापी प्लास्टिक के इस्तेमाल को न कहने के बाद इसका विकल्प तैयार करने की दिशा में काम शुरु किया है। प्लास्टिक को न कह कर और बांस को बढ़ावा देकर पर्यावरण के संरक्षण में अहम योगदान दिया जा सकता है। यह कहना भी गलत नहीं होगा कि बांस क्रांति लाकर प्लास्टिक का इस्तेमाल समाप्त करके उसकी जगह बांस ले सकता है।

देश के उत्तर पूर्वी राज्यों में बांस को बढ़ावा दिया जा रहा है। जम्मू संभाग के कंडी इलाकोें सांबा, कठुआ और जम्मू के आसपास के इलाकों में भी बांस होता है। बांस से इससे फ्लोरिंग, फर्नीचर, हैंडीक्रॉफ्ट, ज्वैलरी, बोतलें, अगरबत्ती, चाकू, चमच, आदि बनाई जाती है। पीएमओ में राज्यमंत्री डा. जितेंद्र सिंह जिनके पास उत्तरी पूर्वी राज्य का भी प्रभार है, के प्रयासों से असम के गुहावाटी में देश की पहली बैम्बू इंडस्ट्रियल पार्क स्थापित हो चुकी है।

जम्मू कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटने के बाद जब केंद्रीय कानून सीधे तौर पर लागू हो जाएंगे तो बांस की खेती को बढ़ावा देने का रास्ता भी साफ हो जाएगा। बांस को पहले कभी बढ़ावा नहीं मिला लेकिन अब इसे उत्तर पूर्वी राज्यों में प्रोत्साहित किया जा रहा है। इस क्षेत्र में युवाओं के लिए रोजगार के अवसर भी पैदा होंगे। बांस की खेती और उसके बिजनेस की केंद्र की योजना को जम्मू कश्मीर में लागू करने के प्रयास शुरु होंगे।

असम में जब बैम्बू इंडस्ट्रियल पार्क स्थापित की गई थी तो उस समय करीब एक सौ वर्ष पुराने वन एक्ट 1919 में संशोधन किया गया था ताकि घरों में बांस की खेती को इसमें छूट दी जाए। बांस के क्षेत्र में नए स्टार्टअप भी शुरु किए जा सकेंगे। देश के उत्तरी पूर्वी राज्यों के मंत्रालय की टीम जल्द ही जम्मू कश्मीर का दौरा करेगी और बांस क्रांति लाने की दिशा में संभावनाओं को तलाशेगी। बांस की खेती हर मौसम में हो सकती है। बांस इंडस्ट्री में सेल्फ हेल्प ग्रुपों को भी शामिल किया जा सकेगा।

Posted By: Rahul Sharma

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