जम्मू, राज्य ब्यूरो। जम्मू-कश्मीर में जैसे ही सर्दी बढ़ती है, बैसे ही संक्रमण से होने वाले स्वाइन फ्लू का जम्मू-कश्मीर में हर साल खतरा रहता है। यहां के कई क्षेत्र विशेषकर कश्मीर में स्वाइन फ्लू के मरीज अधिक होते हैं। दो साल में इस बीमारी से चालीस लोगों की मौत हो चुकी है। यही कारण है कि इस बार इस बीमारी से निपटने के लिए स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग सक्रिय है। इसके लिए विशेषतौर पर आइसोलेशन वार्ड भी बनाए गए हैं।

स्वाइन फ्लू के मरीज अस्पतालों में साल 2013 से आ रहे हैं। इस साल 76 मरीजों में स्वाइन फ्लू की पुष्टि हुई थी। दो की इस बीमारी से मौत हो गई थी। लेकिन इसके अगले साल जम्मू-कश्मीर में स्वाइन फ्लू का कोई भी मरीज नहीं आया। साल 2015 में अब तक के सबसे अधिक मामले आए। 495 मरीजों में स्वाइन फ्लू की पुष्टि हुई। 20 लोगों की इससे मौत हो गई। लेकिन इसके अगले साल 2016 में सिर्फ दो ही मरीजों में स्वाइन फ्लू की पुष्टि हुई। इसके बाद स्वाइन फ्लू के मरीज लगातार आ रहे हैं।

साल 2017 में 140 लोग स्वइन फ्लू से पीड़ित हुए। इनमें से 26 की मौत हो गई। यह एक साल में सबसे अधिक मौतें थी। पिछले साल 77 लोग स्वाइन फ्लू से पीड़ित हुए। इनमें से 14 की माैत हो गई। इन वषों में कश्मीर संभाग में ही अधिंकाश मरीजों की मौत हुई। इसका कारण वहां का सर्द मौसम भी है। यही नहीं कई बार यह देखा गया है कि कश्मीर के लोग जो बाहरी राज्यों में रहते हैं, वहां से पीड़ित होकर भी आते हैं और फिर यहां पर इस रोग को फैलाते हैं। इस बार अस्पतालों में स्वाइन फ्लू से निपटने के लिए अस्पतालों में प्रबंध हो रहे हैं। इस बीमारी का इलाज करने वाले डाक्टरों व पैरामेडिकल स्टाफ को पहले से ही वैक्सीन दी गई है। यही नहीं मरीजों के लिए अलग से आइसाेलेशन वार्ड बनाए गए हैं। वित्तिय आयुक्त स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग अटल ढुल्लू ने अस्पतालों में सभी दवाइयां उपलब्ध करवाने के निर्देश दिए। वहीं अस्पतालों में दवाइयां व मास्क भी उपलब्ध करवाए गए हैं।

क्या है स्वाइन फ्लू : स्वाइन फ्लू एक तेजी से फैलने वाली संक्रामक बीमारी है। यह एच-1 एन-1 वायरस से होती है। इस बीमारी में मरीज को सर्दी जुकाम जैसे लक्षण होते हैं। इसमें नाक से पानी बहता है। गले में खराश होती है। बुखार, सिरदर्द, शरीर दर्द, थकान, ठंड लगती है। कभी-कभी दस्त उल्टी आती है।

ऐसे करें बचाव : स्वाइन फ्लू से बचने के लिए यह जरूरी है कि खांसी, जुकाम, बुखार के मरीजों से दूर रहें। यही नहीं आंख, नाक, मुंह को छूने के बाद किसी अन्य चीज को न छुएं। खांसते, छींकते समय मुंह व नाक पर कपड़ा रखें।

Posted By: Rahul Sharma

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