जम्मू, दिनेश महाजन: तनाव जीवन पर घातक साबित हो रहा है। नया साल शुरू होते ही जम्मू में आत्महत्या की घटनाएं में बढ़ोतरी देखी जा रही है। इस वर्ष के पहले 12 दिनों में 15 लोगों ने कथित तौर आत्महत्या कर अपनी जीवन लीला को समाप्त कर लिया, जबकि 20 लोगों ने आत्महत्या का प्रयास किया।

आत्महत्या की घटनाओं में पारिवारिक विवाद, प्रेम प्रसंग सहित अन्य कारण सामने आए है। इन कारणों से बने तनाव में ही जिंदगियां लगातार दम तोड़ रही हैं। आत्महत्या करने वाले 20 वर्ष से 40 आयु वर्ष के लोग शामिल है। बढ़ता तनाव से आत्महत्या के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। मौजूद समय में घरेलू कहला, प्रतिस्पद्धर्धा, जीविन शैली में बदलाव, रहन-सहन, बढ़ती बेरोजगारी और आर्थिक स्थिति से परेशान होकर लोग आत्महत्या कर रहे है।

घरेलू कलह और नशा आत्महत्या का अहम कारण: जम्मू सांबा कठुआ रेंज के डीआईजी विवेक गुप्ता का कहना है कि आत्महत्या के मुख्य कारण घरेलू कलह और युवाओं में बढ़ता नशे का सेवन है। इन मामलों में परिवार की अहम भूमिका बनती है। परिवार को चाहिए कि वे बीच बचाव कर उचित कदम उठाए। महिलाओं पर होने वाले घरेलू हिंसा को रोकने के लिए सख्त कानून बने है। महिलाएं जरूरत पड़ने पर कानून का सहारा ले सकती है। यदि कोई नशे का आदि हो जाता है तो उसका उपचार करवाना चाहिए।

वर्ष 2021 में जम्मू में सामने आए कथित आत्महत्या के मामले

  • तीन जनवरी : जानीपुर में 30 वर्षीय युवती ने फंदा लगाया।
  • पांच जनवरी : जीएमसी में 22 वर्षीय थानामंडी के युवक की जहरीला पदार्थ निगलने से मौत।
  • पांच जनवरी : सतवारी में 40 वर्षीय व्यक्ति ने लगाया फंदा।
  • सात जनवरी : छन्नी हिम्मत में व्यापारी ने लगाया फंदा।
  • आठ जनवरी : बिश्नाह में 40 वर्षीय व्यक्ति की जहरीला पदार्थ खाने से मौत।
  • ग्यारह जनवरी : बजातला में 33 वर्षीय युवक ने घर पर लगाया फंदा।
  • ग्यारह जनवरी : गाड़ीगढ़ में पुलिस कांस्टेबल और उसकी पत्नी का फंदे से झूलता मिला था शव।
  • बारह जनवरी : डिग्याना में 20 वर्षीय युवती ने लगाया फंदा।
  • बारह जनवरी : ठठर में प्रवासी श्रमिक युवक की नशे के सेवन से मौत। 

आम लोगों में मनोरोगों के प्रति जागरूकता कम है। यदि किसी को यह कहा जाए कि वह दिमागी रूप से बीमार हैं तो वह आमतौर पर बुरा मान जाता है। यही कारण है कि लोग मनोरोग विशेषज्ञ डाक्टर के पास उपचार करवाने के लिए नहीं पहुंचते। ऐसा करना बिलकुल गलत है। धीरे धीरे बीमारी हावी हो जाती है, जो जानलेवा साबित हो जाती है। बीमार होने पर दूसरों की मदद लेनी चाहिए। अधिकतर लोग मदद नहीं लेना चाहते,क्योंकि उन्हें लगता है कि वे कमजोर हो गए हैं। मन की बात दूसरों के समक्ष साझा करने से दिमाग को राहत मिलती है। निराशा से बचने के लिए लोगों के साथ संवाद स्थापित करना चाहिए। -  डॉ. जगदीश थापा, मनोरोग विशेषज्ञ

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