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'ऐसा ही चलता रहा तो हिंदू समुदाय का जम्मू में रहना हो जाएगा मुश्किल', रोहिंग्या-बांग्लादेशियों को वापस भेजने की उठी मांग

Published: Wed, 12 Aug 2026 01:56 AM (IST)Updated: Wed, 12 Aug 2026 03:22 AM (IST)

श्री अमर क्षत्रिय राजपूत सभा ने जम्मू में जनसांख्यिकीय बदलाव, अवैध बस्तियों और धर्मांतरण पर गंभीर चिंता जताई है। सभा ...और पढ़ें

श्री अमर क्षत्रिय राजपूत सभा । फोटो जागरण

श्री अमर क्षत्रिय राजपूत सभा । फोटो जागरण

HighLights

  1. राजपूत सभा ने जम्मू में जनसांख्यिकीय बदलाव पर चिंता जताई।

  2. अवैध रोहिंग्या, बांग्लादेशियों को वापस भेजने की मांग की।

  3. धर्मांतरण रोकने और सरकारी भूमि से अतिक्रमण हटाने पर जोर।

राज्य ब्यूरो, जम्मू। श्री अमर क्षत्रिय राजपूत सभा ने जनसांख्यिकीय बदलाव की जायजा लेने पहुंची समिति से स्पष्ट किया कि अगर यहां पर अवैध रूप से बसाई जा रही बस्तियों और धर्म परिवर्तन को रोका नहीं गया तो आने वाले समय में हिंदू समुदाय के लिए जम्मू में रहना मुश्किल हो जाएगा।

सभा के चेयरमैन नारायण सिंह और अध्यक्ष भीषण सिंह की अध्यक्षता में समिति से मिले प्रतिनिधिमंडल ने जम्मू संभाग के विभिन्न क्षेत्रों में कथित जनसांख्यिकीय बदलाव से जुड़े मुद्दों से समिति को अवगत करवाया।सभा ने अपने ज्ञापन में जम्मू क्षेत्र में अवैध आव्रजन और आबादी में बदलाव को लेकर चिंता जताई है।

उन्होंने कहा कि जम्मू जिले में करीब 6,500 म्यांमार के नागरिकों के होने का दावा किया गया है, जबकि सांबा जिले में करीब 550 और कठुआ जिले के हीरानगर होल्डिंग सेंटर में करीब 200 लोगों का उल्लेख किया गया है।

साथ ही, एक अपुष्ट रिपोर्ट के हवाले से जम्मू में रोहिंग्या और बांग्लादेशी नागरिकों की संख्या करीब 13,700 बताई गई है।जम्मू और सांबा जिलों में रोहिंग्या आबादी अधिक है, जबकि कुछ परिवार डोडा, किश्तवाड़, रामबन, राजौरी और पुंछ जिलों तक पहुंचे हैं। सभा ने कुछ क्षेत्रों में सरकारी भूमि पर कथित अतिक्रमण और अवैध बस्तियों को लेकर भी चिंता व्यक्त की है।

राजपूत सभा ने हिंदू समुदाय का ईसाई धर्म में कथित धर्मांतरण का मुद्दा भी उठाया। ज्ञापन में आर्थिक रूप से कमजोर हिंदू समुदाय के लोगों को आर्थिक लाभ देकर धर्मांतरण कराए जाने का आरोप लगाया गया है। सभा ने चर्चों और संबंधित संस्थाओं के सत्यापन तथा उनके वित्तीय खातों की जांच की मांग की है।

सभा ने जनसांख्यिकीय बदलाव की प्रभावी निगरानी के लिए कई सुझाव दिए हैं। इनमें अवैध आव्रजन पर रोक लगाने और जम्मू क्षेत्र में रह रहे अवैध प्रवासियों को उनके संबंधित देशों में वापस भेजने की मांग शामिल है। इसके अलावा, सुरक्षा प्रतिष्ठानों और सेना के शिविरों के आसपास की कथित अवैध बस्तियों तथा सरकारी भूमि पर अतिक्रमण हटाने की मांग भी की गई है।सभा के चेयरमैन नाराण सिंह ने कहा कि अभी इस मामले पर और देरी नहीं की जानी चाहिए।