महिला अधिकारी के साथ बदसलूकी मामले में IAS राजीव रंजन पर गिरेगी गाज! उमर सरकार ने दिए जांच के आदेश
जम्मू-कश्मीर सरकार ने जेकेएएस अधिकारी बीनिश वानी से दुर्व्यवहार के मामले में आइएएस अधिकारी कुमार राजीव रंजन के खिलाफ जांच के आदेश दिए हैं।
-1792169266963_m.webp)
जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला। फाइल फोटो
HighLights
आइएएस अधिकारी कुमार राजीव रंजन पर दुर्व्यवहार का आरोप।
मंदीप कौर को जांच अधिकारी नियुक्त किया गया।
15 दिनों में जांच रिपोर्ट सौंपने का निर्देश।
राज्य ब्यूरो, जम्मू। जम्मू-कश्मीर सरकार ने जेकेएएस अधिकारी बीनिश वानी के साथ आइएएस अधिकारी कुमार राजीव रंजन पर कथित दुर्व्यवहार करने के एक मामले में औपचारिक जांच के आदेश दिए हैं। 2004 बैच की आइएएस अधिकारी मंदीप कौर को जांच अधिकारी बनाया गया है। उन्हें 15 दिनों के भीतर रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए गए है।
दो दिन पूर्व हुए इस विवाद ने शुक्रवार को तूल पकड़ लिया।मुख्यमंत्री सहित कई राजनीतिक दलों ने भी इसकी निंदा की और मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की। मामले को बढ़ते देख सामान्य प्रशासन विभाग (जीएडी) की ओर से जांच आदेश जारी किया गया।
मंदीप कौर मामले का जांच अधिकारी नियुक्त
सरकारी आदेश संख्या 1654-जेके(जीएडी) आफ 2026 के अनुसार, आवास एवं शहरी विकास विभाग की आयुक्त सचिव मंदीप कौर को मामले का जांच अधिकारी नियुक्त किया गया है।जांच श्रम एवं रोजगार विभाग के प्रशासनिक सचिव कुमार राजीव रंजन और गांदरबल में रोजगार विभाग की सहायक निदेशक बीनिश वानी से जुड़े कथित दुर्व्यवहार के आरोपों के संबंध में की जाएगी।
आदेश में कहा गया है कि सरकार के संज्ञान में यह मामला प्रिंट और इलेक्ट्रानिक मीडिया में प्रकाशित खबरों के बाद आया। सरकार ने जांच प्रक्रिया में पक्ष प्रस्तुत करने वाले अधिकारी (प्रेजेंटिंग आफिसर) के रूप में सामान्य प्रशासन विभाग में अतिरिक्त सचिव अमित वर्मानी (जेकेएएस) को भी नियुक्त किया है।
जारी आदेश के अनुसार, जांच अधिकारी को निर्धारित 15 दिनों के भीतर अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपनी होगी। मामले में लगाए गए आरोपों की जांच के बाद आगे की कार्रवाई की जा सकती है।
अभद्र भाषा, धमकी या ऐसा व्यवहार करने का अधिकार नहीं
गौरतलब है कि जम्मू-कश्मीर प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों ने बीनिश वानी के साथ कथित दुर्व्यवहार और सार्वजनिक अपमान की निंदा करते हुए मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की थी।
जेकेएएस अधिकारियों ने एक बयान जारी कर कहा था कि वे प्रशासनिक जवाबदेही और कार्य प्रदर्शन की निगरानी का पूरी तरह समर्थन करता है, लेकिन किसी भी वरिष्ठ अधिकारी को अभद्र भाषा, धमकी या ऐसा व्यवहार करने का अधिकार नहीं है, जो किसी सेवारत अधिकारी की गरिमा को ठेस पहुंचाए।
निष्पक्ष जांच की मांग
बयान में दावा किया गया था कि यह कोई अलग-थलग घटना नहीं है और संबंधित आइएएस अधिकारी पर आधिकारिक कार्य के दौरान कथित तौर पर अशोभनीय एवं अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल करने का पैटर्न होने के आरोप हैं।
जेकेएएस अधिकारियों ने उपराज्यपाल मनोज सिन्हा, मुख्य सचिव अटल डुल्लू और सामान्य प्रशासन विभाग से मांग की थी कि मूल घटना और उसके बाद जारी विभागीय स्पष्टीकरण, दोनों की निष्पक्ष जांच कराई जाए।
जेकेएएस आफिसर्स एसोसिएशन ने एक दिन की काम छोड़ो हड़ताल पर जाने का आह्वान किया था। उन्होंने यह भी मांग की कि संबंधित अधिकारी के खिलाफ किसी प्रकार की प्रतिशोधात्मक कार्रवाई न हो तथा कार्यस्थल पर डराने-धमकाने और पद के दुरुपयोग को रोकने के लिए प्रभावी सुरक्षा उपाय सुनिश्चित किए जाएं।
