जम्मू में मशरूम की खेती कैसे करें? कम जगह में शुरू करें कारोबार, निवेश से पहले जान लें ये बातें
जम्मू में मशरूम की खेती किसानों, बेरोजगार युवाओं और छोटे उद्यमियों के लिए आय का एक अच्छा विकल्प बन सकती ...और पढ़ें

जम्मू में मशरूम की खेती सीखने के लिए 4 नवंबर से ट्रेनिंग।
HighLights
जम्मू में मशरूम खेती किसानों, युवाओं के लिए आय का स्रोत।
स्कास्ट-जम्मू में 4-6 नवंबर को प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित।
मशरूम स्पान उत्पादन तकनीक पर दिया जाएगा व्यावहारिक ज्ञान।
जागरण संवाददाता, जम्मू। जम्मू में मशरूम की खेती किसानों, बेरोजगार युवाओं और छोटे उद्यमियों के लिए आय का एक अच्छा विकल्प बन सकती है। पारंपरिक खेती की तुलना में इसमें कम जमीन की आवश्यकता होती है और इसे शेड, खाली कमरे या नियंत्रित वातावरण वाली छोटी इकाई में भी शुरू किया जा सकता है। हालांकि, इसकी सफलता स्थानीय बाजार, तापमान नियंत्रण, उत्पादन लागत और बिक्री की व्यवस्था पर निर्भर करती है।
शेर-ए-कश्मीर कृषि विश्वविद्यालय के प्रो. सचिन गुप्ता ने बताया कि जम्मू में कई तरह की मशरूम की पैदावार संभव है। पहले तो बटन मशरूम ही ज्यादा चलती थी लेकिन अब वर्ष भर तरह-तरह की मशरूम की पैदावार संभव है। जम्मू-कश्मीर में भी तरह-तरह की मशरूम लग रही है।
जम्मू में होटल और रेस्तरां तक मांग
जम्मू के बाजार में बटन मशरूम की मांग होटल, रेस्तरां, सब्जी विक्रेताओं और घरेलू उपभोक्ताओं के बीच हो सकती है। इसकी खेती के लिए कंपोस्ट तैयार करने और फलन के समय ठंडे तापमान की जरूरत होती है। जम्मू की गर्मियों में शीतलन व्यवस्था
के बिना उत्पादन कठिन हो सकता है। डॉ. सचिन ने कहा कि यह लाभकारी काम है। कम जमीन में व्यवसाय, घर या छोटे शेड से शुरुआत हो सकती है।
मशरूम की खेती में भूसे जैसे कृषि अवशेषों का इस्तेमाल किया जा सकता है। इससे खेती की लागत कम करने में मदद मिलती है। मशरूम को पैक करके, सुखाकर या इससे दूसरे उत्पाद तैयार करके भी बेचा जा सकता है। यह काम किसानों, महिलाओं के स्वयं सहायता समूहों और युवाओं के लिए स्वरोजगार का अच्छा अवसर बन सकता है।
निवेश से पहले जान लें ये बातें
अगर आप पहली बार यह व्यवसाय शुरू कर रहे हैं, तो पहले आयस्टर मशरूम या विभाग द्वारा सुझाई गई उपयुक्त किस्म के छोटे बैच से शुरुआत करें। यदि आपके पास पर्याप्त निवेश और तापमान नियंत्रित करने की व्यवस्था है, तो बटन मशरूम की व्यावसायिक इकाई पर विचार किया जा सकता है।
जम्मू में तीन दिवसीय ट्रेनिंग 4 नवंबर से
शेर-ए-कश्मीर कृषि विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय स्कास्ट-जम्मू के मशरूम अनुसंधान एवं नवाचार केंद्र की ओर से मशरूम उत्पादन को बढ़ावा देने और युवाओं, किसानों तथा उद्यमियों को स्वरोजगार के अवसरों से जोड़ने के उद्देश्य से तीन दिवसीय व्यावहारिक प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है। यह प्रशिक्षण कार्यक्रम 4 से 6 नवंबर, 2026 तक मशरूम अनुसंधान एवं नवाचार केंद्र, स्कास्ट-जम्मू, चट्ठा में आयोजित होगा।
मशरूम स्पान उत्पादन तकनीक पर होगा विशेष फोकस
प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को बटन, आयस्टर (ढिंगरी) और विशेष मशरूम की स्पान उत्पादन तकनीक का व्यावहारिक ज्ञान दिया जाएगा। विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों द्वारा दिए जाने वाले प्रशिक्षण में शुद्ध कल्चर का पृथक्करण एवं रखरखाव, कल्चर की पहचान और विशेषताएं, मदर स्पान की तैयारी, सब्सट्रेट का चयन, नसबंदी एवं एसेप्टिक तकनीक तथा विभिन्न सब्सट्रेट पर स्पान उत्पादन की प्रक्रिया समझाई जाएगी।
इसके अलावा स्पान की गुणवत्ता की जांच, भंडारण, उत्पादन के दौरान आने वाली समस्याओं के समाधान और संदूषण प्रबंधन पर भी प्रशिक्षण दिया जाएगा। कार्यक्रम का उद्देश्य प्रतिभागियों को मशरूम उत्पादन की तकनीकी जानकारी देकर इस क्षेत्र में स्वरोजगार और उद्यमिता के लिए सक्षम बनाना है।
किसानों और युवाओं के लिए उपयोगी पहल
इस प्रशिक्षण में किसान, विद्यार्थी, ग्रामीण युवा, उद्यमी, स्वयं सहायता समूहों के सदस्य, किसान उत्पादक संगठन, मशरूम उत्पादक और इच्छुक उद्यमी भाग ले सकते हैं।
प्रशिक्षण शुल्क 2,500 रुपये प्रति प्रतिभागी निर्धारित किया गया है। कार्यक्रम में केवल 10 सीटें उपलब्ध हैं, इसलिए इच्छुक उम्मीदवारों को पूर्व पंजीकरण करवाना अनिवार्य होगा।
