जम्मू, जेएनएफ। हाईकोर्ट ने जम्मू-कश्मीर बैंक के पूर्व चेयरमैन परवेज अहमद के खिलाफ दर्ज एफआइआर को खारिज करने की मांग ठुकरा दी है। बैंक में तीन हजार अवैध नियुक्तियां करने के आरोप में एंटी करप्शन ब्यूरो ने परवेज अहमद के खिलाफ एफआइआर दर्ज की थी।

परवेज अहमद के वकील ने दलील दी कि इस मामले में दो एफआइआर दर्ज है और एक एफआइआर पूर्व चेयरमैन शेख मुश्ताक अहमद के कार्यकाल में दर्ज हुई लेकिन उनके बाद याची बैंक के चेयरमैन बने, लिहाजा यह एफआइआर उनके नाम पर हो गई। लिहाजा इस एफआइआर का कोई वजूद नहीं।

मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने पाया कि बैंक में अवैध नियुक्तियों का सिलसिला 2011 से 2019 तक चला और प्रारंभिक जांच में साफ होता है कि पूर्व चेयरमैन शेख मुश्ताक अहमद के कार्यकाल में 1003 अवैध नियुक्तियां हुई जबकि याची परवेज अहमद के कार्यकाल में 1256 अवैध नियुक्तियां हुई। इस मामले में साफ है कि यह नियुक्तियां किसी एक आदेश के तहत एक साथ नहीं हुई। आठ साल के अंतराल में समय-समय पर ये नियुक्तियां होती रही और नियमों को ताक पर रखकर नियुक्तियों के आदेश जारी किए जाते रहे। इसलिए याची की ओर से जारी नियुक्ति का हर आदेश अपने आप में अलग अपराध है। ऐसे में दोनों एफआइआर को गलत नहीं ठहराया जा सकता।

Edited By: Vikas Abrol