श्रीनगर, राज्य ब्यूरो । धूप में चमक रही बर्फ से ढकी गुलमर्ग की वादियों में कश्मीरी संगीत की गूंजती धुनों पर कश्मीरी युवा थिरके तो बरबस ही मुहं से निकल गया कश्मीर का मौसम ही नहीं मिजाज बदल गया है। कश्मीर और कश्मीरी अब धीरे-धीरे जिहादी तत्वों की काली छाया से बाहर निकल अब खुली फिजा में सांस लेने लगे हैं। किसी के चेहरे पर कोई खौफ नहीं था अगर था तो एक सुनहरे मुस्तकबिल का यकीन। सिर्फ स्थानीय लोग ही नहीं देश-विदेश से घूमने आए पर्यटक भी खुद को हैरान महसूस कर रहे थे क्योंकि उन्होंने तो सिर्फ यही सुना था कि कश्मीर में गीत-संगीत पर तालिबानी फरमान आ जाता है, फौज को आम कश्मीरी अपने आस-पास नहीं देखना चाहता। यहां तो सब कुछ उल्ट था। गीत-संगीत भी था, फौज भी थी और सब गुलमर्ग महोत्सव के जश्न में डूबे एक-दूसरे का उत्साह बढ़ा रहे थे।

बर्फ से ढकी चोटियां में शून्य से नीचे के तापमान में तीन दिन तक चलने वाले महोत्सव का आयोजन सेना ने जम्मू कश्मीर पर्यटन विभाग और जम्मू कश्मीर पुलिस के साथ मिलकर कश्मीर और कश्मीरियों के लिए किया है। सिर्फ आम कश्मीरी नौजवान ही नहीं, कश्मीर के पर्यटन जगत से जुड़े लोग भी इस महोत्सव से उत्साहित हैं। गुलमर्ग घूमने आए पर्यटकों के लिए पूरा कश्मीर जैसे गुलमर्ग में ही सिमट आया हो क्योंकि कश्मीरी गीत-संगीत, खान-पान, दस्तकारी और शीतकालीन खेल सब कुछ उन्हें एक ही जगह मिल रहा है। वे कश्मीर के अछूते पहलुओं से अवगत हो रहे हैं। बालीवुड अभिनेता अरबाज खान भी इस महोत्सव में शामिल होने गुलमर्ग पहुंच चुके हैं। विद्या बालन भी आ रही हैं।

कश्मीर की संगीत पंरपरा भी समृद्ध है

सेना की डैग्गर डीविजन के जीओसी मेजर जनरल वत्स ने कहा कि गुलमर्ग महोत्सव का आयाेजन स्थानीय युवाओं की खेल प्रतिभा को एक मंच देने के इरादे से किया है। कश्मीरी नौजवान भी गीत-संगीत में रूचि रखता है। कश्मीर की संगीत पंरपरा भी समृद्ध है, यह दिखाने के लिए किया है। स्थानीय लोगों ने हमसे कई बार इसके आयाेजन के लिए कहा। उन्होंने जो जो सुझाव दिए, वह सभी इस महोत्सव को कामयाब बनान के लिए अपनाए गए हैं। उन्होंने बताया कि तीन दिन तक चलने वाले इस गुलमर्ग महोत्सव में स्कीईग ,स्नाे माेबाइल, एटीवी दौड़ के अलावा स्नो साइक्लिंग भी देखने को मिलेगी। अल्तमश फरीदी, आबिद अले, शफी सोपोरी, जुबैर खान, वसीम अहमद जैसे स्थानीय नवोदित गायक व कलाकार कश्मीर की समृद्ध सूफी संगीत परंपरा से लोगों को रुबरु कराएंगे। वादी का मशहूर उमर रॉक बैंड भी इसमें हिस्सा ले रहा है।

कश्मीरी अब आतंकियों के फरमान नहीं सुनते बल्कि अपने दिल की सुनते हैं 

उन्होंने कहा कि आज पहला दिन है, आप खुद यहां लाेगाें से बात करें।आपको पता चलेगा कि यह कश्मीरियों का असली मिजाज है। कश्मीरी अब आतंकियों के फरमान नहीं सुनते, बल्कि अपने दिल की सुनते हैं। गुलमर्ग महोत्सव में भाग लेे रही सोफिया ने कहा कि मैं कश्मीरी लोकनृत्य और संगीत जानती हूं। मैं और मेरी सहेलियां यहां लोकनृत्य पेश करने के लिए ही श्रीनगर से आयी हैं। हम चाहती हैं कि दुनिया का पता चले कि हम कश्मीरी भी नाचना-गाना जानते हैं। मुझे उस समय बड़ी हैरानी हुई,जब एक महिलाटूरिस्ट ने मुझसे पूछा कि कश्मीर में लड़कियाें के गीत-संगीत पर पाबंदी नहीं है। मैने उसे समझाया एेसा कुछ नहीं है, गीत-संगीत को लेकर कश्मीरी बहुत दिलचस्पी लेते हैं। शफी सोपोेरी ने कहा कि यह महोत्सव तो कश्मीरी नौजवानों को अपनी काबलियत दिखाने का मौका देता है। करीब दो साल बाद गुलमर्ग महोत्सव हो रहाहै। सेना अगर सहयोग न करती तो यहइससाल भी नहीं होता।

गुलमर्ग महोत्सव से स्थानीय पर्यटन जगत काे बड़ी उम्मीद

पर्यटन निदेशक कश्मीर डाॅ जीएन इट्टु ने कहा कि गुलमर्ग महोत्सव से स्थानीय पर्यटन जगत काे बड़ी उम्मीद है। फरवरी सामान्य तौर पर पर्यटन की दृष्टि से ऑफसीजन होता है लेकिन इस महोत्सव के कारण सिर्फ गुलमर्ग में ही नहीं पूरे कश्मीर में फरवरी में पर्यटकों की अच्छी खासी संख्या रहने की उम्मीद है। यह ऐसे समय में हो रहा है जब कश्मीर में हालात लगातार सुधर रहे हैं। सुरक्षा और विश्वास का वातावरण लगातार मजबूत हो रहा है। इस महोत्सव में आपको कश्मीरी दस्तकारी का सामानके स्टाल भी मिलेंगे कश्मीर व्यंजन भी मिलेंगे, गीत-संगीत तो है ही।

फौज न होती तो यह फेस्टिवल न होता

स्नो बोर्ड रेस में भाग लेने वाले फिरोज ने कहा कि बीते दो साल से मैं आज के दिन का इंतजार कर रहा था। फौज न होती तो यह फेस्टिवल न होता और न यह भीड़ होती। मुकाबला ही हमें बेहतर बनाता है। इस तरह के आयोजन होने चाहिए ताकि हमें भी अपने में सुधार का मौका मिले और हम भी बाहर क मुल्कों में स्नो बोर्ड रेस में हिस्सा लेने जाएं। यहां स्कीइंग भी हो रही है लेकिन मैं स्कीईंग नहीं करता।

अरबाज खान बोले- कश्मीर को समझने के लिए यहां जरूर आएं

बालीवुड अभिनेता अरबाज खान ने कहा कि गुलमर्ग बहुत खूबसूरत है। मैं पहले भी यहां आ चुका हूं। मुझे सबसे ज्यादा अच्छा तो यहां के नौजवानों द्वारा पेश किया गया संगीत कार्यक्रम लगा। यहां का युवा तो बालीवुड के गाने भी कमाल के गाता है। मुझे लगता है कि कश्मीर को अगर समझना है तो इस तरह के आयोजन का गवाह बनन के लिए जरुर आना चाहिए।

बहुत रोमांचकारी अनुभव रहा

दिल्ली निवासी सुरेश शर्मा ने कहा कि गुलमर्ग वाकई बहुत खूबसूरत है। हम शुक्रवार की सुबह यहां आए थे। गंडोला की सैर की । आज हम इस महोत्सव का मजा ले रहे हैं। स्कीईंग और एटीवी की रेस देखी जो बहुत रोमांचकारी अनुभव रहा। मेरी पत्नी ने तो यहीं एक स्टाल से कश्मीरी शॉल खरीदा है। हमने यहीं पर शापिंग कर ली। श्रीनगर से अपने बच्चों को लेकर आए सलीम वानी ने कहा कि हमारे लिए यही मनोरंजन का साधन है। इसलिए पूरे परिवार के साथ आया हूं। हम कश्मीर पूरे कश्मीर में ऐसा ही माहौल चाहते हैं। यह कश्मीर में एक रोशन मुस्तकबिल की सुबह का जश्न है।

Edited By: Vikas Abrol