जम्मू, राज्य ब्यूरो। जम्मू कश्मीर में करीब 14 महीने तक राज्यपाल रहे सत्यपाल मलिक बड़े बदलावों के सूत्रधार रहे। राज्य के इतिहास में अपना नाम दर्ज करवाने वाले मलिक के कार्यकाल में ही जम्मू कश्मीर से अनुच्छेद 370 व 35ए को खत्म किया गया। इसके साथ ही जम्मू कश्मीर को दो केंद्र शासित प्रदेश बनाने का फैसला हुआ।

राज्य में पहली बार ब्लॉक डेवलपमेंट काउंसिल के चुनाव भी उनके ही कार्यकाल में हुए। लद्दाख से भेदभाव समाप्त कर इसे जम्मू कश्मीर से अलग संभाग और केंद्र शासित प्रदेश बनाने का फैसला हुआ। जम्मू कश्मीर के पुनर्गठन के फैसले के बाद राज्यपाल के मार्गदर्शन में ही कश्मीर में सक्रिय देशविरोधी तत्वों, अलगाववादियों और उनको शह देने वाले राजनीतिक दलों के नेताओं से सख्ती से निपटने की शुरुआत हुई। सत्यपाल मलिक जम्मू कश्मीर राज्य के अंतिम राज्यपाल थे। उनके बाद अब जम्मू कश्मीर व लद्दाख की कमान लेफ्टिनेंट गवर्नरों के हाथ में आ गई है।

अपने कार्यकाल में विधान परिषद को भी खत्म कर दिया

पिछले तीस वर्षों में जम्मू कश्मीर में राजनीतिक पृष्ठभूमि वाले सत्यपाल मलिक ने गत वर्ष 23 अगस्त को राज्यपाल पद की जिम्मेदारी संभाली थी। जून 2018 में भाजपा-पीडीपी की सरकार गिरने के बाद जम्मू कश्मीर में राज्यपाल शासन था। मलिक उस समय सुर्खियों में आए थे, जब उन्होंने 21 नवंबर 2018 में नेशनल कांफ्रेंस व पीडीपी के साथ मिलकर सरकार बनाने का दावा पेश करने के चंद मिनटों के बाद विधानसभा को भंग कर दिया था। राज्यपाल का कहना था कि उन्हें कोई फैक्स नहीं मिला है। विधानसभा भंग करने के बाद जम्मू कश्मीर में सरकार के गठन की संभावना खत्म हो गई थी। उन्होंने अपने कार्यकाल में विधान परिषद को भी खत्म कर दिया।

भ्रष्टाचार, अव्यवस्था व बैंक में घोटालों के खिलाफ मुहिम छेड़ी

जम्मू कश्मीर में 19 दिसंबर 2018 से राष्ट्रपति शासन लागू होने के बाद सत्यपाल मलिक ने राज्य में भ्रष्टाचार, अव्यवस्था व जम्मू कश्मीर बैंक में घोटालों के खिलाफ मुहिम छेड़ दी। उन्होंने पिछले दरवाजे से नियुक्तियों का भंडाफोड़ कर बैंक में चयन सूची में आने के बाद भी नजरंदाज किए गए 582 युवाओं को नियुक्त करवाया। भ्रष्टाचार के खिलाफ मुहिम तेज करने के लिए एंटी करप्शन ब्यूरो बनाया। जम्मू कश्मीर बैंक के चेयरमैन को हटाने के साथ बैंक में फर्जीवाड़े को उजागर करने के लिए घोटाले करने वालों के खिलाफ कार्रवाई शुरू कर दी।

सरकारी कर्मियों के इंश्योरेंस के नाम पर हुए घोटाले का किया पर्दाफाश

राज्यपाल ने सरकारी कर्मचारियों के इंश्योरेंस के नाम पर हुए अरबों रुपये के घोटाले का पर्दाफाश किया। देश की एक नामी कंपनी के साथ जम्मू कश्मीर सरकार के अनुबंध को रद कर दिया। उन अधिकारियों को चिन्हित किया गया, जिन्होंने नियमों को ताक पर रखकर इंश्योरेंस करवाते समय कर्मचारियों के हितों को नजरअंदाज किया था। इसके साथ ही सरकारी विभागों में अनुशासन लाने के साथ कश्मीर के उन अधिकारियों को भी चिन्हित किया, जो अलगाववादियों से संबंध रखते थे।

मोदी सरकार ने पहली बार किसी राजनीतिक व्यक्ति को बनाया राज्यपाल

मोदी सरकार ने अपने पिछले कार्यकाल में पहली बार किसी राजनीतिक व्यक्ति को राज्यपाल बनाकर राज्य की जनता से सीधा रिश्ता बनाने की दिशा में ठोस कार्रवाई की थी। मलिक ने जम्मू कश्मीर में साबित किया कि वह वैचारिक तौर पर समाजवादी नेता हैं। उन्होंने लोगों को नजरअंदाज कर अपने घर भरने वाले कश्मीरी नेताओं व वरिष्ठ अधिकारियों को लगातार निशाना बनाया। 

Posted By: Rahul Sharma

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