जम्मू, राज्य ब्यूरो : जम्मू कश्मीर प्रशासन ने सरकारी कर्मचारियों को अपनी शिकायतें व मसले अपने विभाग के समक्ष उठाने के बजाए सीधे राष्ट्रपति सचिवालय, प्रधानमंत्री कार्यालय और उपराज्यपाल सचिवालय में भेजने पर बाज आने की चेतावनी दी है। प्रशासन ने स्पष्ट किया कि शिकायतों के निपटारे के लिए बनाई गई व्यवस्था को नजरअंदाज कर अगर सीधे दिल्ली में शिकायत की तो कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई होगी।

प्रदेश में ऐसे कई मामले सामने आए हैं, जब कर्मचारियों ने अपने विभाग में शिकायत के बजाए सीधे राष्ट्रपति सचिवालय तक कर दी है। वहां से शिकायतें जम्मू कश्मीर प्रशासन को भेजने के बाद इनके बारे में कोई जानकारी नहीं रखने वाले विभागों की फजीहत हुई है।

विभागों में बनाई गई शिकायत निवारण प्रणाली को कर्मचारियों द्वारा गंभीरता से न लेने को उपराज्यपाल प्रशासन ने इसे जम्मू कश्मीर सेवा नियम 1956 का सरासर उल्लंघन बताया है। सेवा नियमों के तहत प्रशासन ने कर्मचारियों के मसलों को हल करने के लिए प्रदेश, संभागीय व विभागीय स्तर की कमेटियां बनाई हैं, लेकिन सीधे शिकायतें ऊपर करने से विभागों के लिए दिक्कत पैदा हो रही है।

जम्मू कश्मीर प्रशासन के आयुक्त सचिव मनोज कुमार द्विवेदी ने सोमवार को आदेश जारी कर स्पष्ट किया है कि कर्मचारी अपने मसलों को विभागों द्वारा बनाई गई व्यवस्था के तहत उठाएं। अगर कोई कर्मचारी, अधिकारी इसके लिए तय नियमों का नजरअंदाज कर शिकायत करता है तो उसके खिलाफ कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई होगी। उन्हें हिदायत दी है कि वे अपनी उचित शिकायतों को तय नियमों के तहत बनाई गई व्यवस्था से उठाएं।

अधिकतर शिकायतें पदोन्नति में नजरअंदाज करने की :

सूत्रों के अनुसार, सरकारी कर्मचारियों द्वारा की जाने वाले अधिकतर शिकायतें उन्हें पदोन्नति में नजरअंदाज करने संबंधी होती हैं। कई शिकायतें कर्मचारियों के संगठनों की ओर से भी की गई हैं। कई विभाग अपनी पदोन्नति समिति की बैठकें नहीं करते हैं। इनसे पदोन्नति को लेकर मसले पैदा होते हैं। ऐसे में नजरअंदाज होने वाले कुछ कर्मचारी अपनी आनलाइन शिकायतें दिल्ली तक पहुंचा देते हैं। इन शिकायतों के साथ वेतन विसंगतियों व तकनीकी पदों पर गैर तकनीकी अधिकारियों को तैनात करने संबंधी मसले भी उठाए जाते हैं।

 

Edited By: Rahul Sharma