श्रीनगर, राज्य ब्यूरो : कश्मीर के बाहर सुरक्षित जगह पर स्थानांतरण की मांग को लेकर आंदोलनरत विस्थापित कश्मीरी हिंदू कर्मियों के प्रति प्रशासन ने सख्त रवैया अपनाना शुरू कर दिया है। प्रशासन ने ड्यूटी पर न लौटने वाले विस्थापित कर्मियों के वेतन पर रोक लगाना शुरू कर दिया है।

श्रम विभाग कश्मीर और अतिरिक्त उपायुक्त अनंतनाग ने सभी विस्थापित कश्मीरी हिंदू कर्मचारियों के वेतन पर रोक लगाने का आदेश जारी किया है जो सरकार के आश्वासनों के बावजूद काम पर लौटने के बजाय हड़ताल पर हैं। श्रम उपायुक्त कश्मीर अहमद हुसैन बट ने वादी में सभी जिलों में श्रम सहायुक्तों को कहा है कि वे हड़ताल पर गए विस्थापित कश्मीरी हिंदू कर्मचारियों को सितंबर का वेतन जारी न करें।

उन्होंने श्रम विभाग में सभी कर्मचारियों के अवकाश की स्थिति के बारे में ब्योरा तलब करते हुए कहा कि सितंबर के दौरान अनुपस्थित रहने वाले प्रधानमंत्री पैकेज विस्थापित कश्मीरी हिंदू कर्मचारियों को वेतन जारी नहीं किया जाए। जिला उपायुक्त ने भी इसी तरह का एक आदेश जारी किया है।

बीते 133 दिन से हड़ताल कर रहे विस्थापित कश्मीरी हिंदू कर्मचारियों ने इस आदेश को प्रताड़ना बताते हुए कहा कि यह सिर्फ उनके आंदोलन को तोड़ने के लिए किया गया है। आल माइग्रेंट इंप्लायज एसोसिएशन कश्मीर एएमइएके के बैनर तले आंदोलनरत विस्थापित कश्मीरी हिंदू कर्मचारियों ने सरकारी आदेश को मानने से इन्कार कर दिया। वादी में भी कई जगह विस्थापित कश्मीरी कर्मियों ने काम पर लौटने से मना किया है। 

सभी भूमि मालिकों जल्द मिलेगी डिजिटल भूमि पास बुक : मेहता

प्रदेश में सभी भूमि मालिकों को सितंबर माह के अंत तक डिजिटल भूमि पासबुक मिले जाएंगी। यह दावा मुख्य सचिव डा. अरुण कुमार मेहता ने वीरवार को रायल स्प्रिंग गोल्फ कोर्स में साइकलोथोन का उद्घाटन करने के बाद पत्रकारों से बातचीत के दौरान किया। मुख्य सचिव ने कहा कि प्रदेश में भूमि अभिलेखों की आनलाइन प्रक्रिया तेजी से चल रही है। सभी लोगों को उनकी जमीन, मकान, दुकान के रिकार्ड से संबंधित पूरी जानकारी के आधार पर पासबुक प्रदान की जा रही हैं। यह पासबुक ङ्क्षहदी, अंग्रेजी और कश्मीरी व डोगरी भाषा में भी जारी की जाएंगी। उन्होंने कहा कि जम्मू कश्मीर में पहली बार लोगों को स्थानीय भाषा में जमीन की पासबुक प्रदान की जा रही हैं। इससे वह अपनी जमीन जायदाद से संबंधित मुद्दों केा आसानी से समझ सकेंगे। इससे भूमि विवादों को हल करने में भी आसानी होगी और आए दिन किसी की जमीन पर अतिक्रमण की शिकायतें भी घटेंगी। राजस्व विभाग के कामकाज में भी पारदर्शिता आएगी।

Edited By: Rahul Sharma