जम्मू, रोहित जंडियाल। राज्य में डॉक्टरों को सरकारी नौकरी रास नहीं आ रही है। दो दिन में 87 मेडिकल ऑफिसर्स ने अपने पदों से त्यागपत्र दे दिया है। उनके त्यागपत्र स्वीकार भी कर लिए गए हैं।

राज्य प्रशासन ने स्वास्थ्य विभाग में डॉक्टरों की कमी पूरा करने के लिए रिकॉर्ड समय में 921 मेडिकल ऑफिसर्स की नियुक्ति की थी, मगर चयनित मेडिकल ऑफिसर्स को सरकारी नौकरी पसंद नहीं आ रही है। राज्य लोक सेवा आयोग ने 14 जनवरी 2019 को एसआरओ 202 के तहत 921 मेडिकल ऑफिसर्स की नियुक्ति की थी। इसके तहत पांच साल के लिए इन मेडिकल ऑफिसर्स को निर्धारित वेतन मिलना था। कई मेडिकल ऑफिसर्स ने तो चयन के बावजूद नौकरी ज्वाइन नहीं की, जबकि कइयों ने ज्वाइन करने के बाद त्यागपत्र दे दिया।

कुल 87 मेडिकल ऑफिसर्स ने दो दिनों में त्यागपत्र दिया। इनमें नसीर-उल-इस्लाम, नम्रता धर, शिवानी भारती, आभाषा परोत्र, तान्या वर्मा, अतिक-उल-इस्लाम, पारुल शर्मा, शिवानी भट, स्मृति नथयाल, शौकत अली, सुकिल रैना, आदित्य गुप्ता, यासमीन, साहिल पंडिता, कर्ण गंडोत्र, प्रकृति शर्मा, रेहाना बशीर, प्रियंका कटोच, नीलीशा, सुमेरा, मंजूर, इफ्रा, नितीश शर्मा, प्रियंका कुंडल, वान्या त्रिपाठी, प्रियंका ठाकुर, रघु नैना शर्मा, अनामिका भारती, आकृति महाजन, प्रियंका महाजन, सुमैया, विनय भगत, रवि जी पंडित, पल्लवी, सुप्रिया शामिल हैं।

स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग ने इन सभी के त्यागपत्र स्वीकार कर लिए हैं। पहले आदेश में 71 मेडिकल ऑफिसर्स के तो दूसरे आदेश में 16 मेडिकल ऑफिसर्स के त्यागपत्र स्वीकार किए गए हैं। ये सभी मेडिकल ऑफिसर अभी प्रोबेशन पर थे।

त्यागपत्र स्वीकार किए गए : स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग के प्रमुख सचिव अटल ढुल्लु ने सभी 87 मेडिकल ऑफिसर्स के त्यागपत्र स्वीकार करते हुए अपने आदेश में कहा है कि ये सभी प्रोबेशन पर थे। उन्होंने खुद त्यागपत्र दिया है। उनके अनुरोध पर ही सभी के त्यागपत्र स्वीकार किए गए हैं।

एक माह पहले 437 मेडिकल ऑफिसर्स की नियुक्तियां हुई थी रद: राज्य प्रशासन 437 मेडिकल ऑफिसर्स की नियुक्तियां एक महीने पहले रद कर चुका है। यह वे मेडिकल ऑफिसर्स थे, जिन्होंने 26 फरवरी तक अंतिम तिथि में भी ज्वाइन नहीं किया था। विभाग ने ऐसे मेडिकल ऑफिसर्स को भी अंतिम चेतावनी दी थी, जो ज्वाइन करने के बावजूद ड्यूटी पर नहीं आ रहे थे।

पांच सौ से अधिक मेडिकल ऑफिसर छोड़ चुके हैं नौकरी : स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग ने रिकॉर्ड तीन महीने में 921 मेडिकल ऑफिसर्स की नियुक्ति की थी। पहली बार नियुक्ति में इंटरव्यू भी नहीं लिए गए थे। सिर्फ लिखित में हुई परीक्षा के आधार पर ही इनका चयन हुआ था। मगर एसआरओ 202 के तहत हुई नियुक्तियां उन्हें रास नहीं आई। अब तक पांच सौ से अधिक मेडिकल ऑफिसर नौकरी छोड़ चुके हैं। 

Posted By: Rahul Sharma

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