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जीएमसी जम्मू के रेजिडेंट डॉक्टरों ने स्टाइपेंड बढ़ाने की उठाई मांग, सरकार को 12 नवंबर तक का अल्टीमेटम

Published: Wed, 28 Oct 2026 09:57 PM (IST)

जीएमसी जम्मू की रेजिडेंट डॉक्टर्स एसोसिएशन ने पोस्टग्रेजुएट और सीनियर रेजिडेंट डॉक्टरों के स्टाइपेंड में तत्काल वृद्धि की मांग की है।

जीएमसी जम्मू के रेजिडेंट डॉक्टरों ने स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग की, 2026 तक का अल्टीमेटम।

जीएमसी जम्मू के रेजिडेंट डॉक्टरों ने स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग की, 2026 तक का अल्टीमेटम।

HighLights

  1. रेजिडेंट डॉक्टरों ने स्टाइपेंड संशोधन की तत्काल मांग की

  2. मौजूदा स्टाइपेंड छठे वेतन आयोग पर आधारित, बहुत कम है

  3. 12 नवंबर 2026 तक समाधान न होने पर आंदोलन

जागरण संवाददाता, जम्मू। गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज (जीएमसी) जम्मू की रेजिडेंट डॉक्टर्स एसोसिएशन (आरडीए) ने पोस्टग्रेजुएट रेजिडेंट डॉक्टरों और सीनियर रेजिडेंट्स के स्टाइपेंड में तत्काल संशोधन की मांग की है। एसोसिएशन ने जम्मू-कश्मीर सरकार से इस लंबे समय से लंबित मुद्दे पर जल्द निर्णय लेने और अन्य केंद्र शासित प्रदेशों तथा प्रमुख चिकित्सा संस्थानों के समान उचित स्टाइपेंड सुनिश्चित करने की अपील की है। आरडीए ने मांग के समाधान के लिए 12 नवंबर 2026 तक की समयसीमा तय की है।

बुधवार को मीडिया को संबोधित करते हुए एसोसिएशन ने कहा कि मौजूदा स्टाइपेंड संरचना पुरानी हो चुकी है और वर्तमान महंगाई, जीवन-यापन की बढ़ती लागत तथा रेजिडेंट डॉक्टरों की जिम्मेदारियों के अनुरूप नहीं है। एसोसिएशन के अनुसार, रेजिडेंट डॉक्टर स्वास्थ्य सेवाओं की रीढ़ हैं और उनकी मेहनत तथा जिम्मेदारियों को देखते हुए उनके मानदेय में संशोधन जरूरी है।

छठे वेतन आयोग के आधार पर मिल रहा स्टाइपेंड

आरडीए ने कहा कि रेजिडेंट डॉक्टरों के स्टाइपेंड में संशोधन लंबे समय से लंबित है और मौजूदा दरें छठे वेतन आयोग के आधार पर निर्धारित ढांचे से जुड़ी हुई हैं। एसोसिएशन ने दावा किया कि जम्मू-कश्मीर के सरकारी मेडिकल कॉलेजों में कार्यरत रेजिडेंट डॉक्टरों को कई अन्य केंद्र शासित प्रदेशों की तुलना में लगभग 30 से 40 प्रतिशत कम स्टाइपेंड मिल रहा है।

एसोसिएशन ने जीएमसी जम्मू और एआईआईएमएस जम्मू तथा एसकेआईएमएस श्रीनगर जैसे प्रमुख संस्थानों के बीच स्टाइपेंड में अंतर का मुद्दा भी उठाया। आरडीए ने संबंधित अधिकारियों से राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (एनएमसी) के लागू नियमों, विशेषकर विनियमन 5.5 के संदर्भ में, स्थिति की समीक्षा कर समानता और उचित मानदेय सुनिश्चित करने की मांग की।

पीजी रेजिडेंट्स को मिल रहा इतना स्टाइपेंड

आरडीए द्वारा साझा किए गए आंकड़ों के अनुसार, जीएमसी जम्मू में पोस्टग्रेजुएट रेजिडेंट डॉक्टरों को वर्तमान में लगभग निम्नलिखित मासिक स्टाइपेंड मिल रहा है:

प्रथम वर्ष: 64,000 रुपये

द्वितीय वर्ष: 67,000 रुपये

तृतीय वर्ष: 70,600 रुपये

सीनियर रेजिडेंट्स: लगभग 85,000 से 95,000 रुपये, एचआरए और अन्य लागू घटकों के आधार पर।

एसोसिएशन का कहना है कि लंबे कार्य घंटे, आपातकालीन ड्यूटी, मरीजों की लगातार देखभाल और गंभीर चिकित्सकीय जिम्मेदारियों को देखते हुए मौजूदा स्टाइपेंड पर्याप्त नहीं है।

अन्य राज्यों में बढ़े स्टाइपेंड का दिया हवाला

आरडीए ने छत्तीसगढ़, उत्तराखंड और बिहार जैसे राज्यों में हाल के महीनों में स्टाइपेंड संशोधन का हवाला देते हुए कहा कि संबंधित श्रेणियों में वहां मासिक स्टाइपेंड लगभग 90 हजार से एक लाख रुपये तक बताया जा रहा है। एसोसिएशन ने जम्मू-कश्मीर सरकार से अन्य राज्यों और संस्थानों की स्टाइपेंड संरचना का तथ्य-आधारित तुलनात्मक अध्ययन कर उचित संशोधन करने की मांग की।

मुख्यमंत्री और स्वास्थ्य मंत्री से हस्तक्षेप की अपील

एसोसिएशन ने मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्री, स्वास्थ्य मंत्री और जम्मू-कश्मीर के स्वास्थ्य सचिव से व्यक्तिगत हस्तक्षेप कर इस मुद्दे का समयबद्ध समाधान सुनिश्चित करने की अपील की है। आरडीए की प्रमुख मांगों में पीजी रेजिडेंट्स और सीनियर रेजिडेंट्स के स्टाइपेंड में सार्थक वृद्धि, सभी सरकारी मेडिकल कॉलेजों में उचित समानता, प्रमुख चिकित्सा संस्थानों के साथ तुलनात्मक समीक्षा तथा संशोधन लागू करने के लिए स्पष्ट समयसीमा तय करना शामिल है।

12 नवंबर तक समाधान नहीं तो आंदोलन पर विचार

आरडीए ने स्पष्ट किया कि एसोसिएशन टकराव के बजाय बातचीत और लोकतांत्रिक तरीके से समस्या का समाधान चाहती है। एसोसिएशन के अनुसार, कुछ अन्य संस्थानों में डॉक्टरों ने अपनी मांगों को लेकर हड़ताल का सहारा लिया है, लेकिन आरडीए जीएमसी जम्मू फिलहाल संवाद के माध्यम से समाधान निकालने के पक्ष में है।

एसोसिएशन ने सरकार को 12 नवंबर 2026 तक ठोस और संतोषजनक समाधान देने का समय दिया है। आरडीए ने चेतावनी दी कि यदि निर्धारित समयसीमा तक कोई ठोस निर्णय या समयबद्ध कार्ययोजना सामने नहीं आती, तो डॉक्टर सामूहिक निर्णय के आधार पर हड़ताल सहित अन्य लोकतांत्रिक विरोध के तरीकों पर विचार कर सकते हैं। हालांकि, इस दौरान मरीजों के हितों और आवश्यक स्वास्थ्य सेवाओं को ध्यान में रखने की बात भी कही गई है।

आरडीए ने दोहराया कि स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग किसी विशेष सुविधा के लिए नहीं, बल्कि समानता, सम्मानजनक मानदेय और रेजिडेंट डॉक्टरों के योगदान की उचित पहचान के लिए है। एसोसिएशन ने उम्मीद जताई कि सरकार समय रहते इस मांग पर सकारात्मक निर्णय लेकर संभावित टकराव को टालने की दिशा में कदम उठाएगी।