श्रीनगर, राज्य ब्यूरो: सेना की चिनार कोर के कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल बीएस राजू ने सोमवार को कहा कि कश्मीर में हालात अब लगभग सामान्य हो चले हैं। आतंकी गतिविधियों, पत्थरबाजाी और सिलसिलेवार बंद या राष्ट्रविरोधी प्रदर्शन अब नाममात्र ही रह गए हैं। लोगों में सुरक्षा और विश्वास की भावना को महसूस किया जा सकता है। नियंत्रण रेखा (एलओसी) पर संघर्ष विराम को एक सकारात्मक पहल बताते हुए उन्होंने कहा कि इससे जहां सीमावर्ती लोगों के जीवन में शांति आएगी, वहीं प्रदेश के भीतरी हिस्सों में भी इसका सकारात्मक असर नजर आएगा।

यहां मीडियाकर्मियों के साथ बातचीत में लेफ्टिनेंट जनरल बीएस राजू ने कहा कि बीता साल अपेक्षाकृत शांत रहा है। इस साल भी अब तक स्थिति बीते सालों की तुलना में बेहतर रही है। हिंसा में बहुत कमी आई है और इसे आप सिर्फ कोविड-19 के साथ नहीं जोड़ सकते। हालात में बेहतरी आम लोगों की शांति व सुरक्षा के प्रति चाह का नतीजा भी है। उन्होंने हर जगह कानून व्यवस्था बनाए रखने में सहयोग किया है। लोग यहां शांति और खुशहाली चाहते हैं। अगर यहां कुछ अ'छा हो रहा है तो सिर्फ स्थानीय लोगों के कारण। हमें साल 2021 से कई उम्मीदें हैं।

हाल में ही हुई कुछ आतंकी घटनाओं का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि यहां कई ऐसे तत्व हैं जो कश्मीर में शांति के खिलाफ हैं। उन्हेंं एलओसी पार से हुक्म मिलता है और वह वारदात करते हैं। कृष्णा ढाबे पर बीते दिनों हमला हुआ। यह हमला कश्मीर में आए विदेशी राजनियकों को यहां के हालात खराब बताने के लिए किया गया था।

पाक की मर्जी के बिना नहीं हो सकती घुसपैठ : राजू ने कहा कि आतंकियों की घुसपैठ एक बड़ी चुनौती और समस्या है। हम इससे निपटने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। संघर्ष विराम से हम उम्मीद करते हैं कि सीमांत इलाकों में स्थिति पूरी तरह शांत रहे। इससे घुसपैठ पर काबू पाने में भी मदद मिलेगी। संघर्ष विराम में हम घुसपैठ को पूरी तरह से नियंत्रित करते हुए समाप्त कर सकते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि पाकिस्तान की मर्जी के बिना आतंकी इस तरफ घुसपैठ नहीं कर सकते।

पाकिस्तान नहीं सुधरा तो जवाब देना हमे आता है : समझौते के बावजूद पाकिस्तान द्वारा संघर्ष विराम तोड़े जाने की स्थिति पर उन्होंने कहा कि हमें सबक सिखाना आता है। हालांकि हम पहले गोली चलाने या सीमा पर तनाव बनाए रखने के इ'छुक नहीं हैं, लेकिन जब पाकिस्तान ऐसी कोई हिमाकत करेगा तो पहले तय व्यवस्था के जरिए उसे समझाया जाएगा। अगर वह बाज नहीं आया तो फिर जवाब देना हमे आता है।

स्थानीय युवाओं की आतंकी संगठनों में भर्ती में कमी : जम्मू कश्मीर में आतंकियों के पास स्टिकी बम जिन्हेंं मैग्नेट बम भी कहते हैं, की मौजूदगी पर उन्होंने कहा कि जब कभी भी आतंकियों के पास कोई नया हथियार आता है, हम उसी तरह उससे निपटने के लिए अपनी रणनीति को तय करते हैं। नए आतंकी संगठनों के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि नाम से कोई फर्क नहीं पड़ता, आतंकी सिर्फ आतंकी ही होता है। खैर, एक बात संतोषजनक है कि वादी में अब स्थानीय लड़कों की आतंकी संगठनों में भर्ती लगातार कम हो रही है।

इंटरनेट मीडिया पर दुष्प्रचार जारी : सोशल मीडिया के माध्यम से आतंकियों की भर्ती एक समस्या रही है। हालांकि इंटरनेट मीडिया पर स्थानीय युवाओं को गुमराह करने के लिए, उन्हेंं आतंकी बनाने के लिए दुष्प्रचार अभी भी जारी है। 4-जी मोबाइल इंटरनेट सेवा की बहाली के बाद ऐसे प्रयासों में वृद्धि नहीं हुई, लेकिन हमने लोगों तक पहुंच बनाने के लिए पुलिस और नागरिक प्रशासन के साथ अभियान चलाया है, जिसका असर दिख रहा है। 

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