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कूड़े से रोजगार और पर्यावरण की सुरक्षा, उमर सरकार का बड़ा फैसला; 3-स्तरीय व्यवस्था से चमकेगा जम्मू-कश्मीर

Published: Sat, 17 Oct 2026 06:00 AM (IST)

मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने जम्मू-कश्मीर सर्कुलर इकोनामी पालिसी-2026 को हरित विकास और पारिस्थितिक स्थिरता की दिशा में एक निर्णायक कदम बताया है।

जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला। फाइल फोटो

जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला। फाइल फोटो

HighLights

  1. संसाधनों की पुनर्प्राप्ति, हरित विकास और पारिस्थितिक स्थिरता पर केंद्रित।

  2. तीन स्तरीय व्यवस्था से कचरा प्रबंधन प्रणाली का विकास होगा।

  3. 10 वर्षों में 3,548.7 करोड़ रुपये का वित्तीय प्रावधान।

राज्य ब्यूरो, जम्मू। मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने नव अधिसूचित जम्मू-कश्मीर सर्कुलर इकोनामी पालिसी-2026 को संसाधनों की पुनर्प्राप्ति, हरित विकास और पारिस्थितिक स्थिरता की दिशा में एक निर्णायक कदम बताया है। उन्होंने कहा कि यह नीति केंद्र शासित प्रदेश में कचरा कम करने, संसाधनों का बेहतर उपयोग करने और पर्यावरण के अनुकूल विकास माडल को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

इस नीति का उद्देश्य जम्मू-कश्मीर की भौगोलिक परिस्थितियों और विभिन्न प्रकार की बस्तियों की जरूरतों के अनुरूप कचरा प्रबंधन, संसाधन पुनर्प्राप्ति और अपशिष्ट जल के पुन उपयोग की व्यवस्था विकसित करना है।नीति के तहत सर्कुलर, सर्कुलर प्लस और सर्कुलर प्लस प्लस नाम से तीन स्तरीय व्यवस्था प्रस्तावित की गई है। इसके माध्यम से स्थानीय निकायों की क्षमता और जरूरतों के अनुसार कचरा प्रबंधन प्रणाली विकसित की जाएगी।

कम हो सके संसाधनों की बर्बादी

छोटे और दूरदराज के क्षेत्रों में विकेंद्रीकृत कचरा प्रसंस्करण को बढ़ावा दिया जाएगा, जबकि मध्यवर्ती क्षेत्रों में हब-एंड-स्पोक परिवहन व्यवस्था विकसित करने की योजना है। जम्मू और श्रीनगर जैसे प्रमुख शहरी केंद्रों में उन्नत सर्कुलर इकोनामी प्रणालियां स्थापित करने पर जोर दिया जाएगा।

नीति में नगर निगमों के ठोस कचरे, खाद्य एवं गीले कचरे, पर्यटन से उत्पन्न अपशिष्ट, बागवानी एवं कृषि अवशेष, पैकेजिंग सामग्री, निर्माण एवं विध्वंस मलबे, इलेक्ट्रानिक कचरे और अपशिष्ट जल को शामिल किया गया है। इसके अलावा, मरम्मत, नवीनीकरण और पुनः उपयोग के माध्यम से सामग्री की उपयोगिता बढ़ाने की योजना है।

ऊन और हस्तशिल्प से जुड़े संसाधनों के पुनः उपयोग पर भी ध्यान दिया जाएगा, ताकि पारंपरिक क्षेत्रों में संसाधनों की बर्बादी कम हो सके।

क्षेत्रीय स्तर पर विकसित होंगे संसाधन पुनर्प्राप्ति केंद्र

जम्मू-कश्मीर की भौगोलिक परिस्थितियों और परिवहन संबंधी चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए नीति में क्षेत्र विशेष के लिए संसाधन आधारित क्लस्टर विकसित करने का प्रस्ताव है।

इनमें शहरी क्षेत्रों में सामग्री पुनर्प्राप्ति, सेब एवं बागवानी अवशेषों का उपयोग, पर्यटन सर्किट से निकलने वाले कचरे का प्रबंधन और हस्तशिल्प से जुड़े संसाधनों के पुनः उपयोग के लिए विशेष क्लस्टर शामिल हैं।इन व्यवस्थाओं के जरिए कचरा प्रबंधन को स्थानीय आर्थिक गतिविधियों और रोजगार सृजन से जोड़ने का प्रयास किया जाएगा।

10 वर्षों में 3,548.7 करोड़ रुपये खर्च करने की योजना

सर्कुलर इकोनामी नीति में अगले 10 वर्षों के लिए 3,548.7 करोड़ रुपये का सांकेतिक वित्तीय प्रावधान रखा गया है। इसके लिए केंद्र सरकार की विभिन्न योजनाओं, विस्तारित उत्पादक उत्तरदायित्व व्यवस्था, उपयोगकर्ता शुल्क और सार्वजनिक-निजी भागीदारी जैसे माध्यमों से वित्त जुटाने की परिकल्पना की गई है।

इस वित्तीय ढांचे का उद्देश्य दीर्घकालिक बुनियादी ढांचे का विकास करना और नियमित सरकारी सब्सिडी पर निर्भरता कम करना है।

शहरी क्षेत्रों में 90 प्रतिशत से अधिक सामग्री पुनर्प्राप्ति का लक्ष्य

नीति का प्रमुख उद्देश्य स्रोत स्तर पर कचरे को अलग करने, लैंडफिल में भेजे जाने वाले कचरे की मात्रा घटाने और पुनर्चक्रण व्यवस्था को मजबूत बनाने के जरिए शहरी क्षेत्रों में 90 प्रतिशत से अधिक सामग्री पुनर्प्राप्ति हासिल करना है।

इसके साथ ही स्वयं सहायता समूहों, युवाओं और कचरा प्रबंधन से जुड़े श्रमिकों के लिए रोजगार एवं आजीविका के अवसर पैदा करने पर भी जोर दिया गया है।