कफ सिरप से दिव्यांग हुए उधमपुर के 4 बच्चे, मानवाधिकार आयोग ने दिए जांच के निर्देश; 4 हफ्ते में मांगी रिपोर्ट
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने जम्मू-कश्मीर के रामनगर में कफ सिरप से दिव्यांग हुए चार बच्चों के मामले में जांच के निर्देश दिए हैं।

कफ सिरप से दिव्यांग हुए उधमपुर के 4 बच्चे। सांकेतिक फोटो
HighLights
मानवाधिकार आयोग ने कफ सिरप से दिव्यांग बच्चों की जांच का आदेश दिया।
राम नगर में 2019-20 में बच्चों को स्थायी दिव्यांगता का सामना करना पड़ा।
शिकायतकर्ता ने बच्चों के लिए मुआवजा, चिकित्सा और पुनर्वास की मांग की।
राज्य ब्यूरो, जम्मू। जम्मू संभाग के उधमपुर जिले की रामनगर तहसील में वर्ष 2019-20 में कथित रूप से कफ सिरप के सेवन से स्थायी दिव्यांगता का शिकार हुए चार बच्चों के मामले में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने जम्मू-कश्मीर के संबंधित अधिकारियों को जांच के निर्देश दिए हैं।
आयोग ने शिकायतकर्ता एवं पीड़ितों के साथ समन्वय कर मामले की जांच करने, कानून के अनुसार उचित कार्रवाई करने और शिकायतकर्ता को की गई कार्रवाई से अवगत कराने को कहा है। साथ ही चार सप्ताह के भीतर कार्रवाई रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं।
यह मामला वरिष्ठ सामाजिक कार्यकर्ता सुकेश सी खजूरिया द्वारा उठाया गया है। उन्होंने चारों जीवित पीड़ित बच्चों के लिए उचित मुआवजा, निरंतर चिकित्सा सुविधा और पुनर्वास की मांग की थी।
शिकायत के अनुसार, चारों बच्चे वर्ष 2019-20 में कोल्ड बेस्ट-पीसी कफ सिरप के सेवन के बाद गंभीर रूप से प्रभावित हुए और उन्हें स्थायी दिव्यांगता का सामना करना पड़ा। मुख्य चिकित्सा अधिकारी, उधमपुर द्वारा जारी दिव्यांगता प्रमाण पत्र भी शिकायत के साथ रिकार्ड पर प्रस्तुत किए गए हैं।
मानव सेवन के लिए असुरक्षित
मामला डिजिटल विजन काला अंब, हिमाचल प्रदेश द्वारा निर्मित कोल्ड बेस्ट -पीसी सिरप से संबंधित है। शिकायत में उद्धृत प्रयोगशाला जांच के अनुसार, सिरप के एक नमूने में 34.24 प्रतिशत डाइएथिलीन ग्लाइकाल पाया गया था। यह एक विषैला औद्योगिक रसायन है और मानव सेवन के लिए असुरक्षित माना जाता है।
इस कफ सिरप से जुड़ी घटना में दिसंबर 2019 और जनवरी 2020 के दौरान रामनगर क्षेत्र में कई बच्चों की मौत भी हुई थी। पूर्व में हुई कार्यवाही में आयोग ने जम्मू-कश्मीर ड्रग्स विभाग की ओर से चूक पाए जाने का उल्लेख करते हुए मृत बच्चों के निकट संबंधियों को 3 लाख रुपये मुआवजा देने के निर्देश दिए थे। इस आदेश को चुनौती दिए जाने के बाद जम्मू-कश्मीर एवं लद्दाख हाईकोर्ट ने भी चुनौती को खारिज कर दिया था।
संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय करने की मांग
शिकायतकर्ता सुकेश खजूरिया का कहना है कि जहां मृत बच्चों के मामलों में मुआवजे का प्रावधान किया गया, वहीं इस त्रासदी से बचे बच्चों को भी उनकी आजीवन दिव्यांगता को देखते हुए पर्याप्त आर्थिक सहायता, निरंतर चिकित्सा उपचार और पुनर्वास की आवश्यकता है।
उन्होंने संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय करने के साथ-साथ दवाओं की गुणवत्ता जांच, निगरानी और नियामक प्रवर्तन व्यवस्था को मजबूत करने की मांग भी उठाई है, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकी जा सके।
