विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

'दुकानें कब बनेंगी, किसे पता?', जम्मू में दुकानें टूटीं तो छलका व्यापारियों का दर्द, प्रशासन पर वादाखिलाफी का आरोप

Published: Fri, 11 Sep 2026 02:10 PM (GMT+05:30)

जम्मू में फ्लाईओवर निर्माण के लिए सतवारी चौक और नई बस्ती की 39 दुकानें तोड़ दी गईं, जिससे दुकानदारों की ...और पढ़ें

फ्लाईओवर निर्माण के चलते सतवारी-नई बस्ती में दुकानों पर बुलडोजर चलाया गया।

फ्लाईओवर निर्माण के चलते सतवारी-नई बस्ती में दुकानों पर बुलडोजर चलाया गया।

HighLights

  1. कुंजवानी-गांधी नगर फ्लाईओवर निर्माण हेतु सतवारी-नई बस्ती की दुकानें ध्वस्त।

  2. दुकानदारों का आरोप, पुनर्वास से पहले ही रोजी-रोटी छीनी गई।

  3. प्रशासन पर वादाखिलाफी का आरोप, आजीविका संकट गहराया।

जागरण संवाददाता, जम्मू। कुंजवानी-गांधी नगर फ्लाईओवर निर्माण के चलते सतवारी चौक और नई बस्ती में दुकानों पर बुलडोजर चलना तय था। दो सालों से चल रहे संघर्ष के बाद इन दुकानदारों के पुनर्वास को भी मंजूरी मिल गई और सरकार की ओर से गोल गुजराल के गोल क्षेत्र में वंडरलैंड पार्क के निकट जमीन भी चिन्हित हो गई। दुकानदार भी वहां जाने को लगभग राजी हो गए थे और अब सिर्फ इंतजार था, वहां दुकानें बनने का लेकिन वहां पर रोजी-रोटी का साधन शुरू होने से पहले ही इन 39 दुकानदारों का रोजी-रोटी का साधन उजड़ गया।

दुकानदारों का कहना है कि प्रशासन को पहले उन्हें दूसरी जगह बसाना चाहिए था, उसके बाद इन दुकानों को तोड़ना चाहिए था। हालांकि प्रशासन ने बुधवार को बिजली कनेक्शन काटने के साथ ही दुकानें खाली करने का निर्देश दे दिया था। इसके चलते अधिकतर दुकानदारों ने अपना सामान भी निकाल लिया था और सतवारी चौक में जिन दुकानों को तोड़ा गया, वो अधिकतर खाली की जा चुकी थी।

प्रशासन पर वादा खिलाफी का आरोप

प्रशासनिक कार्रवाई के विरोध में नई बस्ती पहुंचे पूर्व कारपाोरेटर पवन सिंह ने प्रशासन पर वादा खिलाफी का आरोप लगाते हुए कहा कि गत दिवस प्रशासन ने आश्वस्त किया था कि दुकानदारों को सामान निकालने के लिए पर्याप्त समय दिया जाएगा लेकिन रात के अंधेरे में बुलडोजर चलाकर इन दुकानदारों को जीते-जी मार दिया गया। उन्होंने कहा कि यह माना कि नई दुकानें तैयार कर दी जाएंगी।

इन दुकानों के निर्माण का पूरा खर्च भी सरकार वहन करेगी लेकिन जब तक नई दुकानें नहीं बनेगी, ये दुकानदार अपने परिवारों का पालन-पोषण कैसे करेंगे। उन्होंने स्पष्ट किया कि व्यापारी विकास के विरोधी नहीं हैं, लेकिन गोल क्षेत्र में प्रस्तावित दुकानों का आवंटन अभी तक न होने के कारण यह गतिरोध पैदा हुआ है।

रोजी-रोटी का संकट

नई बस्ती बाजार एसोसिएशन के प्रधान नवीन गुप्ता समेत प्रभावित दुकानदारों ने प्रशासनिक कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए कहा कि पिछले छह महीनों से नई दुकानें देने के सिर्फ वादे किए जा रहे हैं, जबकि धरातल पर अब तक किसी को आवंटन पत्र नहीं सौंपा गया।

ऐसे में दुकानें खाली तोड़ने से पहले उनके रोजगार और पुनर्वास की ठोस व्यवस्था सुनिश्चित की जानी चाहिए थी। ऐसे में अब प्रभावित दुकानदारों का एक ही सवाल है कि जब तक गोल क्षेत्र में नई दुकानें नहीं मिलती, तब तक वे अपनी रोजी-रोटी कैसे चलाएंगे।

फ्लाईओवर परियोजना की महत्ता

सतवारी-कुंजवानी कारिडोर पर बन रहा यह एलिवेटेड फ्लाईओवर जम्मू शहर की महत्वाकांक्षी बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में से एक है। दिल्ली-कटड़ा एक्सप्रेसवे कनेक्टिविटी और जम्मू हवाई अड्डे के विस्तार से जुड़े इस मार्ग पर रोजाना ट्रैफिक जाम रहता है।

इस बहुप्रतीक्षित एलिवेटेड कारिडोर के पूरा होने से सतवारी, बिक्रम चौक और कुंजवानी के बीच वाहनों की आवाजाही सिग्नल-फ्री हो जाएगी, जिससे न केवल स्थानीय नागरिकों को जाम से राहत मिलेगी बल्कि मां वैष्णो देवी के दर्शन के लिए जाने वाले श्रद्धालुओं का सफर भी सुगम होगा।

क्या बोले व्यापारी?

नई बस्ती में स्थित डीके रैना साइकिल वर्कस के मालिक दिनेश रैना का कहना है कि हमें पता है कि हमें यहां से हटाया जाना था। पिछले दो सालों से यह तलवार हम पर लटक रही थी। हमारी मांग सिर्फ इतनी थी कि हमारा पुनर्वास किया जाए। सरकार ने गोल गुजराल में दुकानें बनाकर देने का वादा भी किया है लेकिन न अभी तक दुकानें बनी और न ही हमें आवंटित हुई। आज हम सड़क पर आ गए हैं। अब हम अपने परिवार का पालन-पोषण कैसे करेंगे।

नई बस्ती में स्थित बिग सुपर साइकिल स्टोर के मालिक गुरमीत सिंह का कहना है कि प्रशासन कह रहा है कि अगले चार-छह महीनों में हम दुकानें बनाकर दे देंगे लेकिन हमें यह बताओ कि अब हम अगले छह महीने अपने परिवार को क्या खिलाएंगे? हम तो आज ही सड़क पर आ गए।

अब दुकानें कब बनेगी, कब चलेगी, किसे पता? तब तक हमारा परिवार तो सड़क पर आ गया। हमने तो सिर्फ इतना ही कहा था कि दुकानों के बदले दुकानें दे दो, हम चले जाएंगे।

पुनर्वास से पहले उजाड़ना गलत

चैंबर आफ कामर्स एंड इंडस्ट्री जम्मू के पूर्व वरिष्ठ उप-प्रधान दीपक अग्रवाल ने कहा कि प्रशासन की कार्रवाई पूरी तरह से नाजायज है। जब भी किसी विकास योजना से कोई प्रभावित होता है तो सबसे पहले उनका पुनर्वास किया जाता है, उसके बाद विकास योजना को आगे बढ़ाया जाता है लेकिन यहां प्रशासनिक अधिकारियों ने अपनी कुर्सी बचाने के चक्कर में लोगों को उजाड़ दिया।

प्रशासन ने उनकी रोजी-रोटी की चिंता नहीं की। हमारी तो मांग यहीं है कि जब तक गोल क्षेत्र में नई दुकानें नहीं बन जाती, प्रशासन इन दुकानदारों को कहीं पर अस्थायी तौर पर दुकानें उपलब्ध करवाए। इसके लिए डोगरा चौक स्थित जम्मू हाट को भी इस्तेमाल में लाया जा सकता है।

जम्मू हाट में दर्जनों दुकानें है जो बंद पड़ी है। इन लोगों को कुछ समय के लिए वहां बसाया जाना चाहिए ताकि वे अपनी रोजी-रोटी का जुगाड़ कर सके।