रजिया नूर, श्रीनगर : कोरोना वायरस की जांच रिपोर्ट पॉजिटिव आने पर किसी मरीज और उसके परिवार पर क्या बीतती होगी, इसका अंदाजा लगाना भी मुश्किल है, लेकिन इच्छा शक्ति और सकारात्मक सोच हो तो इंसान बड़ी से बड़ी चुनौती को भी मात दे सकता है। ऐसा ही कुछ कर दिखाया कश्मीर की पहली संक्रमित 65 वर्षीय महिला और उसके परिवार ने। इस बहादुर महिला ने दृढ़ इच्छा शक्ति से कोरोना वायस से 14 दिन लड़कर जंग जीत ली है। महिला की दोबारा टेस्ट रिपोर्ट निगेटिव आई है। फिलहाल, महिला को अस्पताल में ही क्वारंटाइन में रखा गया है। डॉक्टरों के अनुसार, 14 दिन बाद उन्हें अस्पताल से छुट्टी कर दी जाएगी।

श्रीनगर के खानयार इलाके की रहने वाली महिला सऊदी अरब से उमराह कर लौटी थी। 18 मार्च को उसकी जांच रिपोर्ट पॉजिटिव आई। उक्त महिला कश्मीर में करोना वायरस से संक्रमित होने वाली पहली मरीज थी। इसके बाद प्रशासन ने वायरस को फैलने से रोकने के लिए समूची वादी में पाबंदियां लगा दी। महिला के पैतृक इलाके को पूरी तरह से सील कर दिया और उसे शेरे-कश्मीर आयुर्विज्ञान केंद्र (सौरा) अस्पताल के आइसोलेशन वार्ड और उसके परिजनों को अस्पताल में क्वारंटाइन में रखा गया। अस्पताल में महिला के स्वास्थ में तेजी से सुधार आया। सोमवार तड़के पीडि़त महिला का टेस्ट निगेटिव आया। उसके परिवार के अन्य सदस्यों के टेस्ट पहले ही निगेटिव आ गए थे। रिपोर्ट निगेटिव आने से न केवल महिला व उसके परिजन बल्कि डॉक्टर भी उत्साहित हैं।

सौरा मेडिकल इंस्टीट्यूट के मेडिकल सुपरिंटेंडेंट डॉ. फारूक जान ने कहा, मरीज अब स्वस्थ है और अच्छा रिस्पांस दे रहा है, लेकिन हमने अभी उसे अगले 14 दिन तक फिर से निगरानी में रखा है, उसके बाद हम उसे छुट्टी करेंगे। डॉ. जान ने बताया कि महिला को कोविड़-19 के संक्रमण के अलावा पहले कोई अन्य बीमारी नहीं थी। महिला जब हमारे पास पहुंची तो हमने तुरंत इसका इलाज शुरू कर हमने उसे विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) द्वारा अनुमोदित दवाएं देनी शुरू कर दीं। मरीज ने भी पूरा सहयोग किया और हमारी हिदायतों पर अमल किया। नतीजतन अब यह स्वस्थ हो गई है। वहीं सौरा के नोडल अधिकारी डॉ. जीएन यत्तु ने भी कहा कि उक्त महिला व अन्य परिजन पूरी तरह स्वस्थ हैं।

परिवार के लिए 14 जनम से कम नहीं थे 14 दिन, लगता था जिंदगी खत्म : कोरोना वायरस से संक्रमित महिला के परिजनों के लिए 14 दिन 14 जनम से कम नहीं थे। महिला की एक निकट परिजन ने कहा, 'उमराह से लौटने के दो दिन बाद हमारी अम्मी को बुखार हुआ। हमने सोचा शायद खांसी या जुकान के कारण हुआ है। हम उन्हें अस्पताल लेकर गए तो डॉक्टर ने टेस्ट करवाने की सलाह दी। उनकी रिपोर्ट पॉजिटिव आई तो हमारे पांव तले जमीन खिसक गई। प्रशासन ने हमारे घर के साथ पूरे इलाके को सील कर दिया।' महिला के पति, दामाद (आइपीएस), बेटों, बहुओं और बेटियों को भी क्वरटांइन के लिए भेज दिया। एक बेटे और बहु व एक बेटी को घर में ही क्वरटांइन किया गया, जबकि अन्य को अस्पताल में भर्ती किया गया था। परिजन ने कहा कि हमें अम्मी से मिलने नहीं दिया जाता था। डर के मारे हमने अपने मोबाइल फोन भी बंद कर दिए थे, क्योंकि कुछ लोग फोन पर हमसे अजीब अंदाज से सवाल करते थे।

इस दौरान हम सभी के भी टेस्ट किए गए। हमें लग रहा था कि हमारी दुनिया खत्म है। अब कोई अस्ताल से जिंदा वापस घर नहीं जाएगा, लेकिन हमारे टेस्ट निगेटिव आए। हमें घर जाने की इजाजत दी गई। लेकिन हमारी अम्मी अस्पताल में रही। हमारे पिता को ही वहां रुकने दिया गया। हमारे पूरे परिवार ने एकदूसरे का साथ नहीं छोड़ा और हौसला बनाए रखा। सोमवार सुबह हमें पता चला कि अम्मी का टेस्ट निगेटिव आया है, हम बहुत खुश हैं। बस अब इंताजर कर रहे हैं कि अम्मी जल्द घर आ जाएं। 

  • 'अगर हम इस महिला की तरह मजबूत इच्छा शक्ति व सकारात्मक सोच से काम लें और पूरी तरह मेडिकल गाइडलाइन पर चलें तो इस घातक बीमारी को हरा सकते हैं।' -डॉ. फारूक जान, मेडिकल सुपरिंटेंडेंट, सौरा मेडिकल इंस्टीट्यूट

Posted By: Rahul Sharma

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