'जिंदा रहूं या न रहूं, बदलाव...', वोटर लिस्ट विवाद पर फारूक अब्दुल्ला बोले- नेहरू की गलती का भुगत रहे नतीजा
नेशनल कॉन्फ्रेंस प्रमुख फारूक अब्दुल्ला ने चुनाव आयोग पर वोटर लिस्ट से नाम हटाने, खासकर मुसलमानों को निशाना बनाने का ...और पढ़ें
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जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला। फाइल फोटो
HighLights
फारूक अब्दुल्ला ने चुनाव आयोग पर वोटर लिस्ट से नाम हटाने का आरोप लगाया।
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की आलोचना की, मुसलमानों को निशाना बनाने का जिक्र।
कहा, लोग हिम्मत दिखा रहे हैं, बदलाव की हवा चल रही है, भारत की भावना जीवित।
राज्य ब्यूरो, जम्मू। नेशनल कॉन्फ्रेंस प्रमुख फारूक अब्दुल्ला ने एसआईआर प्रक्रिया को लेकर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ हो रहे विरोध के बीच चुनाव आयोग द्वारा वोटर लिस्ट से नाम हटाए जाने की कथित कार्रवाई की आलोचना की। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि लोगों ने हिम्मत दिखानी शुरू कर दी है। यह इस बात का संकेत है कि बदलाव आने वाला है।
श्रीनगर में एक कार्यक्रम में अब्दुल्ला ने मुख्य चुनाव आयुक्त की आलोचना की और कहा कि किसी को भी भारतीय नागरिक का नाम वोटर लिस्ट से हटाने का अधिकार नहीं है। जब भारत का संविधान आपको एक भारतीय नागरिक के तौर पर वोट देने का अधिकार देता है तो किसी को भी लिस्ट से किसी का नाम हटाने का अधिकार नहीं है। फिर भी उन्होंने ऐसा किया।
भारत की भावना मरी नहीं, अभी जिंदा है
उन्होंने चुन-चुनकर मुसलमानों को निशाना बनाया और उनके नाम हटा दिए। आप देखिए कि यह किस हद तक हुआ। कपिल सिब्बल जैसे बड़े वकील का नाम भी लिस्ट से हटा दिया गया। न जाने कितनों के नाम हटा दिए गए। क्योंकि उनका मकसद है हमें हमेशा सत्ता में बने रहना है। अब्दुल्ला ने कहा कि देश में बदलाव की हवा चलने लगी है और भारत की भावना अभी भी पूरी तरह ज़िंदा है।
उन्होंने कहा कि चाहे मैं ज़िंदा रहूं या न रहूं, बदलाव आने वाला है। बदलाव की वह हवा चलने लगी है जिससे लोगों की ताक़त फिर से सामने आएगी। नेशनल कान्फ्रेंस अध्यक्ष ने कहा कि उत्तर से दक्षिण और पूर्व से पश्चिम तक इस देश को लोगों ने ही बनाया है और यही लोग भारत को महान बनाएंगे फॉरवर्ड ब्लॉक पार्टी उन गुटों में से एक है जिन्होंने यह आंदोलन शुरू किया है। भारत मरा नहीं है। भारत ज़िंदा है।
नेहरू की गलती की भुगत रहे खामियाजा
अब्दुल्ला ने कहा कि उन्हें खुशी है कि लोग और पार्टियां अब आवाज़ उठाने और इसे मानने से इनकार करने लगी हैं। उन्होंने कहा कि आपने इसे परसों मुंबई में देखा। उन्होंने ज़बरदस्त विरोध प्रदर्शन किया। कल दिल्ली में भी ऐसा ही हुआ।
पूर्व मुख्यमंत्री ने आल इंडिया स्टूडेंट एसोसिएशन की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा की ओर इशारा करते हुए कहा उस युवा महिला को देखिए जो डटकर खड़ी रही और उनसे सवाल किए।हालांकि अब्दुल्ला ने अफ़सोस जताया कि नेहरू के शासनकाल में सबसे बड़ी गलती चुनाव आयोग को पूरी तरह से स्वतंत्र न बनाना थी।
सरकार के पक्ष में और संघ के लिए काम करते
उन्होंने कहा कि उन्हें चुनाव आयोग को पूरी तरह से स्वतंत्र बनाना चाहिए था। यह एक गलती थी और आज हम उसका नतीजा भुगत रहे हैं। अगर चुनाव आयोग स्वतंत्र होता तो आज हम इस हालत में न होते। नेंका प्रमुख ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार ने मुख्य चुनाव आयुक्त को चुनने के लिए सरकार से दो और विपक्ष से एक सदस्य को शामिल किया।
मुझे बताइए, जब बहुमत दो सदस्य एक तरफ हो, तो विपक्ष का वह अकेला नेता क्या कर सकता है। उसी बहुमत का इस्तेमाल करकेए मोदी ने अपने ही विभाग के एक सेक्रेटरी को चुनाव आयोग का प्रमुख नियुक्त किया। वह पूरी तरह से सरकार के पक्ष में हैं और संघ के लिए काम करते हैं।
