श्रीनगर, राज्य ब्यूरो। कश्मीर में लोगों का दिल जीते बिना आतंकवाद का अंत नहीं हो सकता। कश्मीर में स्थायी शांति तभी बहाल होगी जब कश्मीर मुद्दे के समाधान के लिए पाकिस्तान से बात होगी। यह विचार नेशनल कांफ्रेंस के अध्यक्ष और डा फारूक अब्दुल्ला ने बुधवार को नवाए सुब परिसर स्थित पार्टी मुख्यालय में पत्रकारों के साथ बातचीत में व्यक्त किए। उन्होंने मंगलवार को आतंकी हमले की निंदा करते हुए कहा कि जब तक कश्मीर मसला है, लोग यहां मरते रहेंगे। इस हमले में एक पुलिसकर्मी वीरगति को प्राप्त हुआ था।

डा फारूक अब्दुल्ला ने भाजपा का नाम लिए बगैर कहा कि उसके मंत्री और अन्य नेता बेशक दावा करते रहें कि आतंकवाद समाप्त हो गया है, कश्मीर में हालात सामान्य हो गए हैं,लेकिन मैं उन्हें यह बता देना चाहता हूं , उन्हे समझाना चाहता हूं कि जब तक आप कश्मीरियों के दिल नहीं जीतोगे और पड़ौसी मुल्क के साथ बातचीत में कश्मीर मसले का हल नहीं करोगे, तब तक आतंकी हिंसा और यह खूना खराबा चलता रहेगा।

मंगलवार को श्रीनगर के लाल बाजार में हुए आतंकी हमले में पुलिस का एक असिस्टेंट सब इंस्पेक्टर मुश्ताक अहमद वीरगति को प्राप्त हुआ है और दो अन्य पुलिसकर्मी जख्मी हुए हैं। बलिदानी मुश्ताक अहमद का एक पुत्र आकिब कथित तौर पर आतंकी था जो अप्रैल 2020 में सुरक्षाबलों के साथ मुठभेड़ में मारा गया था।

डा फारूक अब्दुल्ला ने कहा बलिदानी पुलिसकर्मी मुश्ताक अहमद का जिक्र करते हुए कहा कि वह आतंकी हमले में मारा गया जबकि उसका पुत्र सुरक्षाबलों के साथ मुठभेड़ में मारा गया है। हमें नहीं पता कि यहां कौन हत्यारा है और कौन अाम आदमी का संरक्षक। यह बहुत अजीब स्थिति है। हम सभी इसकी निंदा करते हैं और अल्लाह से दुआ करते हैं कि वह पीड़ित परिवार को यह सदमा बर्दाश्त करने की ताकत दे। उन्होंने कहा कि बलिदानी पुलिसकर्मी के परिजनों केा सरकार अच्छी तरह से आर्थिक व अन्य प्रकार से मदद करनी चाहिए ताकि उसके परिजन एक सम्मानजनक जिंदगी जी सकें।

श्रीलंका जैसी स्थिति भारत में पैदा होने की आशंका पर उन्होंने कहा कि कहीं भी कुछ भी हो सकता है। खुदा, हमें ऐसी मुसीबत से बचाए। हमें दुआ करनी चाहिए कि हमें ऐसी मुश्किलात का सामना न करना पड़े। हमें श्रीलंका के लोगों के लिए भी दुआ करनी चाहिए कि खुदा उन्हें जल्द से जल्द इस मुसीबत से बाहर निकाले। इसके साथ ही खुदा, हमारी सरकार को भी समझ दे कि वह श्रीलंका जैएसे हालात से बचने के लिए कोई कदम उठाए। 

Edited By: Vikas Abrol