'माफी मांगें या पाकिस्तान जाएं...', फारूक अब्दुल्ला के बयान से जम्मू में सियासी घमासान; गिरफ्तारी और NSA की मांग
फारूक अब्दुल्ला के पाकिस्तान संबंधी बयान पर जम्मू में सोमवार को भारी विरोध प्रदर्शन हुए, जिसमें भाजपा और विभिन्न संगठनों ...और पढ़ें

फारूक अब्दुल्ला के पाकिस्तान बयान पर जम्मू में हंगामा। (फाइल फोटो)
HighLights
फारूक अब्दुल्ला के पाकिस्तान संबंधी बयान पर विरोध प्रदर्शन।
भाजपा ने माफी मांगने या पाकिस्तान जाने को कहा।
गिरफ्तारी और राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) की मांग।
डिजिटल डेस्क, जम्मू। पाकिस्तान को लेकर नेशनल कॉन्फ्रेंस प्रमुख फारूक अब्दुल्ला के बयान के बाद सोमवार को जम्मू में उनके खिलाफ विरोध-प्रदर्शन हुए। एक बीजेपी सांसद ने उनसे कहा कि या तो वे भारत की जनता से माफी मांगें, या फिर पड़ोसी देश में जाकर रहने के बारे में सोचें।
अब्दुल्ला ने बारामूला में एक बयान दिया था, जिसमें उन्होंने कहा कि पाकिस्तान कश्मीरियों की रक्षा कर रहा है। इस बयान पर तीखी प्रतिक्रियाएं आईं और बीजेपी नेताओं तथा कई संगठनों ने उनकी गिरफ्तारी की मांग तक कर दी।
क्या था फारूक अब्दुल्ला का बयान?
अब्दुल्ला ने कहा, 'अगर आप अपनी पहचान नहीं बचाएंगे, तो आप मिट जाएंगे। हमारा नामो-निशान और पहचान तक खत्म हो जाएगी। कुछ भी नहीं बचेगा। वे आज इसलिए चुप हैं क्योंकि दुनिया में शोर है, और हमारा पड़ोसी देश लगातार इसके पीछे है। वे हर जगह कहते हैं कि 'कश्मीर को लेकर अभी फैसला नहीं हुआ है'। यही बात हमें बचा रही है। वरना, उनके इरादे अच्छे नहीं हैं।'
'देश के 140 करोड़ लोगों से माफी मांगे'
राष्ट्रीय बजरंग दल, विश्व हिंदू परिषद, भारतीय जनता युवा मोर्चा, डोगरा फ्रंट और नेशनल एंटी-टेररिज्म फ्रंट ने अब्दुल्ला के खिलाफ मार्च निकाला और प्रदर्शन किया। उन्होंने नारे लगाए और अब्दुल्ला के पुतले जलाए। बीजेपी के राज्यसभा सांसद सत शर्मा ने मांग की कि अब्दुल्ला पूरे देश से माफी मांगें।
शर्मा ने कहा, 'भारतीय जनता पार्टी का मानना है कि उन्हें पूरे देश से माफी मांगनी चाहिए। फारूक साहब को देश के 140 करोड़ लोगों से माफी मांगनी चाहिए।' उन्होंने आगे कहा कि अगर अब्दुल्ला माफी नहीं मांगते हैं, तो उन्हें पाकिस्तान में जाकर रहने के बारे में सोचना चाहिए।
पाकिस्तान कश्मीरियों का शुभचिंतक कैसे?
बीजेपी विधायक विक्रम रंधावा ने इस बयान को 'राष्ट्र-विरोधी' करार दिया और कहा कि इसे हल्के में नहीं लिया जा सकता। उन्होंने अब्दुल्ला पर आरोप लगाया कि वे एक ऐसे देश के पक्ष में बोल रहे हैं, जिसने जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद और अशांति को बढ़ावा दिया है।
जम्मू-कश्मीर बीजेपी के पूर्व अध्यक्ष रविंदर रैना ने भी इस बयान की निंदा की। उन्होंने सवाल उठाया कि पाकिस्तान, जिस पर भारत ने बार-बार सीमा पार आतंकवाद को समर्थन देने का आरोप लगाया है, उसे जम्मू-कश्मीर के लोगों का शुभचिंतक कैसे कहा जा सकता है? उन्होंने भी अब्दुल्ला से माफी की मांग की।
बीजेपी नेता शक्ति राज परिहार ने भी इन बयानों की निंदा की और देशद्रोह के आरोप में एफआईआर दर्ज करने तथा अब्दुल्ला की गिरफ्तारी की मांग की।
कांग्रेस ने भी फारूक अब्दुल्ला के बयान पर रखी बात
कांग्रेस नेता रविंदर शर्मा ने कहा कि जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है और हमेशा रहेगा। उन्होंने शिमला समझौते का हवाला देते हुए कहा कि पाकिस्तान को कश्मीर का मुद्दा उठाने का कोई अधिकार नहीं है, क्योंकि इस समझौते में द्विपक्षीय मुद्दों को सीधी बातचीत के जरिए सुलझाने का प्रावधान है।
हालांकि, शर्मा ने अल्पसंख्यकों को न्याय न मिलने और क्षेत्र के अन्य मुद्दों पर अब्दुल्ला की टिप्पणियों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस जम्मू-कश्मीर को फिर से राज्य का दर्जा दिलाने की मांग कर रही है, और इसके लिए सरकार द्वारा दिए गए आश्वासनों तथा संसद में हुई चर्चाओं का हवाला दिया।
फारूक अब्दुल्ला के खिलाफ छन्नी थाने में शिकायत
'पनून कश्मीर' और 'जम्मू स्टेट पीपुल्स मूवमेंट' ने नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई है। यह आपराधिक शिकायत 'पनून कश्मीर' के चेयरमैन टीटो गंजू और JSPM के चेयरमैन कर्नल अजय रैना के माध्यम से छन्नी पुलिस स्टेशन में दर्ज कराई गई। अब्दुल्ला के बयानों का जिक्र करते हुए गंजू ने सवाल किया, "पाकिस्तान किसे बचा रहा है, और किस चीज से?"
नेशनल एंटी-टेररिज्म फ्रंट ने भी, जिसके राष्ट्रीय अध्यक्ष विशाल चोपड़ा हैं, विरोध प्रदर्शन किया और अब्दुल्ला से माफी की मांग की। चोपड़ा ने इन बयानों की आलोचना करते हुए कहा कि जो नेता जम्मू-कश्मीर का मुख्यमंत्री रह चुका हो, उसे अपने सार्वजनिक पद से जुड़ी जिम्मेदारियों का ध्यान रखना चाहिए।
कानून का उल्लंघन मिलने पर कार्रवाई की अपील
सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के जम्मू-कश्मीर अध्यक्ष विवेक बाली ने इन बयानों की जांच की मांग की और कहा कि यदि ये कानून का उल्लंघन करते पाए जाते हैं, तो उचित कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए। बाली ने कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा, संप्रभुता और देश की अखंडता से जुड़े मामलों पर टिप्पणी करते समय जन प्रतिनिधियों को जिम्मेदारी दिखानी चाहिए।
उन्होंने आगे कहा कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का इस्तेमाल संवैधानिक जिम्मेदारियों के दायरे में रहकर ही किया जाना चाहिए।
NSA और चुनावी कानूनों के तहत कार्रवाई की मांग
'जम्मू स्टेट मूवमेंट' ने भी अब्दुल्ला के बयानों पर चर्चा करने के लिए, सेवानिवृत्त ब्रिगेडियर विजय सागर धवन की अध्यक्षता में अपने कोर ग्रुप की एक आपातकालीन बैठक बुलाई। संगठन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और अन्य संबंधित अधिकारियों से अपील की कि वे इस मामले की निष्पक्ष, स्वतंत्र और समयबद्ध जांच के आदेश दें।
JSM ने अब्दुल्ला के बयानों की जांच की मांग की है। साथ ही, कानूनी शर्तें पूरी होने पर, राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) के तहत संभावित कार्रवाई पर विचार करने को कहा है।
इसके अलावा, उन्होंने अधिकारियों से यह देखने का आग्रह किया है कि क्या नेशनल कॉन्फ्रेंस के खिलाफ कोई कानूनी कार्रवाई बनती है। साथ ही, भारत निर्वाचन आयोग से भी अपील की है कि वह लागू चुनावी कानूनों के तहत संबंधित मामलों की समीक्षा करे।
(समाचार एजेंसी पीटीआई के माध्यम से)
