जम्मू, राज्य ब्यूरो : जम्मू कश्मीर में कोरोना वायरस के संक्रमण को रोकने के लिए सेना के साथ सेवानिवृत्त सैनिक भी मैदान में उतर आए हैं। जम्मू कश्मीर के सैन्य अस्पतालों में बुनियादी ढांचा मजबूत बनाने के लिए कई सेवानिवृत सैन्य डॉक्टर व स्वास्थ्य कर्मी भी स्वेच्छा से मदद को आगे आए हैं।

आर्मी मेडिकल कोर ने कोरोना वायरस से किसी भी हालात का सामना करने के लिए विशेष योजना बनाई है। इसके तहत सैन्य अस्पताल दो वर्षो में सेवानिवृत्त हुए अपने कर्मियों से संपर्क में हैं। जम्मू कश्मीर में करीब 1200 पूर्व सैनिकों ने उपराज्यपाल प्रशासन के बुलावे पर कोविड ड्यूटी पर हाजिर होने की पेशकश की है। जम्मू कश्मीर सैनिक कल्याण बोर्ड ने इन पूर्व सैनिकों की सूची प्रशासन को सौंपी है। 821 पूर्व सैनिक कोरोना वायरस से उपजे चुनौतीपूर्ण हालात में जम्मू कश्मीर में सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों की सुरक्षा की ड्यूटी भी संभाल रहे हैं।

सेवानिवृत सैन्यकर्मी देश सेवा के लिए रहते हैं तत्पर : देवेन्द्र जम्मू के पीआरओ डिफेंस लेफ्टिनेंट कर्नल देवेंद्र आनंद का कहना है कि सेवानिवृत्त सैन्यकर्मी हर समय देश सेवा के लिए तत्पर रहते हैं। विशेष रूप से प्रशिक्षित ये लोग किसी भी हालात में काम करने की काबिलियत रखते हैं। सैनिक कल्याण बोर्ड के निदेशक ब्रिगेडियर हरभजन सिंह का कहना है कि 50 वर्ष से कम आयु के 1200 पूर्व सैनिकों ने कोविड ड्यूटी के लिए इच्छा जताई है। उनकी सूची डीसी को उपलब्ध करवाई गई है।

पूर्व सैनिकों को लाइफ सर्टिफिकेट देने से छूट: कोरोना वायरस से उपजे हालात में भारतीय सेना ने चालू वित्त वर्ष में जीवित प्रमाणपत्र (लाइफ सर्टिफिकेट) के बिना भी अपने पूर्व सैनिकों व वीर नारियों की पेंशन जारी रखने का फैसला किया है। निर्देश में कहा गया है कि पूर्व सैनिक कंट्रोलर ऑफ डिफेंस अकाउंट्स के पेंशन वितरण अधिकारियों से टेलीफोन पर पेंशन जारी रखने के बारे में बात कर सकते हैं। जिला सैनिक कल्याण बोर्ड के माध्यम से पेंशन हासिल करने वाली वीर नारियां फोन पर बात कर सकती हैं। उनकी टेलीफोन काल को जीवित प्रमाणपत्र मानने हुए उनकी पेंशन को जारी रखा जाएगा।

Posted By: Rahul Sharma

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