जागरण संवाददाता, जम्मू : बिजली विभाग के निजीकरण का विरोध करते हुए विभागीय कर्मचारियों ने शनिवार को पनामा चौक स्थित सेकेंड डिवीजन कार्यालय के बाहर प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने डेलीवेजरों को स्थायी न किए जाने तथा डीपीसी न करवाने के विरोध में नारेबाजी की। प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी कि अगर उनकी मांगों पर गौर नहीं किया गया तो आने वाले दिनों में वे अपना प्रदर्शन उग्र करेंगे।

जेएंडके सेंट्रल नान-गजेटिड इलेक्ट्रिकल इंप्लाइज यूनियन के बैनर तले हुए इस प्रदर्शन के दौरान प्रदेशाध्यक्ष जगदेव सिंह व प्रांतीय प्रधान गुरनाम सिंह सलाथिया ने कहा कि एसआरओ 381 के तहत विभाग के 1320 डेलीवेजरों को स्थायी करने की फाइल लंबित है। पिछले 15-25 साल से डेलीवेजरों की मांग को लगातार अनदेखा किया जा रहा है। जगदेव सिंह ने कहा कि इस समय जहां पूरा देश कोविड-19 से जूझ रहा है, सरकार श्रमिक वर्ग को राहत देने की बजाय जम्मू-कश्मीर में नए श्रम कानून लागू करके उन्हें प्रताड़ित कर रही है।

उन्होंने कहा कि पहले सरकार ने जम्मू-कश्मीर पावर डेवलपमेंट डिपार्टमेंट को दो कारपोरेशन में बांट दिया और अब पूरे पावर डेवलपमेंट डिपार्टमेंट का निजीकरण किया जा रहा है जोकि न सिर्फ विभागीय कर्मचारियों के साथ नाइंसाफी है, बल्कि इससे उपभोक्ताओं की जेब पर भी डाका पड़ेगा। उन्होंने कहा कि पीडीडी के निजीकरण के बाद किराये में बेतहाशा वृद्धि होगी जिससे उपभोक्ताओं की परेशानियां बढ़ेगी।

प्रदर्शन के दौरान गुरनाम सिंह ने कर्मचारियों की डीपीसी करने, नान-टेक्नीकल कर्मचारियों के लिए जम्मू प्रांत में ट्रेनिग सेंटर स्थापित करने, लो-ग्रेड में पिछले बीस सालों से काम कर रहे कर्मचारियों को उचित पद व ग्रेड देने की मांग भी उठाई गई। यूनियन ने जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा से इस मामले में हस्तक्षेप करने व कर्मचारियों को राहत प्रदान करने की अपील भी की।

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