जम्मू, रोहित जंडियाल: करीब 17 करोड़ रुपयों की लागत से बना चौकीचोरा का इमरजेंसी अस्पताल देखने में किसी होटल से कम नहीं लगता लेकिन जब आप इसके भीतर जाएंगे तो अहसास ढाबे जैसी सुविधाओं का होगा। अधिकांश विशेषज्ञ डाक्टरों की कमी के कारण अस्पताल में प्राथमिक उपचार की सुविधा तो उपलब्ध है लेकिन अगर आपको विशेषज्ञों से इलाज की जरूरत पड़ेगी तो आपको राजकीय मेडिकल कालेज जम्मू ही एकमात्र विकल्प नजर आएगा। अस्पताल में नियुक्त डाक्टरों के मरीजों को बचाने के प्रयास भी सुविधाओं के अभाव में कम नजर आएंगे।

जम्मू के करीब चालीस किलोमीटर दूर स्थित यह अस्पताल सबसे संवेदनशील क्षेत्र में बना है। एक ओर जहां जम्मू-पुंछ राष्ट्रीय राजमार्ग स्थित है। वहीं इस अस्पताल से अंतरराष्ट्रीय सीमा भी तीस किलोमीटर के पास ही है। पाकिस्तान की ओर से होने वाली गोलीबारी के दौरान घायलों को प्राथमिक उपचार के लिए इसी अस्पताल में लाया जाता था। अभी संघर्ष विराम के कारण इससे छुटकारा मिला हुआ है। वहीं जम्मू के बाद पुंछ तक पूरे राजमार्ग पर यही एक इमरजेंसी अस्पताल है। अगर इस दौरान कोई भी सड़क दुर्घटना होती है तो इसी अस्पताल में मरीज को लाया जाता है। पहली बार अस्पताल में जाने वालों को यह अहसास नहीं होता कि अस्पताल में न तो आर्थोपैडिक्स का कोई विशेषज्ञ डाक्अर है और न ही कोई सर्जन है। ऐसे में जब कोई घायल अस्पताल में पहुंचता है तो वहां पर नियुक्त डाक्टर उसका प्राथमिक उपचार करने के बाद उसे जीएमसी जम्मू में भेज देते हैं।

यह अस्पताल चौबीस घंटे मरीजों के लिए खुला रहता है। इस अस्पताल को खोलने का मकसद था कि अगर इस राजमार्ग पर कोई सड़क दुर्घटना होती है या फिर पाकिस्तान की ओर से गोलीबारी होती है तो घायलों का इलाज यही पर हो, समय बर्बाद न हो और उन्हें मेडिकल कालेज जाने की जरूरत न पड़े। इसके लिए बकायदा तौर पर अस्पताल के लिए आर्थाेपैडिक्स, रेडियालाेजिस्ट, सर्जन, फिजिशयन, बालरोग विशेषज्ञ, गायनाकालोजिस्ट और नेत्र रोग विशेषज्ञ के पद भी सृजित किए थे। लेकिन विडंबना यह है कि इनमें से अस्पताल में सिर्फ नेत्र रोग विशेषज्ञ ही है। गानाकालोजिस्ट की नियुक्त हुई है लेकिन वह उप जिला अस्पताल अखनूर में अटैच है। अन्य सभी पद खाली पड़े हैं। अस्पताल मेडिकल आफिसर्स ने संभाला हुआ है। खाली पदों के कारण बीएमओ या फिर अन्य मेडिकल आफिसर्स के प्रयास भी विफल होते नजर आते हैं। उन्हें मरीजों को रेफर करने के लिए विवश होना पड़ता है।

चौकीचोरा के ब्लाक मेडिकल आफिसर डा. रितेश खुल्लर का कहना है कि अस्पताल चौबीस घंटे खुला रहता है। यहां पर आने वाले सभी मरीजों और घायलों का उपचार किया जाता है। हालांकि उन्होंने यह स्वीकार किया कि अस्पताल में विशेषज्ञ डाक्टरों की कमी के कारण मरीजों को विशेष इलाज के लिए जम्मू में भेजना पड़ता है। जम्मू के मुख्य स्वास्थ्य अधिकारी डा. जेपी सिंह ने भी चौकीचोरा के इमरजेंसी अस्पताल में विशेषज्ञ डाक्टरों की कमी की बात मानी है।

 

Edited By: Rahul Sharma