जम्मू, जेएनएफ : ग्रामीण विकास विभाग डोडा के जूनियर इंजीनियर्स समेत विभाग के अन्य अधिकारियों ने मिलीभगत कर विकास कार्यों के नाम पर फर्जी बिल लगाकर सरकारी खजाने से 18 लाख 75 हजार 307 रुपये निकाल लिए हैं। शुरुआत जांच में आरोप साबित होने पर एंटी करप्शन ब्यूरो ने आरोपितों के खिलाफ केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

ब्यूरो ने ग्रामीण स्तरीय कर्मी खालिद नजीब मौलवी, जेई तरूण गुप्ता, जेई शफकत हुसैन, नसीर राशिद, अमित कुमार, अख्तर हुसैन, जेई तनवीर अहमद शाह, ग्रामीण स्तरीय कर्मी मंसूर हुसैन, गुलाम रसूल, सजाद अहमद, अब्दुल माजिद, मरूफा बेगम, रहिला परवीन तथा अन्य के खिलाफ डोडा जिले के डली ब्लाक में वर्ष 2014 से 2018 के बीच फर्जी बिलों के आधार पर सरकारी खजाने से 18 लाख 75 हजार 307 रुपये निकालने का केस दर्ज किया है।

ब्यूरो केस के मुताबिक, उस समय डली ब्लाक में कुल 1386 विकास कार्य किए गए। शुरुआती जांच में इन 1386 कार्यों में से ब्यूरो ने 118 कार्यों की जांच की और पाया कि इनमें से 29 कार्य ऐसे थे जो जमीनी स्तर पर कम हुए थे, लेकिन कागजों में अधिक दिखाकर अतिरिक्त बिल पेश किए गए थे। एक विकास कार्य के लिए गोवारी से पंचायत सील तक पक्का रास्ता बनाया जाना था।

इस काम को कागजों में तो दर्शाया गया, लेकिन जमीनी स्तर पर ऐसा कोई कार्य नहीं हुआ था। ऐसे में इन 30 विकास कार्याें में ही सरकारी खजाने को 18 लाख 75 हजार 307 रुपये का चूना लगाया गया। आरोपितों ने साजिश के तहत आपसी मिलीभगत से इस गबन को अंजाम दिया है। 

एससीइआरटी के संयुक्त निदेशक के खिलाफ चार्जशीट : स्कूल शिक्षा विभाग कश्मीर के निदेशक ने स्टेट काउंसिल फॉर एजुकेशनल रिसर्च एंड ट्रेङ्क्षनग कश्मीर (एससीइआटी) के संयुक्त निदेशक के खिलाफ चार्जशीट जारी की है। यह चार्जशीट संयुक्त निदेशक के मुख्य शिक्षा अधिकारी रहते हुए अध्यापकों के तबादले में भ्रष्टाचार में संलिप्त होने और अध्यापकों की बर्खास्त की सूची में नाम हटाने के लिए पैसे लिए जाने के मामले में की गई है।

विभाग ने पूर्व मुख्य शिक्षा अधिकारी अनंतनाग मोहम्मद शरीफ को चार्जशीट भेजकर कहा है कि मुख्य शिक्षा अधिकारी अनंतनाग के पद पर रहते हुए मोहम्मद शरीफ ने अवैध रूप से सामान्य तबादलों के लिए रिश्वतखोरी की और एक नया तरीका अपनाते हुए अध्यापकों से पैसे भी यह कहकर ऐंठे कि उनका नाम बर्खास्त वाली सूची में से हटाया जाएगा। निदेशक ने चार्जशीट दाखिल करते हुए कहा कि उस अधिकारी के खिलाफ क्यों न विभागीय कार्रवाई की जाए। इस संबंध में सात दिन के भीतर जवाब देने के लिए कहा गया है। उसके बाद यह माना जाएगा कि आरोपित ने अपने पक्ष में कुछ नहीं कहा और नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

Edited By: Rahul Sharma

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