यह एक आर्काइव लेख है, जिसे May 08, 2022 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
हम मुआवजा नहीं मीरपुर व मुजफ्फराबाद लेने आए हैं, पीओजेके की खाली 24 विस सीटों में आठ पर चुनाव होना चाहिए : सुरेंद्र जैन
पूर्वजों पर ढाए जुल्म की कहानी सुनकर भावुक हो चुके विस्थापितों में विश्व हिन्दु परिषद के राष्ट्रीय संयुक्त महासचिव सुरेंद्र ...और पढ़ें

जम्मू, लोकेश चंद्र मिश्र : आजाद भारत के इतिहास में पहली बार वृहत स्तर पर जम्मू मेें ऐसा कोई कार्यक्रम हुुआ, जिसमें देश के विभिन्न राज्यों में बसे पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर यानी पीओजेके के विस्थापितों को समेकित किया। पीपुल्स फोरम जम्मू-कश्मीर के तत्वावधान में आयोजित सामूहिक श्रद्धांजलि व पुण्यभूमि स्मरण सभा ने अपनी जमीन और संस्कृति से उखड़ चुके विस्थापित परिवारों के सूखे जख्म को फिर से कुरेद कर हरा कर दिया।
वक्ताओं से पूर्वजों पर ढाए जुल्म की कहानी सुनकर भावुक हो चुके विस्थापितों में विश्व हिन्दु परिषद के राष्ट्रीय संयुक्त महासचिव डा. सुरेंद्र जैन ने जोश भर दिया। उन्होंने गरजते हुए कहा- हम इस कार्यक्रम में मुआवजा लेने नहीं, बल्कि मीरपुर और मुजफ्फराबाद लेने आए हैं। पद्मा सचदेव मेमोरियल गवर्नमेंट वीमेन कॉलेज गांधीनगर के मैदान आयोजित कार्यक्रम में सुरेंद्र जैन ने दो टूक कहा कि अब जम्मू कश्मीर बदल गया है। यहां का भविष्य कुछ परिवार तय नहीं करेंगे।
अदुल्ला परिवार की तरफ इशारा करते हुए उन्होंने कहा कि तीन पीढ़ियों से लूटते आ रहे परिवार की अब नहीं चलेगी। प्रदेश का भविष्य अब इस कार्यक्रम में पहुंचे लोगों तय करेंगे। उन्होंने मंच से ही केंद्र सरकार से यह मांग भी उठाई की पीओजेके में खाली जम्मू-कश्मीर की 24 विधानसभा सीटों में से कम से कम आठ सीटों पर चुनाव कराए जाने जाहिए। तब पीड़ित परिवारों को न्याय मिल सकेगा।
विस्थापन के दंश के लिए शेख अब्दुल्ला और प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू को साफ दोषी ठहराते हुए सुरेंद्र जैन ने महाराजा हरि सिंह के दूरदर्शी सोच का गुणगान किया। उन्होंने कहा कि यदि महाराजा भारत से विलय की बात पर अड़े नहीं होते तो आज पूरा कश्मीर पाकिस्तान का हिस्सा होता। यह अधिकार सिर्फ महाराजा हरि सिंह के पा ही था। पंडित नेहरू को भी यह अधिकार नहीं था।
मंच से गरजे मुकेश ऋषि, कहा- हमारे खून में है मीरपुर की गली
पीपुल्स फोरम नेे देेश के उन नामचीन हस्तियों को भी इस कार्यक्रम में आमंत्रित किया था, जो विभिन्न क्षेत्रों में अपना नाम बनाया है। इन्हीं में सेे एक हैं सीने कलाकार मुकेश ऋषि। अपनी कड़कती आवाज में मंच से विस्थापितों को ललकारा और कहा कि सीना ठोक कर कहो कि हम वही लोग हैं, जिनके पूर्वजों ने हमें जिंदा रखने के लिए कुर्बानियां दीं। जिन्होंने मीरपुर और मुजफ्फराबाद में अपनी जमीन ढूंढते रहे।
बोलते-बोलते भावुक हुए मुकेश ऋषि ने चीखते हुए कहा- मीरपुर की गलियां मेरे खून में हैं, हम उसे लेकर रहेंगे। यह टीस हम विस्थापितों में कभी कम नहीं होनी चाहिए। जख्म हमेशा हरा रहना चाहिए। उन्होंने भरोसा भी दिलाया कि वह दिन दूर नहीं कि जम्मू रेलवे स्टेशन पर सुनाई देगा- यात्रीगण कृपया ध्यान दें... मीरपुर जाने वाली रेलगाड़ी 30 मिनट बाद चलने वाली है...। उनके इस संबोधन पर पूरा पंडाल तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा।
