जम्मू, जागरण संवाददाता : कोरोना महामारी के बीच ईद-उल फितर का त्योहार भी घर की चारदीवारी तक ही सीमित रहा। लोगों ने घरों में ही नमाज अदा की और मोबाइल एवं सोशल मीडिया पर अपने चाहने वालों को मुबारकबाद दी। पिछले वर्ष की तरह इस वर्ष भी ईद-उल-फितर पर मस्जिदों में सामूहिक नमाज नहीं हुई।

दूरदराज क्षेत्रों में अगर मस्जिदों में नमाज अदा भी की गई तो शारीरिक दूरी और कोरोना के चलते जारी सावधानियों का पूरा पालन किया गया। शहरों में लोगों ने घर में रहकर ही नमाज अदा करना सबके हित में समझा। मुस्लिम धर्म गुरुओं ने पहले ही सभी को घरों में रहकर ही नमाज करने की हिदायत दे रखी थी।

वहीं प्रशासन ने भी सामूहिक नमाज या कोई दूसरा कार्यक्रम न करने का आग्रह किया हुआ था।बाजारों में भी कोरोना के चलते कोई विशेष उत्साह नहीं देखा गया।सुबह लोगाें ने खाने पीने के सामान की खरीदारी की लेकिन किसी तरह की विशेष खरीददारी आदि संभव नहीं हो सकी।लोगाें ने बेकरी, मिठाई, फल सब्जियों, मटन, मुर्गे आदि की सुबह खरीददारी की और उसके बाद पूरा दिन परिवार के साथ ही ईद का लुत्फ उठाया।

बेशक कोरोना के चलते किसी के घर जा कर मुबारकबाद देने संभव नहीं था लेकिन लोगों ने बधाई देने के लिए सोशल साइट्स का जमकर प्रयोग किया। इन संदेशों में सभी की खुशहाली की कामना की गई और सभी एक दूसरे को कोरोना से बच कर रहने की पूरी कोशिश करने का सुझाव देते रहे। बडे़ बुजुर्गों ने तो एक दूसरे को मुबारक देकर ईद मना ली लेकिन बच्चों में जम कर ईद न मना पाने का मलाल ही रहा। जावेद ने कहा कि वर्ष भर इस दिन का इंतजार रहता है। इस मजे को भी कोरोना ने किरकिरा कर दिया। अल्लाह करे जल्द कोरोना खत्म हो और फिर से पहले की तरह ईद मना सकें।

Edited By: Vikas Abrol