जम्मू, सतनाम सिंह। जम्मू-कश्मीर में मंगलवार को आए भूकंप ने लोगों ही नहीं, विशेषज्ञों के भी होश उड़ा दिए हैं। इस भूकंप ने जम्मू कश्मीर के लिए आने वाले दिनों में बड़े खतरे का संकेत दे दिया। पिछले 10 साल में 250 से अधिक भूकंप झेलने वाले जम्मू कश्मीर की धरती आने वाले दिनों में भी कांप सकती है।

भूकंप के लिहाज से पूरा जम्मू कश्मीर बेहद संवदेनशील है। कश्मीर भूकंप के जोन पांच की श्रेणी में आता है और जम्मू चौथे जोन में। जम्मू कश्मीर में भूंकप की आशंका हमेशा बनी रहती है। मंगलवार को आया भूकंप ने पूरे राज्य के लोगों को कंपा दिया। दरअसल, आठ अक्टूबर 2005 को आए विनाशकारी भूकंप का केंद्र गुलाम कश्मीर ही था और मंगलवार को आए भूकंप का केंद्र भी गुलाम कश्मीर ही रहा। उस समय भी गुलाम कश्मीर में भारी जानमाल का नुकसान हुआ था और इस बार भी। बड़ी बात यह कि गुलाम कश्मीर से सटी जम्मू कश्मीर की सीमा के नजदीक पुंछ, ङ्क्षभबर, उड़ी इलाकों में भूकंप के झटके जम्मू, कठुआ, सांबा के मुकाबले अधिक महसूस होते है। अगर अफगानिस्तान के हिंदुकुश भूकंप का केंद्र रहे तो भी जम्मू कश्मीर अछूता नहीं रहता।

भूकंप के लिहाज से जम्मू कश्मीर लगातार संवेदनशील होता जा रहा है। यहां तक कि किश्तवाड़, डोडा, भद्रवाह में आने वाले भूकंप के हलके झटकों का केंद्र स्थानीय पहाड़ी इलाकों में ही रहता है। भूकंप के बारे में एक अमेरिकन विशेषज्ञ ने इस बात के संकेत दिए थे कि जम्मू कश्मीर में आने वाले समय में भूकंप का तेज झटके आ सकते हैं।

कुछ दिनों में फिर कांप सकती है धरती

जम्मू विवि में जियोलॉजी विभाग के वरिष्ठ प्रोफेसर और विवि में अर्थ साइंस प्रोजेक्ट के कोआर्डिनेटर प्रो. जीएम भट्ट का कहना है कि चूंकि भूकंप की रिक्टर स्केल की तीव्रता 6.3 थी। इसलिए इस झटके के बाद कुछ दिनों तक हलके झटके आते रहेंगे। बड़ा झटका भी आ सकता है। गुलाम कश्मीर का इलाका जम्मू कश्मीर से काफी दूर है इसलिए झटकों की तीव्रता कम हो जाती है। अलबत्ता लोगों को घबराने की जरूरत नहीं है।

हलके झटकों से कम हो जाता है बड़ा खतरा

जम्मू विश्वविद्यालय में जियोलॉजी विभाग के विशेषज्ञ प्रो. एसके पंडिता का कहना है कि भूकंप का केंद्र गुलाम कश्मीर के मीरपुर में झेलम के नजदीक बताया जाता है। यह क्षेत्र उड़ी और पुंछ के नजदीक पड़ता है। भूंकप से लोगों को सतर्क रहने की जरूरत है। तेज झटकों के बाद हलके झटके आते है। हलकों झटकों के आने से दवाब रिलीज होता है। इससे बड़ा खतरा कम हो जाता है। उन्होंने बताया कि आठ अक्टूबर 2005 को आए विनाशकारी भूकंप का केंद्र मौजूदा केंद्र से कुछ दूरी पर था। भूकंप की तीव्रता के लिहाज से पता चलता है कि इसका नुकसान गुलाम कश्मीर में हुआ होगा।

भूकंप रोके नहीं जा सकते, खुद को जागरूक करना होगा

प्रो. एसके पंडिता का कहना है कि भूकंप को रोका नहीं जा सकता है। ऐसा कोई उपकरण भी नहीं बना है जो भूकंप का पूर्वानुमान लगा सके। लोगों को घबराना नहीं चाहिए। लोगों को अपने मकानों के निर्माण को लेकर जागरूक जरूर होना चाहिए। सबसे जरूरी है कि मकानों को सरिया के पिल्लर बनाकर तैयार किया जाए। भूकंप से लोगों की जान का अधिक नुकसान मकानों के गिरने से होता है। इसलिए मकानों की बनावट को लेकर हमें जागरूक होना होगा। हम सरकार पर सारी जिम्मेदारी नहीं डाल सकते है।

2005 में एक हजार से अधिक लोग मारे गए थे

आठ अक्टूबर 2005 को आए विनाशकारी भूकंप से जम्मू कश्मीर में जान माल का भारी नुकसान हुआ था। इसमें 1195 लोगों की मौत हो गई थी। कश्मीर संभाग में 1178 और जम्मू संभाग में 17 लोगों की मौत हुई थी। उस समय 32723 मकानों को नुकसान पहुंचा था, जिसमें कश्मीर डिवीजन की 31809 और जम्मू संभाग की 914 इमारतें थीं। साल 2005 में भूकंप की तीव्रता रिक्टर स्केल पर 7.6 थी। भूकंप के झटके इतने तेज थे कि लोगों में कई दिनों दहशत का माहौल रहा था। आज भी लोग उस दिन को याद कर सिहर उठते है।

जम्मू विवि में भूकंप के कारणों पर हो रहा शोध

जम्मू विश्वविद्यालय के जियोलॉजी विभाग में स्थापित प्रोजेक्ट में जम्मू विवि, राजौरी, पुंछ, बनी, डोडा, भद्रवाह, अनंतनाग, डुरू, टंगडार में भूकंप के झटकों की तीव्रता का पता लगाने वाले उपकरण लगाए गए हैं। इसका डाटा इकट्ठा करके जम्मू विवि में भेजा जाता है। केंद्रीय अर्थ साइंस मंत्रालय के इस प्रोजेक्ट ने 2010 में काम करना शुरू किया था। शुरुआती दौर में यह प्रोजेक्ट पांच वर्ष का था। अब इसकी समयावधि पांच वर्ष और बढ़ गई है। इस डाटा को इकट्ठा कर रहे हैं। पूरे डाटा पर व्यापक रिसर्च होगी। फिलहाल करीब सात वर्ष का डाटा जोड़ा गया है। 

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