विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

सीने के दर्द को गैस या थकान समझकर न टालें, हार्ट अटैक के हो सकते हैं संकेत; जम्मू के डॉक्टर ने बताए बचाव के उपाय

Published: Mon, 05 Oct 2026 12:29 PM (IST)

जीएमसीएच जम्मू के कार्डियोलाजी विभागाध्यक्ष डॉ. सुशील कुमार शर्मा ने बताया कि बदलती जीवनशैली के कारण युवाओं में हृदय रोग ...और पढ़ें

डॉ. सुशील ने कहा कि युवाओं में बढ़ रहा हृदय रोग का खतरा। (फाइल फोटो)

डॉ. सुशील ने कहा कि युवाओं में बढ़ रहा हृदय रोग का खतरा। (फाइल फोटो)

HighLights

  1. युवाओं में हृदय रोग का खतरा तेजी से बढ़ रहा है।

  2. बदलती जीवनशैली, तनाव और अस्वास्थ्यकर खान-पान मुख्य कारण।

  3. नियमित व्यायाम, संतुलित आहार, लक्षणों की समय पर पहचान महत्वपूर्ण।

राज्य ब्यूरो, जम्मू। हृदय रोग अब केवल अधिक उम्र के लोगों तक सीमित नहीं रह गया है। युवा वर्ग, कामकाजी पेशेवरों और देखने में स्वस्थ लोगों में भी हृदय संबंधी जोखिम तेजी से बढ़ रहा है। कई मामलों में कम उम्र में ही हार्ट अटैक जैसी गंभीर स्थिति सामने आ रही है। ऐसे में हृदय रोग के जोखिम की समय रहते पहचान और बचाव बेहद जरूरी है। यह बात जीएमसीएच जम्मू के कार्डियोलाजी विभागाध्यक्ष डॉ. सुशील कुमार शर्मा ने कही।

डॉ. सुशील ने गुरुद्वारा सिंह सभा, माडल टाउन, गंग्याल, जम्मू में आयोजित एक दिवसीय शिविर कहा कि बदलती जीवनशैली ने हृदय रोग के जोखिम को बढ़ाने वाली कई परिस्थितियों को जन्म दिया है। लंबे समय तक बैठे रहना, शारीरिक गतिविधि की कमी, डिजिटल उपकरणों पर अत्यधिक निर्भरता, अस्वास्थ्यकर खान-पान, तंबाकू का सेवन, मोटापा, उच्च रक्तचाप, मधुमेह, बढ़ा हुआ कोलेस्ट्राल, नींद में गड़बड़ी और लगातार मानसिक तनाव आज आम जीवन का हिस्सा बनते जा रहे हैं।

उन्होंने कहा कि कई लोग इन साइलेंट जोखिम कारणों से अनजान रहते हैं और समस्या गंभीर होने के बाद ही चिकित्सकीय सहायता लेते हैं।

इन लक्षणों को तनाव या थकान समझकर न टालें

डॉक्टर ने नियमित व्यायाम, संतुलित एवं पौष्टिक आहार, पर्याप्त नींद, तंबाकू से दूरी और तनाव प्रबंधन को हृदय स्वास्थ्य बनाए रखने के महत्वपूर्ण उपाय बताया। उन्होंने कहा कि उम्र को हृदय रोग से सुरक्षा की गारंटी नहीं माना जाना चाहिए।

उन्होंने लोगों को चेताया कि सीने में दर्द या दबाव, बिना कारण सांस फूलना, असामान्य थकान, दिल की धड़कन तेज या अनियमित होना, ठंडा पसीना, मितली तथा दर्द का हाथ, पीठ, गर्दन या जबड़े तक फैलना जैसे लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

उन्होंने कहा कि इन लक्षणों को केवल तनाव या थकान समझकर टालना गंभीर परिणाम दे सकता है। समय रहते लक्षणों की पहचान और तत्काल चिकित्सा सहायता हृदय संबंधी आपात स्थिति में जीवन बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

बीपी, ब्लड शुगर और कोलेस्ट्राल पर रखें नजर

डॉक्टर ने विशेष रूप से हृदय रोग के जोखिम वाले लोगों और पारिवारिक इतिहास रखने वाले व्यक्तियों को समय-समय पर रक्तचाप, ब्लड शूगर और कोलेस्ट्ररल की जांच करवाने की सलाह दी।

उन्होंने कहा कि निवारक हृदय चिकित्सा को केवल अस्पतालों तक सीमित नहीं रखा जाना चाहिए, बल्कि इसे मोहल्लों, कार्यस्थलों, शिक्षण संस्थानों और परिवारों तक पहुंचाना जरूरी है।

इस अवसर पर सोसायटी के संयोजक हरविंदर सिंह, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रसिद्ध कथावाचक सरबजीत सिंह, डीजीपीसी के अध्यक्ष एस. रणजीत सिंह, जगपाल सिंह, परमजीत सिंह, दलबीर सिंह, सरबजीत सिंह, कैप्टन सुरिंदर सिंह और एस. सुखविंदर सिंह मौजूद रहे।