जम्मू, नवीन नवाज  : फरवरी, 2021....। श्रीनगर में डल झील के पास दुर्गानाग स्थित कृष्णा ढाबा के मालिक के पुत्र आकाश मेहरा की दो आतंकियों द्वारा की गई हत्या ने पूरे सुरक्षातंत्र को हिला दिया, क्योंकि उस समय विदेशी राजनयिकों का एक दल जम्मू कश्मीर में बदले हालात का जायजा लेने घाटी आया हुआ था।

सुरक्षा एजेंसियों को लगा कि यह हत्या सिर्फ कश्मीर में अल्पसंख्यकों को निशाना बनाने के षड्यंत्र का हिस्सा है और इसमें सिर्फ चंद स्थानीय आतंकी शामिल हैं, लेकिन यह हत्या दम तोड़ चुके आतंकी संगठन मुस्लिम जांबाज फोर्स (एमजेएफ) को कश्मीर में फिर जिंदा करने के लिए थी। इसके तार कश्मीर से लेकर गुलाम कश्मीर तक जुड़े हुए थे। शूटरों को पकड़ना जितना मुश्किल था, उनके हैंडलर को चिन्हित करना उससे भी ज्यादा कठिन, लेकिन पुलिस उपाधीक्षक (डीएसपी) सचित शर्मा ने हार नहीं मानी और उन्होंने रिकार्ड डेढ़ माह में ही इस मामले को हल कर दिया। कश्मीर में टारगेट र्किंलग का यह पहला मामला है, जिसमें शामिल सभी छह आतंकी व ओवरग्राउंड वर्कर पकड़े जा चुके हैं और इनके फरार हैंडलर के खिलाफ चालान भी पेश हो चुका है। डीएसपी सचित की इसी तत्परता, बहादुरी और कार्यकुशलता के लिए केंद्रीय गृह मंत्रालय ने उन्हें इस वर्ष स्वतंत्रता दिवस पर सम्मानित करने का फैसला किया है।

केंद्रीय गृह मंत्रालय ने सीबीआइ, आइबी, एनआइए, एनसीबी, ईडी समेत देश की विभिन्न सुरक्षा व जांच एजेंसियों और पुलिस के उन 151 अधिकारियों की एक सूची जारी की है, जिन्होंने बीते साल किसी बड़े और सनसनीखेज मामले की पूरे षड्यंत्र को उजागर करते हुए उसमें लिप्त लगभग सभी तत्वों को पकड़ा हो। जम्मू संभाग के सांबा जिला के रहने वाले डीएसपी सचित शर्मा इस सूची में दूसरे नंबर पर हैं। जम्मू कश्मीर पुलिस सेवा के 2013 बैच के अधिकारी सचित शर्मा इस समय जम्मू के गांधीनगर में एसडीपीओ हैं।

इस तरह से हमलावर आतंकियों तक पहुंची थी पुलिस, सीसीटीवी कैमरे से भी मदद : सचित शर्मा ने बताया कि आकाश मेहरा के हत्यारों को जल्द से जल्द पकड़ना चुनौतीपूर्ण था। श्रीनगर में यह वारदात मेरे ही कार्याधिकार क्षेत्र में हुई थी। सीसीटीवी की फुटेज ने हमें हत्यारों तक पहुंचने में मदद की। हमने वारदात से चंद दिन पहले घरों से लापता कुछ युवकों का पता लगाया और सीसीटीवी फुटेज का आकलन किया। इसके जरिए हम शूटर तक पहुंच गए। वह पुलवामा के काकपोरा इलाके का रहने वाला था। उसका दूसरा साथी पहलगाम का निवासी था। ये दोनों ही नाबालिग थे। इनसे पूछताछ के बाद उनके दो अन्य साथी उवैस और सोहेल फतह को भी पकड़ लिया गया, ये दोनों श्रीनगर के साथ सटे छत्तरगाम के रहने वाले थे। इन दोनों ने वारदात को अंजाम देने वाले दोनों नाबालिगों की पूरी मदद की थी।

ढाबे पर ही खाना खिलाते हुए वारदात का तरीका समझाया था : सुरक्षा एजेंसियों के लिए यह जानना जरूरी था कि वारदात की साजिश किसने और क्यों रची है, किसने इन लड़कों के हाथ में हथियार थमाए हैं। पूछताछ में आतंकियों ने बताया कि हत्या से चंद दिन पहले कोकरनाग के एक व्यक्ति ने उन्हें कृष्णा ढाबे पर ही खाना खिलाते हुए वारदात का पूरा तरीका समझाया था। इसका नाम फैयाज है और इसके अलावा एक शहबाज भी इस षड्यंत्र में शामिल था। फैयाज और शहबाज को चिह्नित करना और पकड़ना मुश्किल था। ये दोनों वारदात के लगभग डेढ़ माह बाद पकड़े गए। दोनों के फोन की काल डिटेल की भी जांच की गई।

ऐसे हमले के मास्टरमाइंड व हैंडलर का हुआ पदर्शफाश : आतंकी फैयाज और शहबाज से जब पूछताछ हुई तो पता चला कि इस हमले का जिम्मा बेशक आतंकी संगठन द रजिस्टेंस फ्रंट ने लिया था, लेकिन इसका पूरा षड्यंत्र गुलाम कश्मीर में बैठे कश्मीर के एक पुराने आतंकी सरगना मोहम्मद इकबाल उर्फ उस्मान ने रचा था। वह अनंतनाग के कोतवाल मोहल्ला का रहने वाला है और करीब 26 साल से पाकिस्तान में है। वह मुस्लिम जांबाज फोर्स का नामी कमांडर था। इसके अलावा वह यूनाइटेड जिहाद काउंसिल में सचिव भी रह चुका है। उसने ही इंटरनेट मीडिया के जरिए पहले पहलगाम और फिर काकपोरा के दोनों किशारों को बरगलाया। फिर फैयाज और शहबाज के जरिए उन्हें हथियार उपलब्ध कराए। उसने यह साजिश मुस्लिम जांबाज फोर्स को फिर से कश्मीर में खड़ा करने के लिए रची थी। अगर यह माड्यूल न पकड़ा जाता तो यह संगठन आज फिर र्से ंजदा होता। अब अदालत ने मोहम्मद इकबाल को भगोड़ा घोषित कर रखा है। 

Edited By: Rahul Sharma