जम्मू, दिनेश महाजन। नशाखोरी न केवल युवा पीढ़ी को बर्बाद कर रही, बल्कि उन्हें अपराध की दुनिया में भी धकेल रही है। नशे की लत को पूरा करने के लिए युवा अपराध का सहारा ले रहे है। इससे शहर में अपराध का ग्राफ भी बढ़ रहा है। पहले तो कई युवा शौक के लिए नशे का सेवन करते हैं। धीरे-धीरे नशे के आदी हो जाते हैं। बाद में नशे की पूर्ति के लिए भटकते हैं और अपराध की दुनिया में कदम रख देते हैं। मामूली वारदात को अंजाम देने के बाद वे संगीन अपराध करने लगते हैं। नशे की लत को पूरा करने के लिए युवा उसके अंजाम को भी नहीं सोच रहे।

नशापूर्ति के लिए की वारदातें: करीब एक माह में जम्मू पुलिस ने कई युवाओं को झपटमारी, चोरी जैसे आरोपों में गिरफ्तार किया है। पकड़े गए युवाओं ने जो खुलासा किया है उससे पुलिस अधिकारी भी चिंतित है। बीते शनिवार को एक शिक्षिका चेन झपट कर भागे युवक को पुलिस ने पकड़ा तो उसने भी बताया कि वह नशे का आदी है। लत को पूरा करने के लिए झपटमारी की। 17 सितंबर को गंग्याल और 28 अगस्त को गांधी नगर पुलिस ने चोर गिरोहों को पकड़ा था। वेयर हाउस के व्यापारी राजेंद्र गुप्ता से साढ़े नौ लाख रुपये छीनने वाले युवकों ने भी नशे की लत पूरा करने के लिए वारदात को अंजाम दिया था। पकड़े गए युवकों ने पूछताछ में स्वीकार किया था कि नशे की लत को पूरा करने के लिए अपराध का सहारा ले रहे हैं। पुलिस ने कुछ और युवाओं को पकड़ा है जो नशे की लत को पूरा करने के लिए चोरी की वारदात को अंजाम देते थे। चौंकाने वाली बात यह है कि पकड़े गए यह युवा पढ़े-लिखे और संपन्न परिवारों से हैं।

शराब के लिए तोड़ा था एटीएम : अगस्त में शहर के पॉश इलाके में एक एटीएम को तोड़ने के प्रयास में पुलिस ने दो युवकों को सीसीटीवी फुटेज के आधार पर पकड़ा था। पुलिस ने गहनता से पूछताछ की तो पता चला किा दो दोस्तों ने शराब के लिए एटीएम तोडऩे की शर्त लगाई थी। फिल्में भी किशोरों के दिल व दिमाग पर छाई हुई हैं। किशोर खुद को अपने साथियों से बेहतर दिखने की होड़ में रहते हैं। उनकी यह चाहत रहती है कि उनके पास महंगा मोबाइल, ब्रांडेड जूते व कपड़े हों, ताकि साथियों के बीच उनकी अलग पहचान बन सके। यह स्थिति किशोरों को उनके साथियों को देखकर नशा करने के लिए भी प्रेरित करती है। वह अपनी इच्छाओं की पूर्ति के लिए पहले छोटी-मोटी चोरी और फिर बड़ी घटनाएं करने लगते हैं। शहर में बढ़ी चोरी की वारदातों में अधिकतर ऐसे ही नशाखोर किशोर शामिल हैं, जो इच्छाओं की पूर्ति के लिए अपराध कर रहे हैं।

बेरोजगारी बना रही नशाखोर: मनोचिकित्सक डॉ. जगदीश थापा का कहना है कि मौजूदा समय में युवाओं को रोजगार हासिल करना आसान नहीं है। इस हाईटेक युग में युवा एक बेहतर कैरियर की तलाश में रहते हैं। अच्छी नौकरी न मिलने के कारण उन्हें बेरोजगार रहना पड़ता है। कैरियर बनाने के लिए युवा भटकता रहता है। ऐसे में कई बार वह गलत संगत में पड़ कर नशे का आदी हो जाता है। अभिभावकों को चाहिए कि अपने बच्चों के साथ दोस्ताना रिश्ते बनाएं। यदि उन्हें मनचाही नौकरी नहीं मिल रही हो तो भी उनके मनोबल को गिरने न दें। बच्चों के साथ अधिक से अधिक समय व्यतीत करें।

तस्करों पर सका शिकंजा: वर्ष 2018 में जम्मू पुलिस ने 350 लोगों को मादक पदार्थ की तस्करी के आरोप में दबोचा था, इस वर्ष के पहले आठ माह के भीतर 340 लोगों को पकड़ा गया है। इस दौरान प्रतिबंधित नशीली दवाइयों को बेचने वाले आठ दवा विक्रेताओं के लाइसेंस रद करवाए गए हैं।

खोला है डी एडिक्शन सेंटर: जम्मू-कठुआ रेंज के डिप्टी इंस्पेक्टर जनरल ऑफ पुलिस विवेक गुप्ता का कहना है कि जम्मू पुलिस अपने सामजिक दायित्व को निभाते हुए ड्रग डी एडिक्शन सेंटर चला रही है। इसके जरिये कई युवाओं को मौत के मुंह से खींच कर वापस लाया गया है। उन्होंने कहा कि अभिभावकों को अपने बच्चों की गतिविधियों और उनके दोस्तों के बारे में जानकारी होनी चाहिए। नशे के आदी जिन लोगों को पुलिस ने पकड़ा था, उनकी मनोचिकित्सक से काउंसलिंग भी करवाई गई है।

Posted By: Rahul Sharma

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