किश्तवाड़, जेएनएन। जम्मू-कश्मीर पुलिस द्वारा मंगलवार को किश्तवाड़ जेल के ऊपर मंडराते हुए जब्त किया गया ड्रोन रैकी के लिए नहीं बल्कि शादी समारोह की रिकार्डिंग के लिए लाया हुआ था। ड्रोन वाइफाइ रेंज से बाहर होकर जेल के ऊपर हो गया और टावर से टकराकर नीचे गिर गया। यह बात मीडिया में आने के बाद क्षेत्र के एक युवक ने स्वयं पुलिस स्टेशन में आकर यह बात कबूल की कि यह ड्रोन उसका है और उसने यह जेल की रैकी के लिए नहीं बल्कि घर में आयोजित होने वाले शादी समारोह की रिकार्डिंग के लिए लाया था।

यह खुलासा एसपी किश्तवाड़ शक्ति पाठक ने वीरवार को पत्रकारों से कही। उन्होंने घटना का खुलासा करते हुए कहा कि 16 वर्षीय युवक सुहेल और उसके तीन दोस्त चौगान ग्राउंड में ड्रोन उड़ाने की प्रेक्टिस कर रहे थे। ड्रोन वाइफाइ के रेंज से बाहर हो गया और अनियंत्रित होकर ग्राउंड से बाहर रिहायशी इलाके की ओर चला गया। सुहेल व उसके दोस्तों ने ड्रोन को ढूंढ उसे फिर से मोबाइल रेंज में लाने का प्रयास किया परंतु वह दिखना बंद हो गया। उन्हें लगा कि ड्रोन घूम हो गया है परंतु उन्हें यह नहीं पता था कि वह किश्तवाड़ जिला जेल के ऊपर से होते हुए उसके टावर से टकराकर जेल में ही गिर गया है।

एसपी ने बताया कि उन्हें यह बात अगले दिन तब पता चली जब ड्रोन का किस्सा उन्होंने सोशल मीडिया व समाचारों में पढ़ा। वह डीएसपी सज्जाद के पास गए और उन्होंने यह बात कबूली की कि यह ड्रोन कैमरा उनका है। पाठक ने बताया कि ड्रोन को देखकर पुलिस पहले ही यह भांप गई थी कि यह ड्रोन किसी अन्य कार्य के इस्तेमाल केे लिए लाया गया है परंतु यह मामला उस समय संवेदनशील हो गया जब ड्रोन जेल पर मंडराने के बाद नीचे गिरा।

उन्होंने कहा कि शादी समारोह के लिए लाए जाने वाले ड्रोन की जानकारी संबंधित पुलिस स्टेशन में दी जानी होती है। सुहेल ने एेसा नहीं किया। किश्तवाड़ जेल में कई कुख्यात आतंकवादी कैद हैं। किश्तवाड़ में पिछले एक साल के भीतर हुए आतंकी हमलों ने इस घटना को गंभीर बना दिया। यही वजह है कि पुलिस ने क्षेत्र में घेराबंदी कर तलाशी अभियान भी चलाया।

भारत सरकार ने ड्रोन को गैर-सरकारी कामों के लिए बैन किया है। केंद्र ही नहीं जम्मू-कश्मीर सरकार को लगता है कि ड्रोन कैमरा आतंकी गतिविधियों में बहुत आसानी से इस्तेमाल किए जा सकता। इसी वजह से इसे खरीदने व इस्तेमाल के लिए पुलिस व डायरेक्टोरेट जनरल आफ सिविल एविएशन (डीजीसीए) की अनुमति लेना बहुत जरूरी है। बिना अनुमति किसी गलत जगह ड्रोन उड़ाना आपको जेल की हवा भी खिला सकता है। डीजीसीए ने ड्रोन उड़ाने और इस्तेमाल करने वालों के लिए कुछ नियम लागू किए हैं जो  इस प्रकार है। 

  • - ड्रोन जिनका वजन 250 ग्राम से 2 किलो के बीच है। कैमरा ऑपरेट करते हैं, उनकी जानकारी स्थानीय पुलिस स्टेशन में देना अनिवार्य है। यही नहीं उसे उड़ाने के लिए पुलिस की परमीशन भी लेनी होती है।
  • - जिन ड्रोन का वजन 2 किलो से ज्यादा होता है या फिर जो 200 फिट से ज्यादा ऊंचाई पर उड़ सकते हैं। उनकी जानकारी पुलिस स्टेशन के साथ-साथ डीजीसीए में देना अनिवार्य है। उनके लिए लाइसेंस भी लेना होता है और फ्लाइट प्लान देना होता है।
  • - 25 किलो से ऊपर वाले ड्रोन तो आप बिना डीजीसीए की अनुमति के उड़ा ही नहीं सकते। पकड़े जाने पर आपके खिलाफ मामला दर्ज व सजा भी हो सकती है।
  • - रिहायशी इलाकों में आप बिना अनुमति ड्रोन नहीं उड़ा सकते। एयरपोर्ट या हैलिपैड के 5 किलोमीटर के आस-पास ड्रोन उड़ाना दंडनीय अपराध है।
  • - सरकारी आफिस, सेना कैंप, इंटरनेशनल बॉर्डर से 50 किलोमीटर के अंदर, नेशनल पार्क, पब्लिक स्पाट, वाइल्डलाइफ सेंचुरी आदि में भी आप ड्रोन नहीं उड़ा सकते।
  • - ड्रोन एक लाइसेंस प्लेट के साथ उड़ाएं जिनमें आपरेटर का नाम, उनका कांटेक्ट नंबर, पता आदि लिखा होना चाहिए। अपने ड्रोन को उसी सीमा तक उड़ाएं जहां तक देखा जा सके।
  • - सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि ड्रोन उड़ाने वाला कम से कम 18 साल या उससे ऊपर का होना चाहिए।

 

Posted By: Rahul Sharma

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