जम्मू, राज्य ब्यूरो। प्रधानमंत्री कार्यालय के राज्यमंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने कांग्रेस पर दोगली राजनीति करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि महाराजा हरि सिंह की हिमायती बन रही कांग्रेस ने ही महाराजा को जम्मू कश्मीर से निकलवाया था। महाराजा को नकारने वाली यह पार्टी अब उन्हें सम्मानित करने की बातें कर रही हैं।

महाराजा की जयंती पर दिल्ली में आयोजित सेमिनार में डॉ. जितेंद्र सिंह ने गुलाम कश्मीर को वापस लेने का दावा करते हुए कहा कि जम्मू कश्मीर की पुरानी बाउंड्री को बहाल कर महाराजा के सपने को साकार किया जाएगा।

नेहरू के दबाव में महाराजा को जम्मू छोड़ने को मजबूर किया गया

जम्मू-कश्मीर को देश का अभिन्न अंग बनाने के लिए महाराजा की भूमिका की सराहना करते हुए भाजपा नेता ने कहा कि जवाहर लाल नेहरू के दबाव में महाराजा को जम्मू कश्मीर छोड़ने के लिए मजबूर किया गया। महाराजा को मुंबई भेजने के लिए 10 जून 1949 को रेलगाड़ी में बिठाया गया था। उस समय महाराजा के करीबी भी साथ छोड़ गए थे। वह इस उम्मीद के साथ रवाना हुए थे कि एक दिन वापस जम्मू कश्मीर आएंगे। अकेलेपन में जब मुंबई में उनका निधन हुआ तो जम्मू में लोग परेशान हो गए कि अब अफसोस जताने के लिए किसके पास जाएं। बाद में दुख का इजहार करने के लिए वे पंडित प्रेमनाथ डोगरा के घर गए।

दूरदर्शी व्यक्ति थे महाराजा हरि सिंह

महाराजा को दूरदर्शी व्यक्ति करार देते हुए जितेंद्र सिंह ने कहा कि राज्य की बेहतरी के लिए उन्होंने हर संभव कदम उठाए। वह एक अच्छे शासक थे। यही कारण है कि जम्मू कश्मीर में कभी सांप्रदायिक दंगे नहीं हुए। महाराजा सांप्रदायिक सौहार्द के प्रतीक थे। उनके जाने के बाद राज्य में ऐसे हालात बनाए गए, जिनका खामियाजा आज तक भुगतना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस को जवाब देना चाहिए कि जवाहर लाल नेहरू जम्मू कश्मीर के मसले को क्यों संयुक्त राष्ट्र संघ ले गए थे। जम्मू कश्मीर में अनुच्छेद 370 हटाने के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की सराहना करते हुए जितेंद्र सिंह ने कहा कि इसके खात्मे के लिए जम्मू कश्मीर में कई आंदोलन हुए। डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने अपनी कुर्बानी दी।

Posted By: Rahul Sharma

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