जम्मू, जागरण संवाददाता। वरिष्ठ साहित्यकार व कला संस्कृति एवं भाषा अकादमी से अतिरिक्त सचिव संपादन डॉ. ज्ञान सिंह को पढ़ने-लिखने का शौक तो है, लेकिन लॉकडाउन के दौरान कुकिंग का शौक सिर चढ़कर बोल रहा है।

डॉ. सिंह ने कहा कि खाना बनाना उन्हें शुरू से ही अच्छा लगता है, लेकिन कभी समय नहीं मिलता था। सेवानिवृत्त होने के बावजूद वह व्यस्त रहे। इन दिनों कोरोना के चलते अपने आपको पूरी तरह से लॉकडाउन किया है। इसलिए जब भी समय लगता है रसोई में अपनी मर्जी के व्यंजन बनाने लगता हूं। नानवेज अच्छा बना लेता हूं, लेकिन लॉकडाउन के चलते परहेज चल रहा है। घर वालों को मेरे इस हुनर का पता भी अभी चला है। सभी हैरान थे कि मैं सभी बेहतर खाना और लजीज व्यंजन बना सकता हूं पहले तो रसोई में जाने नहीं देते थे। एक दो बार मेरे हाथ के व्यंजन चख लेने के बाद डिमांड होने लगती है। अच्छा लग रहा है। रसोई में कुछ समय बिताने के उपरांत पढ़ने लिख लेता हूं। दोस्तों, परिवार के सदस्यों, रिश्तेदारों से भी फोन पर खूब बातें हो रही हैं। इस दौरान कई ऐसे दोस्तों से बातें हुई हैं, जिनसे व्यस्तता के चलते लंबे अर्से से बातें नहीं हो सकी थी। डॉ. ज्ञान 35 पुस्तकों का संपादन कर चुके हैं।

ज्योफ्रे की कहानी जीवन के यथार्थ का चित्रण

दिल्ली यूनिवर्सिटी से इंग्लिश ऑनर्स कर रही कायनात सहगल का कहना है कि इन दिनों कोरोना वायरस के चलते वह घर में ही कैद हो कर रह गई हैं। ऐसे हालात में घर से निकलने की तो सोच भी नहीं सकते। बिना मतलब के घर से निकलने की कोशिश भी नहीं करनी चाहिए। ऐसे में जब कि करने को कुछ नहीं है तो पढ़ने के अलावा कोई काम भी नहीं है। इन दिनों मैं इंग्लैंड के प्रसिद्ध साहित्यकार कवि ज्योफ्रे चासर के कहानी संग्रह कैंटरबरी टेल्स पढ़ रही हूं। किताब पढ़ते हुए सोचती हूं कि क्या कमाल के लेखक थे।

कहानियां में जीवन के यथार्थ का चित्रण किया गया है। हर कहानी को पढ़ने के बाद लगता है जैसे साहित्य को नई दिशा दी गई हो। हर कहानी की विविधिता भी प्रभावित करने वाली है। कैंटरबरी टेल्स की कहानियों को पढ़ने के बाद तो मैं कहूंगी, हमें अगर साहित्य पढ़ने का शौक हो तो विभिन्न भाषाओं, क्षेत्रों के साहित्यकारों को पढ़ना चाहिए। पिछले वर्ष तमिल साहित्य के बारे में पढ़ने को मिला। उस साहित्य का अध्ययन करते हुए कुछ दिन तो लगा जैसे हम किसी विभिन्न संस्कृति के बारे में पढ़ रहे हैं। लेकिन कुछ दिनों में इस साहित्य की गहनता का अहसास हुआ।

अब अंग्रेजी लेखकों को पढ़ने लगी हूं तो लगता है कि उनकी सोच ही कुछ और है। मैं तो कहूंगी की हर पुस्तक ज्ञान का भंडार होती है। हमें पढ़ने की आदत डालनी चाहिए। खासकर लॉकडाउन के इस मौके का लाभ उठाते हुए हमें कम से दिन में एक दो कविताएं, कहानियां चाहे किसी भी भाषा में हों पढ़ लेनी चाहिए। मेरे को लगता है कि साहित्य सही में समाज का दर्पण होता है। 

Posted By: Rahul Sharma

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