श्रीनगर, राज्य ब्यूरो। नेशनल कांफ्रेंस के अध्यक्ष और श्रीनगर के सांसद डाॅ फारुक अब्दुल्ला की नए साल के आगमन पर रिहाई की उम्मीद फिलहाल टल गई है। सामान्य परिस्थिति में वह अब मार्च 2020 में ही रिहा होंगे, क्योंक केंद्र शासित जम्मू कश्मीर राज्य प्रशासन ने जन सुरक्षा अधिनियम के पीएसए के तहत उनकी कैद को एक बार फिर तीन माह के लिए बढ़ा दिया है। जन सुरक्षा अधिनियम 1978 को डाॅ फारुक के पिता तत्कालीन मुख्यमंत्री स्व शेख माेहम्मद अब्दुल्ला ने ही लागू किया था।इस कानून के तहत किसी भी व्यक्ति को बिना सुनवाई अधिकतम दो साल तक बंदी बनाकर रखा जा सकता है।

तीन जम्मू कश्मीर के मुख्यमंत्री रहे चुके डाॅ फारुक अब्दुल्ला को पांच अगस्त 2019 को जम्मू कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम 2019 को लागू किए जाने से पूर्व चार अगस्त की मध्यरात्रि को प्रशासन ने एहतियात के तौर उनके घर में नजरबंद कर दिया था। अलबत्ता, राज्य प्रशासन ने उन्हें शांति व कानून व्यवस्था के लिए खतरा बताते हुए 15 सितंबर को पीएसए के तहत बंदी बनाया था।

डाॅ फारुक अब्दुल्ला को शुरु में 12 दिन की अवधि के लिए पीएसए के तहत बंदी बनाया था। इसके बाद सितंबर माह के अंतिम सप्ताह के दौरान उन पर पीएसए की अवधि को तीन माह के लिए बढ़ाया गया था। सूत्रों के अनुसार, जम्मू-कश्मीर उच्च न्यायालय के पूर्व जज जनक राज कोतवाल की अध्यक्षता वाले पीएसए समीक्षा सलाहकार बोर्ड की सलाह पर गृह विभाग ने उनके पीएसए की अवधि को एक बार फिर तीन माह के लिए बढ़ाए जाने को मंजूरी दी है।

 82 वर्षीय डाॅ फारुक अब्दुल्ला हृदयरोगी हैं। उनकी किडनी का भी प्रत्यारोपण हुआ है। इसके अलावा वह शुगर से भी ग्रसित हैं। उन्हें गुपकार स्थित उनके घर में ही कैद किया गया है। गृह विभाग ने उनके घर को एक सबसाईडरी जेल का दर्जा दे रखा है। यहां यह बताना असंगत नहीं होगा कि डाॅ फारुक अब्दुल्ला के पुत्र और राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला को भी चार अगस्त को ही प्रशासन ने एहतियातन हिरासत में लिया था। उमर अब्दुल्ला अपने पिता से करीब डेढ़ किलोमीटर दूर हरि निवास में बंद हैं। 

Posted By: Rahul Sharma

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