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200 डंपिंग प्वाइंट खत्म किए; 4 तालाबों को भी दी नई जिंदगी, महिला अफसर ने ऐसे बदली जम्मू शहर की तस्वीर

Published: Sat, 17 Oct 2026 07:00 AM (IST)

जम्मू नगर निगम की वेटरनरी असिस्टेंट सर्जन डॉ. दिव्या शर्मा ने शहर की स्वच्छता और पशु कल्याण के लिए महत्वपूर्ण ...और पढ़ें

डॉ. दिव्या ने जम्मू में खत्म कराए 200 डंपिंग प्वाइंट।

डॉ. दिव्या ने जम्मू में खत्म कराए 200 डंपिंग प्वाइंट।

HighLights

  1. डॉ. दिव्या शर्मा ने जम्मू में स्वच्छता अभियान का नेतृत्व किया।

  2. 40 महिलाओं की टीम ने 200 डंपिंग प्वाइंट खत्म किए।

  3. शहर के चार ऐतिहासिक तालाबों का सफलतापूर्वक जीर्णोद्धार किया।

अंचल सिंह, जम्मू। जम्मू की मिट्टी में पली-बढ़ी डॉ. दिव्या शर्मा के भीतर समाज के लिए कुछ कर गुजरने का जज्बा बचपन से ही था। उन्होंने शेर-ए-कश्मीर यूनिवर्सिटी आफ एग्रीकल्चरल साइंसेज एंड टेक्नोलाजी से वेटरनरी साइंसेज में स्नातक और स्नातकोत्तर की पढ़ाई पूरी की। जम्मू-कश्मीर सरकार के साथ 12 वर्षों से अधिक के सेवाकाल के बाद जब वे जम्मू नगर निगम में वेटरनरी असिस्टेंट सर्जन बनीं, तो उनके सामने सिर्फ सरकारी दायित्व नहीं, बल्कि अपने शहर को संवारने का बड़ा कैनवास था।

पशु स्वास्थ्य प्रबंधन और जन-स्वास्थ्य में लंबे फील्ड अनुभव के कारण वे समझती थीं कि शहर की स्वच्छता, पशु कल्याण और मानव स्वास्थ्य आपस में गहराई से जुड़े हैं। शहर के नुक्कड़ों पर पसरी गंदगी और दम तोड़ते जलस्रोत उन्हें कचोटते थे, जिसके बाद उन्होंने दफ्तर की सीमाओं से निकलकर सीधे जमीन पर उतरने का फैसला किया।

उनका बचपन किश्तवाड़ में गुजरा है। बचपन से ही समाज के लिए कुछ कर गुजरने की ललक अब पूरी हो रही है। वह मूलत: किश्तवाड़ की निवासी हैं और पिछले 15 सालों से जम्मू में रह रही हैं।

नारी शक्ति और जन-जागरूकता का महाअभियान

मूल दायित्वों के साथ-साथ डा. दिव्या जम्मू नगर निगम में सूचना, शिक्षा एवं संचार प्रभारी की कमान भी संभाल रही हैं। उनका मानना था कि कोई भी बड़ा बदलाव जन-भागीदारी के बिना संभव नहीं है। इस सोच के साथ उन्होंने 40 स्थानीय महिलाओं को जोड़कर एक समर्पित टीम बनाई।

आईईसी प्रभारी के रूप में उन्होंने पशु स्वास्थ्य, स्वच्छता और निगम के अभियानों को घर-घर पहुंचाया। यह महिला टोली हर सुबह मोहल्लों में निकलकर परिवारों से सीधा संवाद करती। उन्होंने लोगों को समझाया कि खुले में कचरा फेंकना न केवल शहर की छवि बिगाड़ता है, बल्कि बेजुबान मवेशियों और जन-स्वास्थ्य के लिए भी घातक है। घरों का कचरा केवल निगम के वाहनों को सौंपने की यह अपील जल्द ही एक जन-आंदोलन में बदल गई।

खत्म हुए 200 डंपिंग प्वाइंट, तालाबों को मिला नया जीवन

इस निरंतर संवाद और व्यवहार परिवर्तन का असर जल्द ही सड़कों पर दिखा। डा. दिव्या और उनकी टीम के प्रयासों से जम्मू शहर के करीब 200 ऐसे मुख्य डंपिंग प्वाइंट पूरी तरह खत्म हो गए, जहां दशकों से कूड़े के अंबार लगे रहते थे।

स्वच्छता की इस मुहिम को आगे बढ़ाते हुए उन्होंने अप्पर दरमाल, लोअर दरमाल, मुट्टी और पक्की ढक्की के चार बड़े ऐतिहासिक तालाबों के जीर्णोद्धार का बीड़ा उठाया। महीनों की कड़ी मशक्कत से इन जलस्रोतों से टन भर प्लास्टिक, कचरा और गाद हटाई गई। नतीजतन, शहर की ये उपेक्षित धरोहरें फिर से स्वच्छ जल से लबालब होकर इंसानों और मवेशियों दोनों के लिए उपयोगी बन गईं।

अनवरत जारी बदलाव का सफर

चार तालाबों के कायाकल्प और म्यूनिसिपल वेटरनरी सेवाओं को मजबूत करने के बाद भी डॉ. दिव्या का मिशन जारी है। 12 वर्षों के प्रशासनिक अनुभव से लैस होकर वे आज भी शहर को स्वच्छ और संवेदनशील बनाने में जुटी हैं। उन्होंने साबित किया है कि वैज्ञानिक सोच, सेवा-भाव और नारी शक्ति का मेल किसी भी शहर की तस्वीर बदल सकता है।