जम्मू, अशोक शर्मा। सभ्यताओं का संगम हो या ऐतिहासिक बेशकीमती मुद्राएं। हर दौर की यादें हों या फिर इतिहास को प्रमाणित करते साक्ष्य। संग्रहालय में स्वर्णिम इतिहास से लेकर वर्तमान तक का सफर करने का मौका मिलता है। इस हाईटेक युग में भी बेशक हर चीज पूर्ण जानकारी के साथ हमें मोबाइल पर भी मिल सकती है लेकिन जो मजा संग्रहालय में जाकर इतिहास समेटे चीजों को देखने और समझने का है, उसका आज भी कोई मुकाबला नहीं।

हर किसी की चाहत होती है कि वह अपने पूर्वजों की यादों को संजो कर रखे। यह चीजें पीढ़ी दर पीढ़ी लोगों तक पहुंचें, इसके लिए संग्रहालय बनाए गए। दुनिया भर के संग्रहालयों में हमारे पूर्वजों की अनमोल यादों का खजाना है। जम्मू का डोगरा आर्ट म्यूजियम भी ऐसे ऐतिहासिक, पौराणिक, सांस्कृतिक महत्व के 7500 महत्वपूर्ण कलाकृतियों का भंडार है। विडंबना यह है कि जगह की कमी के कारण मात्र 2500 के करीब ही कलाकृतियां डिस्प्ले हो पाती हैं। डोगरा आर्ट म्यूजियम में जगह की कमी के कारण पांच हजार के करीब कृतियों को प्रदर्शित ही नहीं किया जा सकता। हालांकि संग्रहालय की कोशिश रहती है कि बीच-बीच में सामग्री बदली जाएं लेकिन इसका पर्यटकों या एक दो बार म्यूजियम देखने वालों को कोई लाभ नहीं होता। यह देखते हुए कि डोगरा आर्ट म्यूजियम की इमारत के जीर्णोद्धार की जरूरत है।

अब डोगरा आर्ट म्यूजियम को राजाओं के समय के आर्मी हेडक्वार्टर, जिसे ओल्ड हाई कोर्ट कांप्लेक्स कहा जाता है, में शिफ्ट किए जाने का निर्णय लिया गया है। हाईकोर्ट कांप्लेक्स का जीर्णाेद्धार वर्ष 2011 का पूरा हो चुका है। यह काफी बड़ा कांप्लेक्स है। संग्रहालय वहां शिफ्ट होने से डोगरा आर्ट म्यूजियम की सभी सामग्री का तरीके से डिस्प्ले हो सकेगा। जम्मू के लोग वर्षो से डोगरा आर्ट म्यूजियम का विस्तार करने एवं हाई कोर्ट कांप्लेक्स को भी संग्रहालय बनाने की मांग करते रहे हैं।

म्यूजियम का विस्तार जरूरीः डोगरा सदर सभा के अध्यक्ष पूर्व मंत्री गुलचैन सिंह चाढ़क ने डोगरा आर्ट म्यूजियम के विस्तार की जरूरत पर बल देते हुए कहा कि उन्हें हाल ही में उपराज्यपाल के सलाहकार बसीर खान ने विश्वास दिलवाया है कि जल्द म्यूजियम को हाई कोर्ट कांप्लेक्स में शिफ्ट किया जाएगा। इस समय डोगरा आर्ट म्यूजियम की इमारत के जीर्णोद्धार की जरूरत है। हाई कोर्ट कांप्लेक्स में शिफ्ट होने से करोड़ों रुपये की मिनियेचर पेंटिंग भी डिस्प्ले हो सकेंगी। इस समय म्यूजियम के पास सैकड़ों ऐसी कलाकृतियां हैं, जिन्हें जगह की कमी के कारण डिस्प्ले ही नहीं किया जाता। चाढ़क ने बताया कि उन्होंने तोशाखाना के स्ट्रांग रूम में बंद पड़ी बेशकीमती डोगरा विरासत को भी हाईकोर्ट कांप्लेक्स में शिफ्ट करने की मांग की है। अगर तरीके से डोगरा आर्ट म्यूजियम का विस्तार हो तो यह पर्यटकों के आकर्षण का मुख्य केंद्र बन सकता है।

देश के पहले राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने किया था उद्घाटनः डोगरा आर्ट गैलरी का उद्घाटन देश के पहले राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने 28 मई 1954 को गांधी भवन जम्मू में किया था। वहां से म्यूजियम को वर्ष 1991 में इसे अपग्रेड कर ऐतिहासिक मुबारक मंडी स्थित ¨पक मार्बल हाल में शिफ्ट किया गया। इसका उद्घाटन तत्कालीन राज्यपाल गिरिश चंद्र सक्सेना ने 25 जनवरी 1991 में किया। इस म्यूजियम का फाउंटेन हाल अपने आप में आकर्षित करने वाला है। डोगरा शासकों के समय बने इस हाल को वातानुकुलित हाल कहा जाता है। खूबी यह है कि पूरी इमारत में कोई एसी न होने के बावजूद ऐसा लगता कि वातानुकूलित इमारत में प्रवेश कर लिया हो। इस मार्बल हाल को देख लोग यहां प्रदर्शित वस्तुओं के बजाय इसके वास्तु को देखकर चकित रह जाते हैं।

दुर्लभ पांडुलिपियों का संग्रह है यहांः  सहायक निदेशक पुरातत्व, अभिलेखागार एवं डोगरा संग्रहालय डॉ. संगीता शर्मा म्यूजियम की इंचार्ज हैं। उन्होंने बताया कि म्यूजियम में चार गैलरियां हैं। इनमें पिंक हाल, मास्टर संसार चंद आर्ट गैलरी, मार्बल हाल, फाउंटेन हाल शामिल हैं। हमारे पास बसोहली लघु चित्रकला, जम्मू चित्रकला, कांगड़ा चित्रकला की बहुमूल्य 702 कलाकृतियां हैं, जिनमें से मात्र 50 कलाकृतियों को ही प्रदर्शित किया गया है। अगर जगह हो तो पांच हजार के करीब और कलाकृतियों को प्रदर्शित किया जा सकता है। डोगरा आर्ट म्यूजियम में दुर्लभ पांडुलिपियों का शानदार संग्रह है। इसके अलावा शाहनामा, सिकंदरनामा, भोज पत्र, ताड़ पत्र, दुर्गा पूजा तोप, डोगरा आभूषण, अस्त्र-शस्त्र, मुगलकालीन, कुषाण काल के समय के प्राचीन सिक्के हैं। डोगरा राजाओं महाराजा गुलाब सिंह, महाराजा रणवीर सिंह, महाराजा प्रताप सिंह, महाराजा हरि सिंह के पोट्रेट के अलावा मार्डन आर्ट एवं कई महत्वपूर्ण चीजें डोगरा संग्रहालय को महत्वपूर्ण बनाती हैं।

इसलिए मनाया जाता है दिवसरः विश्व संग्रहालय दिवस प्रतिवर्ष देश और दुनिया में मनाया जाता है। 18 मई 1983 को संयुक्त राष्ट्र ने संग्रहालय की विशेषता एवं महत्व को समझते हुए अंतरराष्ट्रीय संग्रहालय दिवस मनाने का निर्णय लिया था। इसका मूल उद्देश्य जनसामान्य में संग्रहालयों के प्रति जागरूकता और उनके कार्यकलापों के बारे में जागृति लाना है।

 

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