जम्मू, नवीन नवाज । केंद्र शासित (यूटी) जम्मू कश्मीर की राजभाषा उर्दू रहेगी या हिंदी। फिलहाल बदल चुकी राजनीतिक और प्रशासनिक व्यवस्था के बीच जम्मू कश्मीर की सरकारी भाषा उर्दू के भविष्य को लेकर सबसे ज्यादा चर्चा हो रही है। इस बारे में अभी तक केंद्र सरकार या जम्मू कश्मीर प्रशासन ने अंतिम फैसला नहीं लिया है। अलबत्ता, उर्दू को लेकर सियासत जरूर होगी और मजहब का मुद्दा उठेगा जिससे निपटना प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती होगा।

एक से अधिक भाषा हो सकती हैं राजभाषा :

जम्मू कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम 2019 के तहत एकीकृत जम्मू कश्मीर दो केंद्र शासित राज्यों जम्मू कश्मीर व लद्दाख में विभाजित हो चुका है। दोनों केंद्र शासित राज्यों की प्रशासनिक व्यवस्था अलग है। जम्मू कश्मीर में अब सभी केंद्रीय कानून लागू हो चुके हैं। पुनर्गठन अधिनियम की धारा 47 के तहत जम्मू कश्मीर नई विधानसभा राज्य में विभिन्न भाषाओं में से किसी एक को या एक से ज्यादा भाषाओं को सरकारी कामकाज का हिस्सा बना सकती है।

उर्दू में होता आ रहा सरकारी कामकाज :

एकीकृत जम्मू कश्मीर की सरकारी भाषा उर्दू थी। सभी सरकारी कामकाज भी उर्दू में ही होता आया है। जमीन-जायदाद से संबंधित सभी सरकारी दस्तावेज और कार्रवाईयां उर्दू भाषा में होती हैं। पुलिस और अदालतों में भी सारा रिकॉर्ड उर्दू में होता है। ये सभी दस्तावेज अंग्रेजी में जारी किए जाते हैं। एकीकृत जम्मू कश्मीर की राज्य विधानसभा की कार्यवाही व अन्य सरकारी गतिविधियों का रिकॉर्ड भी उर्दू भाषा में दर्ज होता है जिसे अंग्रेजी भी लिखा जाता रहा है या अंग्रेजी में उसका अनुवाद किया जाता रहा है। सभी सरकारी स्कूलों में विशेषक कश्मीर और जम्मू के मुस्लिम बहुल इलाकों में उर्दू ही शिक्षा का माध्यम है।

कइयों की जज्बातों पर चोट होगी :

कश्मीर के वरिष्ठ साहित्यकार हसरत गड्डा ने कहा कि उर्दू पूरे जम्मू कश्मीर की तहजीब में रची बसी हुई है। उर्दू भाषा को नहीं बदला जाना चाहिए। इससे कइयों की जज्बातों पर चोट होगी, पूरे निजाम पर असर होगा। उर्दू किसी मजहब विशेष की जुबान नहीं ही है, लेकिन इसे अब मजहब के साथ जोड़ दिया है। अगर उर्दू के साथ किसी तरह की छेड़खानी होती है तो यहां सियासत खूब होगी। जम्मू संभाग के कुछेक जिला को छोड़ दें तो अन्य सभी जिलों में उर्दू ही प्रमुख भाषा है।

राजस्व विभाग में ही होगी दिक्कत :

राजस्व विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी रमन कुमार शर्मा ने कहा कि सबसे ज्यादा दिक्कत राजस्व विभाग में ही होगी। नायब तहसीलदार और पटवारी तक ही करीब 10 हजार अधिकारी हैं। यह सभी उर्दू में ही काम करते हैं। हिंदी को लागू करने से काम ठप हो सकता है। जम्मू में हिंदी भाषी जिलों के रहने वालों को दिक्कत नहीं होगी, लेकिन अन्य जिलों से संबंधित राजस्व कर्मियों को मुश्किल होगी। उन्हें हिंदी सिखाने में पांच-छह साल लग जाएंगे।

प्रशासन दृढ़ इच्छाशक्ति का परिचय : हिंदी विभाग

जम्मू विश्वविद्यालय मेंं हिंदी विभाग की प्रोफेसर नीलम सर्राफ ने कहा कि हिंदी को जम्मू कश्मीर राजभाषा बनाना और इसे पूरी तरह कार्यान्वित कराना कोई मुश्किल नहीं है। सिर्फ प्रशासन को अपनी दृढ़ इच्छाशक्ति का परिचय देना है। हिंदी  को जम्मू कश्मीर की सरकारी भाषा बनाकर जम्मू कश्मीर को भारतीय मुख्यधारा में पूरी तरह सम्माहित करेंगे। जम्मू कश्मीर में अधिकांश लोग ङ्क्षहदी जानते हैं।

ऊर्दू को 1889 के आसपास सरकारी भाषा बनाया था :

जम्मू कश्मीर में उर्दू को सरकारी भाषा डोगरा शासकों ने वर्ष 1889 के आस-पास बनाया था। इससे पूर्व कश्मीर में सरकारी भाषा और सरकारी कामकाज फारसी में होता था। वर्ष 1947 में भारत में विलय के बाद भी उर्दू ही जम्मू कश्मीर की सरकारी भाषा रही। 1962 के बाद जम्मू कश्मीर में उर्दूं भाषा का सरकारी स्तर पर इस्तेमाल कुछ घटा, क्योंकि अखिल भारतीय सेवा कैडर के राज्य में आने वाले अधिकारी उर्दू नहीं जानते थे। वह अंग्रेजी को ही ज्यादा प्रोत्साहित करते थे। इसक कारण सरकारी कार्यालयों में अंग्रेजी का प्रभाव बढ़ता गया।

क्षेत्रीय राजनीतिक पार्टियां खेलेंगी खेल :

कश्मीर के वरिष्ठ पत्रकार आसिफ कुरैशी ने कहा कि मेरे ख्याल से जम्मू कश्मीर में भाषा बड़ा सियासी मुद्दा बनेगी। जम्मू कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम के लागू होने के बाद नेशनल कांफ्रेंस, पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी,पीपुल्स कांफ्रेंस जैसे संगठनों के लिए यह बड़ा मुददा हो सकती है। अगर ऐसी सियासत हुई तो उसका यहां के हालात पर नकारात्मक असर होगा।

हिंदी ही हो सकती है राजभाषा :

पूर्व राज्यपाल सत्यपाल मलिक की सलाहकार परिषद में सलाहकार रहे फारूक अहमद खान ने कहा कि इस विषय में पुनर्गठन अधिनियम पूरी तरह स्पष्ट है। हिंदी राष्ट्रीय भाषा है, इसलिए यह केंद्र शासित जम्मू कश्मीर की राजभाषा हो सकती है। उर्दू को भी उसका हक मिलेगा। अंग्रेजी का पहले की तरह इस्तेमाल होगा। राज्य की सभी भाषाओं का पूरा सम्मान होगा।

Posted By: Rahul Sharma

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