जागरण संवाददाता, कठुआ: पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) दिलबाग सिंह ने कहा कि पाकिस्तान के बहकावे में आतंकी बने कश्मीर के युवा भी अब आतंकवाद को सिर्फ बर्बादी का रास्ता मान चुके हैं। आतंकी संगठनों की हकीकत से रूबरू होने के बाद वह इस बात को अच्छे से समझने लगे हैं। इसीलिए अब वह आत्मसमर्पण कर मुख्यधारा में लौटकर सामान्य जिंदगी जीना चाहते हैं। इससे उम्मीद जताई जा सकती है कि आने वाला समय जम्मू कश्मीर में अमन और शांति का होगा।

कठुआ में आयोजित पुलिस शहीदी क्रिकेट प्रतियोगिता के समापन समारोह के बाद दिलबाग सिंह ने कहा कि जम्मू कश्मीर पुलिस ने पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद को लगभग समाप्त कर दिया है। जो कुछ बचा है, उसे भी जल्द खत्म कर दिया जाएगा। पाकिस्तान और आतंकियों के बहकावे में आए कश्मीर के युवा भी अब पुलिस के प्रयास से घरों को लौट रहे हैं। यहां तक कि मुठभेड़ के दौरान भी आतंकियों ने हथियारों सहित आत्मसमर्पण किया है। कश्मीर में ऐसे तकरीबन 10 बड़े उदाहरण हैं। कश्मीर के युवा आतंकवाद को सिर्फ बर्बादी का रास्ता मान चुका हैं। हिसा की राह पर निकले युवा भी इस बात को अच्छे से समझने लगे हैं। इसीलिए अब वह मुख्यधारा में लौटकर सामान्य जिंदगी जीना चाहते हैं।

डीजीपी ने कहा कि जब हम शहीदों को समर्पित आयोजन करते हैं तो आंखें भर आती हैं। गत वर्ष पुलिस के 15 और अर्धसैनिक बलों के 46 जवानों ने बलिदान दिया है। उन्होंने बताया कि गत वर्ष 225 आतंकी अलग-अलग मुठभेड़ में मारे गए। इसके अलावा 50 आतंकी और 600 ओजीडब्ल्यू पकड़े गए हैं। कश्मीर में कोरोना संक्रमण के चलते लगे प्रतिबंधों में ढील के दौरान आयोजित विभिन्न खेलों में 30 हजार नौजवानों ने हिस्सा लिया है।

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