जम्मू, अशोक शर्मा। कर्मचारी राज्य बीमा निगम (ईएसआइसी) बड़ी ब्राह्मणा ने कोरोना वायरस के मुश्किल दौर में किडनी के मरीजों को डायलेसिस की सुविधा नहीं दी जा रही है। वहीं, गवर्नमेंट अस्पताल गांधीनगर की डायलेसिस यूनिट कोरोना मरीजों के लिए आइसोलेशन सेंटर बना दिए जाने के बाद से बंद है। अब खासकर कम आय वर्ग के किडनी के मरीजों को भारी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। कुछ मरीजों ने बताया कि क्षेत्रीय निदेशक अशोक रावत का फोन नहीं उठ रहा है, जबकि मेडिकल सुपरिंटेंडेंट दिल्ली में हैं।

जानकारी के मुताबिक, ईएसआइसी इन दिनों डायलेसिस करवाने वाले मरीजों को नारायणा अस्पताल कटड़ा या बत्रा एमएचएसी अस्पताल भेजा जा रहा है। वहीं, बत्र अस्पताल वालों ने ऐसे हालात में ईएसआइसी द्वारा भेजे जा रहे मरीजों को लेने से इंकार कर दिया है। अब मरीजों के पास नारायणा अस्पताल जाने के अलावा कोई रास्ता नहीं है। मरीज परेशान हैं, लेकिन उनकी सुनने वाला कोई नहीं है।

ईएसआइ के साथ पंजीकृत मरीजों का कहना है कि पहले उन्हें शहर में ही एक निजी अस्पताल में डायलेसिस के लिए भेजा जाता था। वह पिछले कई साल से वहां डायलेसिस करवाते आ रहे थे, लेकिन अब जब कि घरों से निकलना मुश्किल है, उन्हें नारायणा अस्पताल जाने के लिए कहा जा रहा है। दूसरे किसी अस्पताल में शिफ्ट करने के बजाय कोरोना के चलते उन्हें वहीं रहने दिया जाना चाहिए था। मरीज के लिए ऐसे हालात में कटड़ा जाना संभव नहीं है। वहीं, प्राइवेट अस्पतालों ने भी नए मरीज या ऐसे मरीज, जो कहीं और से डायलेसिस करवाते थे, उन्हें लेने से इंकार कर दिया है।

मरीज मुनीर ने बताया कि वह पिछले तीन वर्ष से डायलेसिस करवाते आ रहे हैं। अब कोरोना के चलते उन्हें भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है। ईएसआइसी के अधिकारी उनकी परेशानी समझने को तैयार नहीं हैं। एक अधिकारी दूसरे और दूसरा तीसरे पर अपनी जिम्मेदारी थोप कर पल्ला झाड़ता दिख रहा है।

ईएसआइसी की तरफ से नजदीक में डायलेसिस की सुविधा देने का प्रावधान: एक मरीज राजेश ने कहा कि नियमानुसार ईएसआइसी को मरीज को नजदीक में सुविधा देनी होती है। अगर बड़ी ब्राह्मणा अस्पताल में डायलेसिस संभव नहीं, तो शहर में कम से कम पांच अस्पतालों का ईएसआइसी के साथ इंपैनलमेंट होना चाहिए। हालत यह है कि इस समय ईएसआइसी, बड़ी ब्राह्मणा के साथ शहर के किसी भी अस्पताल के साथ इंपैनलमेंट नहीं है। इससे मरीज परेशान हैं, लेकिन उनकी सुनने वाला कोई नहीं है। मरीजों के अनुसार उन्हें एसएमएस और मेल से भी अपनी परेशानी बताई गई है, लेकिन उनकी ओर से कोई जवाब नहीं आया।

पैसे खर्च कर बचा लें जान, मैं कुछ नहीं कर सकता: मेडिकल सुपरिंटेंडेंट ईएसआइसी बड़ी ब्राह्मणा डॉ. भारत भूषण ने बताया कि जिस निजी अस्पताल में पहले डायलेसिस होता था, उनके साथ इंपैनलमेंट का समय समाप्त हो चुका है। शहर में दूसरे किसी अस्पताल में रेफर करना उनके लिए संभव नहीं है। वह मरीजों को साफ कहते हैं कि वह पैसे खर्च करके कहीं भी जान बचा लें, वह कुछ नहीं कर सकते।

Posted By: Rahul Sharma

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