जम्मू, जागरण संवाददाता। नेशनल कांफ्रेंस के संभागीय अध्यक्ष देवेंद्र सिंह राणा ने जम्मू-कश्मीर पुलिस में सब इंस्पेक्टरों के पदों पर भर्ती की उम्र में 28 साल से 35 साल की छूट देने की बेरोजगार शिक्षित युवाओं की मांगों का पुरजोर समर्थन किया। इसके अलावा उन्होंने जल शक्ति विभाग और पंचायत राज संस्थाओं द्वारा भूमि अधिग्रहण के कारण प्रभावित परिवार के सदस्यों में से एक को सरकारी नौकरी देने के वादे को पूरा करने पर जोर दिया।

राणा ने कहा कि सरकार को जायज मामलों को समझना चाहिए।सब इंस्पैक्टर की भर्ती के लिए आयु सीमा 18 से 28 वर्ष रखी है। जबकि 18 वर्ष में ग्रेजुएशन कर पाना ही संभव नहीं है। राणा ने कहा कि कोरोना और दूसरे हालात ऐसे रहे कि लंबे समय तक विद्यार्थी वर्ग प्रभावित रहा है।ऐसे में जरूरी है कि उन्हें आयु सीमा में छूट दी जाए।

बेरोजगार शिक्षित युवा प्रतिनिधिमंडल ने प्रांतीय अध्यक्ष को अवगत कराया कि 2009 और 2016 में इस तरह की पहल के बाद पुलिस विभाग में कोई भर्ती अभियान नहीं चलाया गया है। 2010 के आसपास स्नातक करने वाले उम्मीदवारों को पिछले 11 वर्षों में परीक्षा में बैठने का केवल एक मौका मिला है।

उन्होंने कहा कि गुजरात, केरल और बिहार जैसे राज्यों में समान श्रेणी के पदों के लिए एसआई पदों के लिए आयु सीमा 21 से 35 वर्ष के मुकाबले जम्मू-कश्मीर में 28 वर्ष रखी है। युवाओं ने कहा कि सरकार ने जेकेपीसी, केपीएस परीक्षा में 32 साल से 37 साल की उम्र में एक बार छूट दी है। वही छूट जम्मू-कश्मीर पुलिस में एसआई पदों के उम्मीदवारों को दी जानी चाहिए। युवाओं ने कहा कि वर्तमान प्रशासन ने मंजूरी दे दी है। 800 एसआई पदों पर भर्ती के लिए छूट और अधिक अनिवार्य है। उन्होंने केंद्रीय सेवाओं में जम्मू-कश्मीर के उम्मीदवारों के लिए पांच साल की छूट के लिए प्रशासन का ध्यान आकर्षित किया, जो अधिवास प्रमाण पत्र के मामले में 1960 और 1989 के बीच पैदा हुए हैं।

राजेश्वर सिंह के नेतृत्व में बेरोजगार शिक्षित युवा प्रतिनिधिमंडल में गौरव सिंह, जतिंदर सिंह, जसप्रीत सिंह, इशफाक पर्रे, बिशन कुमार, अमित वर्मा, शाहिद, मनजीत सिंह, अंशुमन सिंह, बशारत, मुश्ताक बदाना, शौकत असब, वनीत और त्रिलोचन सिंह शामिल थे।

नगरोटा में पूर्व सरपंच प्रीतम सिंह के नेतृत्व में एक अन्य प्रतिनिधिमंडल ने भी जल शक्ति विभाग और पंचायत राज संस्थानों द्वारा विभिन्न उपयोगिता सेवाओं के लिए अधिग्रहित की गई भूमि के परिवार के एक सदस्य की नियुक्ति के मुद्दे पर प्रकाश डाला। उस समय सरकार द्वारा समझौते के बावजूद, इस संबंध में कोई नियुक्ति नहीं की गई है। प्रतिनिधिमंडल ने कहा, वे भूमि के मुआवजे में रुचि नहीं रखते थे। बल्कि चाहते थे कि उनके बच्चों को सरकारी क्षेत्र में समाहित किया जाए। प्रशासन ने वादा किया था।

राणा ने प्रतिनिधिमंडलों को आश्वासन दिया कि सूचीबद्ध मुद्दों पर विचार करने और अनुकूल निर्णय के लिए संबंधितों के साथ गंभीरता से लिया जाएगा।