कठुआ, राकेश शर्मा। 31 अक्टूबर यानी आज जम्मू कश्मीर की पूरी व्यवस्था बदल जाएगी। जम्मू कश्मीर आज से राज्य न होकर केंद्र शासित प्रदेश होगा। समूची व्यवस्था बदल जाएगी और लोगों की उम्मीदें भी साकार रूप लेने लगेंगी। सात दशक के उपरांत व्यवस्थाएं बदलने से अब नए जम्मू कश्मीर का उदय होगा। यह उदय लोगों के लिए किसी आशा की किरण से कम नहीं है। नई व्यवस्था शुरू होने से पूर्व ही जम्मू कश्मीर के प्रवेशद्वार कठुआ जिले के लोगों की उम्मीदें भी बढऩे लगी हैं।

लोगों को उम्मीद है कि अब जिले में ठप पड़ी विकास की दर्जनों परियोजनाएं शुरू होंगी, जिससे लोगों को लाभ मिलेगा। कठुआ जिले में की महत्वपूर्ण परियोजनाओं में शामिल शाहपुर कंडी बैराज परियोजना, उज्ज मल्टीपर्पज प्रोजेक्ट, कठुआ-बसोहली-भद्रवाह रेल ङ्क्षलक के साथ यहां के कई धार्मिक स्थलों को पर्यटन स्थल में विकसित करने की योजनाएं हैं, लेकिन यह योजनाएं अभी तक पूरी नहीं हो सकी हैं। अब केंद्र शासित प्रदेश बनने के बाद कठुआ के लोगों में इन महत्वपूर्ण परियोजनाओं के पूरा होने की उम्मीद जागने लगी है।

लोगों का कहना है कि सात दशक बाद कश्मीर केंद्रित सरकारों से मुक्त मिली है। अब जम्मू कश्मीर की समूची प्रशासनिक और कानूनी व्यवस्था केंद्र सरकार के अधीन होगी। इससे लोगों को बराबर हक मिलेगा। वर्षों से लटकी पड़ी विकास परियोजनाओं के लिए भी फंड मिलेगा, जो जिले को नया रूप देगा। कई ऐसी परियोजनाएं हैं, जो पिछले 40 वर्षों से अधर में लटकी थीं। लोगों ने सिर्फ परियोजनाएं के नाम ही सुने थे, लेकिन उनका काम नहीं देखा यानी जमीनी स्तर पर उनका कोई नामोनिशान ही नहीं है।

ये हैं परियोजनाएं

  • 500 करोड़ रुपये की रंजीत सागर झील वॉटर स्पोटर्स परियोजना पांच साल से फंड के अभाव में परवान नहीं चढ़ पाई
  • 3000 करोड़ रुपये की शाहपुर कंडी बैराज परियोजना का कार्य भी कछुआ चाल से सिर्फ पंजाब में चल रहा है, जम्मू कश्मीर में शुरूआत भी नहीं हुई
  • 5850 करोड़ रुपये का उज्ज मल्टीपर्पज प्रोजेक्ट कई वर्षों से मंजूर है, लेकिन फंड के अभाव में इसका कार्य भी शुरू नहीं हुआ
  • 50 करोड़ रुपये की नगरी-पल्ली डबललेन सड़क परियोजना भी फंड की कमी के कारण अधर में लटकी है। 

शाहपुर कंडी बैराज परियोजना का कार्य में तेजी की उम्मीद

चार दशक से पूर्व सरकारों की अनदेखी से शाहपुर कंडी बैराज परियोजना भी अधर में लटकी है। कंडी क्षेत्र में 1.33 हजार हेक्टेयर भूमि में हरित क्रांति लाने के उद्देश्य से शुरू की गई 3000 करोड़ रुपये की इस परियोजना के कार्य में अब तेजी आने की उम्मीद जगी है। इसके बनने से जम्मू कश्मीर को पंजाब से 1150 क्यूसिक पानी सिंचाई के लिए मिलेगा। परियोजना का काम हो रहा है, लेकिन अभी सिर्फ पंजाब में ही हो रहा है। एक वर्ष पूर्व नया समझौता हुआ था, बावजूद इसके अभी परियोजना सिर्फ पंजाब तक सीमित है। जम्मू कश्मीर की पूर्व सरकारों ने इस परियोजना को अपने क्षेत्र में शुरू करने के लिए दिलचस्पी नहीं दिखाई, लेकिन अब इसमें सीधे केंद्र का हस्तक्षेप होगा, जिससे जम्मू कश्मीर के जिला कठुआ में भी परियोजना को गति मिलने की उम्मीद है।

पर्यटन के विकास में भी जगी उम्मीद

पांच वर्ष पूर्व कठुआ जिला के बसोहली तहसील में स्थित रंजीत सागर झील में वॉटर स्पोटर्स शुरू करने की योजना बनी थी। यह परियोजना 500 करोड़ रुपये की थी, लेकिन फंड के अभाव में परवान नही चढ़ पाई है। इसके अलावा मिनी कश्मीर कहे जाने वाले कठुआ जिले के बनी क्षेत्र में पर्यटन की अपार संभावनाएं हैं। बनी के सरथल और ढग्गर क्षेत्र में हर साल करीब तीन लाख पर्यटक आते हैं। अब उम्मीद है कि केंद्र सरकार इस पर्यटन स्थल का विकसित करेगी। इससे कश्मीर जाने से पर्व पर्यटक जम्मू कश्मीर के प्रवेशद्वार कठुआ जिला के पर्यटन स्थलों का रुख करेंगे। वहीं, बॉर्डर टूरिज्म सिर्फ फाइलों तक सीमित रहा है। अब केंद्र सरकार के हस्तक्षेप से कठुआ जिला के हीरानगर में स्थित अंतरराष्ट्रीय सीमा को भी वाघा बॉर्डर की तरह विकसित किया जा सकता है, जिससे बॉर्डर टूरिज्म को बढ़ावा मिलेगा।

उज्ज मल्टीपर्पज प्रोजेक्ट

उपजिला बिलावर के पंजतीर्थी में 5850 करोड़ रुपये का उज्ज मल्टीपर्पज प्रोजेक्ट मंजूर हैं। मगर फंड ही नहीं मिल पाया है, जिस कारण परियोजना पर अभी तक काम नहीं हो पाया है। उज्ज मल्टीपर्पज प्रोजेक्ट के बनने से क्षेत्र के किसानों की 31380 हेक्टेयर भूमि की सिंचाई की जानी थी। इसके साथ ही परियोजना के तहत 196 मैगावाट बिजली भी कठुआ को मिलेगी। फंड के अभाव में रुके उज्ज मल्टीपर्पज प्रोजेक्ट को भी केंद्र शासित प्रदेश बनने के बाद गति मिलने की उम्मीद है।

कठुआ-बसोहली-भद्रवाह रेल लिंक की भी जगी उम्मीद

10 वर्ष पूर्व कठुआ-बसोहली-भद्रवाह लिंक रेल लाइन की परियोजना को मंजूरी दी गई थी। दस वर्ष बीतने के बाद भी कठुआ-बसोहली-भद्रवाह लिंक रेल लाइन परियोजना सिरे नहीं चढ़ सकी। परियोजना शुरू करने के लिए फिजिकल सर्वे हो चुका है, लेकिन मंजूरी नहीं मिलने से लंबित पड़ा है। इससे जिला के लोगों को कश्मीर की तरह ही पहाड़ी क्षेत्रों में रेल की सुविधा मिलनी थी। लेकिन अभी तक सिरे नहीं चढ़ सकी। मगर जम्मू कश्मीर के केंद्र शासित प्रदेश बनने के बाद इस परियोजना के सिरे चढ़ने की उम्मीद जगी है।

दस वर्ष से लंबित नगरी-पल्ली डबललेन परियोजना

दस वर्ष से फंड के अभाव से अधर में लटकी नगरी-पल्ली डबललेन सड़क परियोजना को भी फंड मिलने की उम्मीद जगी है। इससे कठुआ के लोगों को पंजाब से लखनपुर के अलावा अन्य वैकलिपक मार्ग की सुविधा मिलेगी। करीब 50 करोड़ की ये सड़क परियोजना पर फंड के अभाव में आजतक कार्य नहीं हो पाया है।

  • केंद्र शासित प्रदेश बनने से कठुआ के विकास में तेजी आएगी। पूर्व की सरकारें जम्मू संभाग से भेदभाव करती रही हैं। करोड़ों की परियोजनाएं फंड के अभाव में रुकी थी, जिन्हें अब गति मिलेगी। अब केंद्र का सीधा हस्तक्षेप होगा। कहीं भी फंड खर्च करने में अड़चन नहीं आएगी। कहां कितना फंड खर्च करना है, इसकी योजना भी केंद्र बनाएगा और सीधे फंड संबंधित एजेंसी को मिलेंगे। जिसका हिसाब भी लेने वाले होंगे और देने वाले भी। -राजीव जसरोटिया, पूर्व मंत्री, जम्मू कश्मीर
  • केंद्र सरकार ने जम्मू कश्मीर को केंद्र शासित प्रदेश बनाकर यहां के लोगों के साथ सात दशकों से जारी भेदभाव को दूर करने का ऐतिहासिक फैसला किया है। इससे कठुआ ही नहीं बल्कि पूरे जम्मू कश्मीर को काफी लाभ मिलेगा। यहां औद्योगिक हब बनने की पूरी उम्मीद है, जिससे हजारों युवाओं को रोजगार मिलेगा। रेल परियोजनाओं को भी गति मिलेगी। कठुआ जिला में पर्यटन की रुकी करोड़ों रुपये की परियोजनाएं भी परवान चढ़ेंगी। -नरेश शर्मा, अध्यक्ष, नगर परिषद कठुआ
  • केंद्र शासित प्रदेश बनने से पूरे जम्मू कश्मीर को लाभ होगा। इसमें कठुआ जिले को विशेषकर और भी होगा। जम्मू कश्मीर के प्रवेशद्वार के साथ ही यहां पर पर्यटन की आपर संभावनाएं हैं। इसे देखते हुए केंद्र अवश्य प्रभावी कदम उठाएगा। शहर के समुचित विकास के लिए सीवरेज जैसे मुख्य परियोजनाएं भी शुरू होने की उम्मीद है। केंद्र जम्मू कश्मीर को राजनीतिक तौर पर अब तक पिछडऩे की भरपाई भी करेगा। -प्रो. राम मूर्ति शर्मा, कठुआ विकास मंच 

Posted By: Rahul Sharma

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