जम्मू, जागरण संवाददाता। केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर के उपराज्पयाल मनोज सिन्हा ने प्रदेश में बेमौसम बारिश और हिमपात के कारण किसानों और सेब उत्पादकों को हुए नुकसान प्राकृतिक आपदा घोषित किया है और जल्द ही सभी पात्र किसानों को राहत राशि वितरित किए जाने का आश्वास दिया है। सबसे ज्यादा नुकसान खरीफ की बासमती धान की फसल को पहुंचा है । बासमती की 370 लेट वैरायटी उत्पादक किसानों की फसल पूरी तरह से तबाह हो चुकी है। जम्मू और कश्मीर का सेब उत्पादक इस समय पूरी तरह से खुद का असहाय महसूस कर रहा है। जम्मू संभाग के सीमावर्ती परगवाल के किसान तो बुधवार को सड़कों पर मुवावजे के लिए आ गए।

बता दें कि जम्मू के अंतरर्राष्ट्रीय सीमा पर रहने वाले किसानों की एकमात्र फसल धान की बासमती फसल है। धान की इस फसल पर किसान का भविष्य और उसकी साल भर की कमाई निर्भर करती है। अगर खरीफ की इस फसल पर किसान की कमर टूट जाए तो खरीफ की फसल पर वे पूरी तरह साल भर निर्भर नही रह सकताा। उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने भी किसानों की खरीफ की फसल पर लागत को देखते हुए न्योच्चित फैसला लेते हुए बुधवार को प्रशासनिक काउंसिल की बैठक में इसे प्रकातिक आपदा घोषित कर किसानों को राहत की उम्मीद जगी है।

सलाहकार ने बीमा कंपनियों को पीएम फसल बीमा योजना के तहत फसलों के दावों का तुरंत निपटान करने का निर्देश दिये है। किसानों ने आगे रबी फसलों को मिट्टी में अत्यधिक नमी के कारण बुआई में देरी होने के कारण नुकसान की आशंका जताई भी दी है।ओलावृष्टि प्रभावित किसानों ने की मुआवजे की मांगदूसरी तरफ, जम्मू-कश्मीर में बासमती धान की खेती करने वाले किसानों ने ओलावृष्टि से हुए नुकासन के एवज में मुआवजे की मांग की है। इस प्राकृतिक आपदा के तीन दिन बाद भी जम्मू-कश्मीर प्रशासन ने अभी तक नुकसान के मुआवजे की घोषणा नहीं कर पाया है कि मुआवजे की राशि किस तरह दी जाएगी। राजस्व अधिकारी अभी भी धान को हुए नुकसान का आकलन कर रहे हैं।किसानों ने प्रत्येक परिवार को 15,000 प्रति कनाल का मुआवजा देने की घोषणा करने की मांग कर रहे हैं। कुछ किसानों ने कि इस साल फसल का नुकसान झेलने वाले किसानों को मुआवजा देने के लिए दिल्ली सरकार के मॉडल का पालन करने का आग्रह किया।

दिल्ली सरकार ने हाल ही में इस साल अपनी फसल गंवाने वाले किसानों को 50,000 रुपए प्रति हेक्टेयर देने की घोषणा की थी। आरएस पुरा के अलावा ओलावृष्टि से सांबा और कठुआ जिलों में भी खड़ी फसलों को नुकसान पहुंचा है।यहां तक कश्मीर के सेब उत्पादकों का सवाल है, उन्हें भी बेमौसमी बर्फबारी से काफी नुकसान हुआ है। बेशक जम्मू कश्मीर के मौसम विभाग के डायरेक्टर सोनम लोटस का कहना है कि सेब उत्पादकों ने मौसम की पूर्व सूचना पर अपने बागानों से सेब की फसल काे समय रहते हुए तुड़वा लिया, लेकिन कुछ बागवानों को इसका नुकसान हुआ है। मौसम विभाग कि पूर्व अनुमान पर अगर भरोसा किया हाेता तो शायद किसानों को नुकसान नही झेलना पड़ता।

Edited By: Vikas Abrol