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जम्मू-कश्मीर में महिलाएं कितनी सुरक्षित? सामने आए चौंकाने वाले आंकड़े, पति की प्रताड़ना के मामले दुष्कर्म से दोगुने

Published: Mon, 19 Oct 2026 01:44 PM (IST)

जम्मू में महिलाओं के खिलाफ छेड़छाड़, दुष्कर्म और घरेलू हिंसा जैसे अपराध बड़ी चुनौती बने हुए हैं, 2021-23 के बीच ...और पढ़ें

जम्मू-कश्मीर में सखी सेंटरों में शिकायतें 893 से बढ़कर 1979 हुईं। (फाइल फोटो)

जम्मू-कश्मीर में सखी सेंटरों में शिकायतें 893 से बढ़कर 1979 हुईं। (फाइल फोटो)

HighLights

  1. जम्मू में 2021-23 के बीच 1232 महिला अपराध मामले दर्ज।

  2. छेड़छाड़, दुष्कर्म, घरेलू हिंसा जम्मू में महिला सुरक्षा की बड़ी चुनौती।

  3. सखी वन-स्टॉप सेंटरों पर शिकायतें एक साल में दोगुनी से अधिक।

जागरण संवाददाता, जम्मू। छेड़छाड़, दुष्कर्म, घरेलू हिंसा और ससुराल में प्रताड़ना जैसे अपराध जम्मू में महिला सुरक्षा के सामने बड़ी चुनौती बने हुए हैं। जम्मू-कश्मीर सरकार के गृह विभाग के अनुसार, वर्ष 2021 में जम्मू जिले में 416 मामले दर्ज हुए, 2022 में यह संख्या बढ़कर 421 हो गई और 2023 में 395 मामले दर्ज हुए। 2022 की तुलना में गिरावट जरूर आई, लेकिन अपराधों पर पूरी तरह अंकुश नहीं लग सका।

इसके बाद के आंकड़े सार्वजनिक नहीं किए गए हैं। इन आंकड़ों में अलग-अलग प्रकृति के अपराध शामिल हैं, इसलिए केवल कुल संख्या से किसी एक अपराध की स्थिति का आकलन नहीं किया जा सकता।

कई मामलों में महिलाओं को पति या ससुराल पक्ष की ओर से मानसिक और शारीरिक उत्पीड़न झेलना पड़ता है। दूसरी ओर, सार्वजनिक स्थानों पर छेड़छाड़ और यौन उत्पीड़न की घटनाएं छात्राओं और कामकाजी महिलाओं की सुरक्षा को प्रभावित करती हैं। रोकथाम के लिए शिकायतों पर त्वरित कार्रवाई, नियमित पुलिस गश्त और पीड़िताओं को सहायता जरूरी है।

2024 में 3366 मामले दर्ज

राष्ट्रीय अपराध रिकार्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) के अनुसार, 2023 में पूरे जम्मू-कश्मीर में महिलाओं के खिलाफ अपराध के 3653 मामले दर्ज हुए।

इनमें पति या रिश्तेदारों की क्रूरता के 524 और दुष्कर्म के 231 मामले थे। वर्ष 2024 में 3366 मामले दर्ज किए गए। चुनौती यह है कि प्रभावी कदम उठाए जाएं, ताकि महिलाएं घर और सार्वजनिक स्थानों पर सुरक्षित महसूस कर सकें।

सखी सेंटर बन रहे सहारा

विधानसभा में समाज कल्याण मंत्री ने बताया था कि जम्मू सहित केंद्र शासित प्रदेश के हर जिले में सखी वन-स्टॉप सेंटर सक्रिय हैं।

यहां पीड़ित महिलाओं को एक ही छत के नीचे चिकित्सा, कानूनी और पुलिस सहायता तथा मनोवैज्ञानिक परामर्श मिलता है। इन केंद्रों में 2023-24 में 893 मामले आए थे, जबकि 2024-25 में शिकायतें बढ़कर 1979 हो गईं।