अवधेश चौहान, जम्मू

कोरोना वायरस के संक्रमण को रोकने के लिए लॉकडाउन का समाज पर सकारात्मक असर भी दिख रहा है। अभी पांच दिन के लॉकडाउन में ही समाज पूरी तरह अपराध मुक्त हो गया-सा लगता है। मादक पदार्थो की तस्करी शत-प्रतिशत रुक गई। चोरी-झपटमारी, छेड़खानी, पशु तस्करी जैसी घटनाएं भी सामने नहीं आ रही हैं। मौजूदा समय में तमाम परेशानियों के बीच यह सुकूनदायी पहलू है।

अंतरजिला या अंतरराज्यीय वाहनों की आवाजाही पर रोक की वजह से कश्मीर घाटी या पड़ोसी राज्य पंजाब की तरफ से नशे की खेप पर खुद-ब-खुद रोक लग गई। दूसरे राज्यों से आने वाली नशे की दवा की खेप आए दिन पकड़ी जाती थी। मगर अभी ऐसा नहीं हो रहा। इस साल के पहले दो महीनों में मादक पदार्थ और नशे की की तस्करी के करीब 30 मामले दर्ज हुए। कश्मीर घाटी से चरस, हेरोइन और अफीम, कोकीन और गांजे की तस्करी तस्करी होती थी। लॉकडाउन से ऐसे पदार्थो की तस्करी रुक गई। इससे चोरी, लूटपाट, झपटमारी जैसी घटनाओं पर भी लगाम लग चुकी है। पांच दिनों में ऐसा कोई मामला दर्ज नहीं हुआ। जम्मू के एसएसपी श्रीधर पाटिल ने कहा कि लॉकडाउन के कारण तस्करों की मूवमेंट रुकी है। शहर में बिछाए गए कंटीले तारों और सख्ती के कारण अपराध नियंत्रण हो गया है। राज्य के बार्डरों पर भी आने-जाने वालों पर रोक होने से अंतरराष्ट्रीय तस्करी भी रुक गई। लॉकडाउन के बीच भी तलाशी की जरूरत क्रांति दल के प्रधान प्रीतम शर्मा का कहना है कि यह उचित समय है कि पुलिस मादक पदार्थ और नशे की दवा की तस्करी में संलिप्त माफिया के ठिकानों पर दबिश दें। लॉकडाउन का उल्लंघन करने वालों से पुलिस मारपीट न करे। बेहतर हो तो उनकी तलाशी ली जाए। क्योंकि कुछ लोग अभी भी मादक पदार्थो की तस्करी से बाज नहीं आ रहे हैं।

------------ धैर्य से काम लें तो छूट सकती है नशे की लत एक निजी संस्था के सर्वे के अनुसार जम्मू जिले में ही चार वर्षों में करीब 700 युवाओं की जान नशे के चक्कर में जा चुकी है। युवाओं को नशे के दलदल से निकालने के तमाम प्रयास विफल साबित होते रहे। नशे की लत में पड़ जाने के बाद युवक उसकी पूर्ति के लिए अपराध में लिप्त होते हैं। उनकी मानसिक स्थिति बिगड़ जाती है। समाजसेवी संगठन टीम जम्मू के चेयरमैन जोरावर सिंह जंवाल का कहना है कि लॉकडाउन नशा छोड़ने का सबसे अच्छा मौका है। उन्होंने अभिभावकों से अनुरोध किया कि लॉकडाउन के दौरान बच्चों को समझाएं, क्योंकि यह उनकी धैर्य की परीक्षा है। अगर इस बार नहीं तो फिर यह लत कभी नहीं छूटेगी।

----------- अभिभावक बच्चों के व्यवहार पर रखें ध्यान कुछ पदार्थ जैसे अल्कोहल, गांजा और निकोटीन की लत युवाओं को बेचैन करती है। तलब लगने पर दौरे भी पड़ सकते हैं। उनमें चिड़चिड़ापन होना सामान्य बात है। अगर 21 दिन के लॉकडाउन में नशे में फंस चुके व्यक्ति इच्छाशक्ति को मजबूत कर ले तो लत छूट जाएगी। ऐसे में अभिभावकों को भी नशे में फंसे युवकों के प्रति सहानुभूति रखनी चाहिए। उनके व्यवहार पर ध्यान रखें।

डॉ. राजेंद्र थापा पांच दिन से जारी लॉकडाउन में कोई मादक पदार्थ की तस्करी से संबधित मामला सामने नहीं आया है। सब ठीक रहा तो पूरे लॉकडाउन में समाज पर इसका सकारात्मक असर भी दिखेगा। हर व्यक्ति का दायित्व है कि स्वस्थ और नशामुक्त समाज और देश के निर्माण में भागीदार बने रहें।

- मुकेश सिंह, आइजीपी, जम्मू

Posted By: Jagran

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