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मां से मारपीट, दुष्कर्म के प्रयास का आरोप! जम्मू हाई कोर्ट ने बेटे की जमानत की खारिज, कहा- गरिमा नहीं लांघ सकते

Published: Tue, 01 Sep 2026 03:00 PM (IST)

जम्मू फास्ट ट्रैक कोर्ट ने अपनी बुजुर्ग मां से मारपीट, यौन उत्पीड़न और दुष्कर्म के प्रयास के आरोपी बेटे की ...और पढ़ें

बुजुर्ग मां से मारपीट के आरोपी बेटे की जमानत खारिज। (फाइल फोटो)

बुजुर्ग मां से मारपीट के आरोपी बेटे की जमानत खारिज (फाइल फोटो)

HighLights

  1. बुजुर्ग मां से मारपीट, यौन उत्पीड़न के आरोपी की जमानत याचिका खारिज।

  2. आरोपी पर मां के साथ दुष्कर्म का प्रयास करने का भी आरोप।

  3. कोर्ट ने कहा, पारिवारिक विवाद गरिमा की सीमाएं लांघने का अधिकार नहीं देता।

जागरण संवाददाता, जम्मू। जम्मू की फास्ट ट्रैक कोर्ट ने अपनी बुजुर्ग विधवा मां से कथित मारपीट, यौन उत्पीड़न और दुष्कर्म के प्रयास के आरोपित व्यक्ति की जमानत याचिका खारिज कर दी। कोर्ट ने कहा कि पारिवारिक रिश्ते में कितना भी विवाद क्यों न हो, इससे किसी व्यक्ति को गरिमा और विश्वास की बुनियादी सीमाएं लांघने का अधिकार नहीं मिल जाता।

फास्ट ट्रैक कोर्ट के प्रिजाइडिंग आफिसर अमरजीत सिंह लंगेह ने डिग्याना निवासी सतनाम सिंह की जमानत अर्जी खारिज करते हुए कहा कि जांच के इस चरण में आरोपित को जमानत देने का कोई आधार नहीं बनता।

अभियोजन के अनुसार, 28 जुलाई को आरोपित कथित तौर पर डिग्याना कैंप स्थित अपनी मां के घर में घुसा और उसके साथ मारपीट की। आरोप है कि उसने लकड़ी के टूटे दरवाजे के हिस्से से महिला पर हमला किया, उसके साथ यौन दुर्व्यवहार किया और दुष्कर्म का प्रयास किया। घटना के एक हिस्से की रिकार्डिंग पीड़िता की पोती ने की थी। कुछ लोगों के भी घटना के गवाह होने की बात सामने आई है।

जांच के दौरान बढ़ीं कानूनी धाराएं

इस संबंध में गंग्याल पुलिस स्टेशन में मामला दर्ज किया गया। जांच के दौरान दुष्कर्म के प्रयास, यौन उत्पीड़न और घर में अनधिकृत प्रवेश से संबंधित धाराएं जोड़ी गईं। पुलिस ने कथित वीडियो क्लिप कब्जे में लेकर जांच के लिए जम्मू स्थित फोरेंसिक साइंस लेबोरेटरी भेजी है। आरोपित ने आरोपों से इन्कार करते हुए दावा किया कि पैतृक संपत्ति को लेकर पारिवारिक विवाद के कारण उसे झूठा फंसाया गया है।

एक अगस्त से हिरासत में आरोपित

बचाव पक्ष ने यह भी बताया कि आरोपित अवसाद और चिंता का इलाज करा रहा है, एक अगस्त से हिरासत में है और पत्नी तथा दो स्कूली बच्चों का एकमात्र कमाने वाला है। अभियोजन ने जमानत का विरोध करते हुए कहा कि आरोपित के बाहर आने पर पीड़िता और अन्य गवाहों को शारीरिक या मानसिक दबाव का सामना करना पड़ सकता है।

कोर्ट ने जमानत से किया इन्कार

कोर्ट ने कहा कि अब तक जुटाई गई सामग्री गंभीर और गैर-जमानती अपराधों में आरोपित की प्रथमदृष्टया संलिप्तता दर्शाती है। कोर्ट ने मामले को मानव गरिमा, पारिवारिक विश्वास और ‘पवित्र मातृ संबंध’ के मूल सिद्धांतों के विरुद्ध बताया। कोर्ट ने यह भी ध्यान दिया कि आरोपित की पिछली जमानत अर्जी 14 अगस्त को खारिज हो चुकी है और नई अर्जी में परिस्थितियों में कोई महत्वपूर्ण बदलाव नहीं दिखाया गया।